Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में मतदान जारी, 12.7 करोड़ वोटर करेंगे 1,981 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला
ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए सुबह से ही मतदान शुरू हो चुका है। लोकतंत्र के इस महायज्ञ में 51 राजनीतिक दल चुनावी मैदान में हैं और करीब 12.7 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। खास बात यह है कि लगभग आधी मतदाता आबादी 18 से 37 वर्ष के युवाओं की है, जिससे यह चुनाव युवा शक्ति के प्रभाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लगभग 45 लाख से अधिक मतदाता पहली बार वोट डाल रहे हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान का नाम सबसे आगे है। उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को सत्ता की प्रबल दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी के शफीकुर रहमान और नेशनल सिटिजन्स पार्टी (एनसीपी) के नेता नाहिद इस्लाम भी प्रमुख चेहरे के रूप में सामने हैं।
नाहिद इस्लाम ने दावा किया है कि उनकी पार्टी सहित 11 दलों का गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में होगा। चुनाव में कुल 1,981 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 249 निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं। इससे मुकाबला बहुकोणीय और दिलचस्प हो गया है। बीएनपी नेतृत्व को उम्मीद है कि वह संसद की 300 में से दो-तिहाई सीटें जीत सकती है। मतदान के दौरान कई प्रमुख नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में वोट डाला और जनता से शांतिपूर्ण भागीदारी की अपील की। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि पिछले चुनावों में वे मतदान नहीं कर पाए थे, इसलिए इस बार वोट डालना उनके लिए खास अनुभव है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है। महिलाओं के संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने महिला उम्मीदवारों और मतदाताओं के खिलाफ हिंसा, डराने-धमकाने और डिजिटल उत्पीड़न की शिकायतें उठाई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों से अपील की है कि वे महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न को बर्दाश्त न करें। संगठन ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए महिलाओं की सुरक्षित, समान और सार्थक भागीदारी आवश्यक है। कुल मिलाकर, यह चुनाव न केवल सत्ता परिवर्तन की संभावना लिए हुए है, बल्कि यह भी तय करेगा कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा भागीदारी और महिला अधिकारों को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।
एपी सिंह की रिपोर्ट -
अमेरिकी संसद में ट्रंप के टैरिफ पर मतभेद, कनाडा पर लागू आयात शुल्क के खिलाफ प्रस्ताव पारित
वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा पर लगाए गए आयात शुल्क को निरस्त करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पारित किया है। यह कदम उस राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को समाप्त करने के लिए उठाया गया, जिसके आधार पर ट्रंप प्रशासन ने कनाडाई उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया था। मतदान के दौरान 219 सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में और 211 ने विरोध में वोट दिया। खास बात यह रही कि छह रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर डेमोक्रेट्स का समर्थन किया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने वर्ष 2025 की शुरुआत में कनाडा से आने वाले सामान पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था। बाद में इसे बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दिया गया, हालांकि यह वृद्धि केवल उन वस्तुओं पर लागू हुई जो अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) के अंतर्गत नहीं आती थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के टैरिफ का असर सीधे आम उपभोक्ताओं और कंपनियों पर पड़ता है, क्योंकि आयात महंगा होने से बाजार में कीमतें बढ़ती हैं। टैक्स फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन शुल्कों की वजह से 2025 में औसतन हर अमेरिकी परिवार पर करीब 1,000 डॉलर और 2026 में लगभग 1,300 डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।
हालांकि, निचले सदन में प्रस्ताव पारित हो चुका है, लेकिन इसे प्रभावी बनाने के लिए सीनेट की स्वीकृति भी जरूरी है। यदि राष्ट्रपति ट्रंप इस विधेयक को वीटो करते हैं, तो उसे पलटने के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए होगा, जो मौजूदा हालात में आसान नहीं दिखता। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम बताता है कि अमेरिका में व्यापारिक नीतियों को लेकर सहमति नहीं है और राष्ट्रपति की आर्थिक रणनीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में यह विवाद अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। एपी सिंह की रिपोर्ट-
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi




















