अमेरीकी सांसदों ने चेताया, 'जरूरी खनिजों पर चीन की पकड़ से डिफेंस इंडस्ट्री को खतरा'
वाशिंगटन, 25 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका की ओर से महत्वपूर्ण खनिजों और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन्स की ओर बढ़ते कदमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण खनिजों पर चीन का दबदबा संकट के समय में अमेरिकी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को कमजोर कर सकता है। वहीं, पेंटागन ने घरेलू सप्लाई चेन के पुनर्निर्माण के लिए किए गए विवादित इक्विटी निवेश और मूल्य गारंटी का बचाव किया है।
सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष रोजर विकर ने सप्लाई चेन के पुनर्निर्माण पर कांग्रेस की सुनवाई में कहा, यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कहना नहीं होगा कि महत्वपूर्ण खनिजों पर चीन के संदर्भ में अमेरिका की निर्भरता हमारी सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरियों में से एक है। उन्होंने चेतावनी दी कि दुर्लभ धातुओं (रेयर अर्थ) के निर्यात में कटौती की धमकियों से अमेरिकी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग घुटनों पर आ जाती और अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान होता।
पेंटागन औद्योगिक नीति प्रमुख माइकल कैडेनाजी ने सीनेटरों को बताया कि यह जोखिम तत्काल है। उन्होंने कहा, यह कोई सैद्धांतिक जोखिम नहीं है। यह हमारी नेशनल सिक्योरिटी के लिए एक स्पष्ट और मौजूदा खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि बीजिंग इन सप्लाई चेन को हथियार बना सकता है, जिससे हमारे डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस में रुकावट आने और संकट में मिलिट्री की तैयारी से समझौता करने का खतरा है।
कैडेनाजी ने बताया कि विभाग ने डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट के टाइटल तीन और इंडस्ट्रियल बेस फंड के जरिए खनिज क्षेत्र में 975 मिलियन डॉलर का निवेश किया और चार स्तंभों पर बनी व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें उत्पादन को वापस लाना, सहयोगियों के साथ काम करना, रिसर्च और रीसाइक्लिंग में निवेश व राष्ट्रीय रक्षा भंडार का आधुनिकीकरण करना शामिल है।
उन्होंने दुर्लभ धातुओं के उत्पादन को सुरक्षित करने के लिए एमपी मैटेरियल्स समझौते के जिक्र किया। इसके अलावा, जर्मेनियम, गैलियम और एंटीमनी समेत 13 अलग-अलग नॉनफेरस मेटल्स का प्रोडक्शन करने वाला अमेरिका में एक स्मेल्टर बनाने के लिए कोरिया जिंक पहल का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने रीसाइक्लिंग की कोशिशों पर भी जोर दिया, जिसमें एल्युमिनियम रिफाइनिंग से बचे अपशिष्ट अवशेषों से गैलियम और स्कैंडियम रिकवर करने के लिए इन्वेस्टमेंट शामिल है।
हालांकि, दोनों दलों के सांसदों ने पेंटागन पर कैलिफोर्निया में एमपी मटेरियल्स नाम की दुर्लभ धातु खनन कंपनी में 400 मिलियन डॉलर की लागत से 15 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी लेने के उसके फैसले पर दबाव डाला। रैंकिंग मेंबर जैक रीड ने इस तरह के निवेश के कानूनी आधार पर सवाल उठाया और कहा कि डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट में इक्विटी निवेश का बिल्कुल भी जिक्र नहीं है। उन्होंने डील के कानूनी आधार, फाइनेंशियल शर्तों और स्ट्रेटेजिक वजह पर स्पष्टता मांगी।
कैडेनाजी ने इक्विटी निवेश का बचाव करते हुए कहा कि यह निजी निवेश के लिए उत्प्रेरक है, खासकर उस स्थिति में जब बाजार-आधारित दृष्टिकोण विफल रहा। उन्होंने तर्क दिया कि मूल्य-न्यूनतम खुले बाजार के विश्लेषण के आधार पर तय किए गए, ताकि चीन की ओर से नियंत्रित मूल्य-न्यूनतम का मुकाबला किया जा सके।
इंडस्ट्रियल बेस रेजिलिएंस के एक्टिंग डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी जेफरी फ्रैंकस्टन ने कहा कि इस कोशिश को पूरे और एक साथ इंटर-एजेंसी सहयोग से टर्बोचार्ज किया गया था, जिसमें अधिकारी कच्चे माल से लेकर तैयार प्रोडक्ट तक सप्लाई चेन को मैप करने के लिए रोजाना काम कर रहे थे।
सुनवाई में परमिट और पर्यावरण सुरक्षा उपायों को लेकर मतभेद भी सामने आया। सीनेटर डैन सुलिवन ने कहा कि पर्यावरण संबंधी पाबंदियां माइनिंग डेवलपमेंट के लिए विवाद का एक बड़ा मुद्दा रही हैं, जबकि सीनेटर माजी के. हिरोनो ने कहा कि पर्यावरण संबंधी जरूरतें जरूरी हैं और हम सिर्फ इसलिए उन चीजों को नहीं छोड़ सकते, क्योंकि हम जरूरी खनिजों का खनन करना चाहते हैं।
गौरतलब है कि भारत और दूसरे अमेरिकी साझेदारों के लिए, यह बहस इस बात पर जोर देती है कि वाशिंगटन को डिफेंस, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी सेक्टर्स में चीन के कंट्रोल वाली सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। बाइडेन और ट्रंप दोनों प्रशासन ने महत्वपूर्ण खनिजों को आर्थिक सुरक्षा और चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में रखा है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दो दिन के आधिकारिक दौरे पर जापान पहुंचे सीएम योगी, टोक्यो में जोरदार स्वागत
टोक्यो, 25 फरवरी (आईएएनएस)। सिंगापुर दौरे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को जापान पहुंचे, जहां टोक्यो में उनका भव्य स्वागत किया गया।
उपराज्यपाल जुनिची इशिदेरा और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने सीएम योगी का अभिनंदन किया। दो देशों की यात्रा के अंतर्गत यह यात्रा मुख्यमंत्री की जापान की पहली यात्रा है, जो भारत और जापान के बीच बढ़ते रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सीएम योगी का दो दिन का ये आधिकारिक दौरा है।
सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर जानकारी दी कि उगते सूरज की नवोन्मेषी भूमि को प्रभु श्री राम की पावन धरा के आदित्य का नमस्कार। एक और पोस्ट में सीएम ने कहा कि आज टोक्यो में मित्सुई एंड कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स बिजनेस यूनिट के प्रबंध अधिकारी और मुख्य परिचालन अधिकारी काज़ुकी शिमिज़ु और उनकी टीम के वरिष्ठ सदस्यों के साथ एक सार्थक और दूरदर्शी बैठक हुई।
उन्होंने आगे कहा कि हमने मित्सुई एंड कंपनी को उत्तर प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर क्षेत्रों में परिवर्तनकारी निवेश के लिए आमंत्रित किया, जो राज्य के तीव्र औद्योगिक विस्तार के अनुरूप हैं। उत्तर प्रदेश के विकास गलियारों को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति शृंखला एकीकरण के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और औद्योगिक निवेश में सहयोग पर भी चर्चा हुई।
सीएम योगी ने एक और एक्स पोस्ट में कहा कि आज टोक्यो में कोनोइके ट्रांसपोर्ट कंपनी लिमिटेड के वरिष्ठ प्रबंध कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी महाप्रबंधक, बिक्री प्रबंधन प्रभाग/घरेलू व्यवसाय प्रभारी शिगेकी तानाबे और उनकी टीम से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग और मल्टीमॉडल परिवहन अवसंरचना के माध्यम से कोनोइके की उपस्थिति बढ़ाने पर चर्चा की गई। कंपनी को समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर नेटवर्क और येइडा स्थित मेडिकल डिवाइसेस पार्क का लाभ उठाते हुए चिकित्सा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में अवसरों का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया गया, जिससे भारत-जापान औद्योगिक सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
--आईएएनएस
एसडी/एएस
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