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खिल उठेगी Oval फेस बहूरानी! मुंह दिखाई में दें 6 ट्रेडिशनल गोल्ड चांदबाली

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2020 Delhi Riots: दिल्ली दंगों के 6 साल पूरे, 53 लोगों की गई थी जान, सिर्फ एक को ठहराया गया हत्या का दोषी

2020 Delhi Riots: राजधानी दिल्ली में 2020 में हुए दंगे को 6 साल पूरे हो गए हैं. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी. बता दें कि कोरोना महामारी एक महीने पहले विवादास्पद नागरिकता कानून को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार, जाफराबाद, मौजपुर, चांद बाग, गोकुलपुरी, करावल नगर, भजनपुरा, खजूरी खास, करदम पुरी, भगीरथी विहार, कबीर नगर, अशोक नगर और मुस्तफाबाद में दंगा भड़क गया. लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई. जबकि कई इलाके तबाह हो गए. इन दंगों से संबंधित दर्ज 53 आपराधिक मामलों में से सिर्फ एक व्यक्ति को हत्या का दोषी ठहराया गया.

दिल्ली दंगों में दर्ज हुए थे कुल 53 आपराधिक मामला

बता दें कि दिल्ली में साल 2020 में CAA के विरोध के चलते 23 फरवरी से 26 फरवरी के बीच दंगा भड़क गया. साल 2025 तक 2025 तक, गैरकानूनी सभा, हथियारों से लैस दंगा, विस्फोटक पदार्थों से तोड़फोड़, चोरी और सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयानों सहित विभिन्न आरोपों के तहत कुल 53 आपराधिक मामले दर्ज किए गए. लेकिन इनमें सिर्फ 11 ही दोष सिद्ध हो पाए.

सबूतों के अभाव में छूट गए 75 आरोपी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 53 मामलों के विश्लेषण से पता चला है कि अब तक 40 से अधिक लोगों को दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि 100 से अधिक लोगों को बरी कर दिया गया है और 75 लोगों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया. दिल्ली दंगों के संबंध में कुल 758 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 53 आपराधिक मामले शामिल हैं. मामलों की सुनवाई के दौरान कई बार जज बदले गए. जिन्होंने जांच और सबूतों पर कड़ी टिप्पणियां की.

कई बार बदले जज

बता दें कि दिल्ली दंगों से जुड़े मुख्य केस कड़कड़डूमा कॉम्प्लेक्स के नॉर्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में ही चले थे. जिसमें कई जजों ने मामलों की सुनवाई की, इनमें विनोद यादव, वीरेंद्र भट्ट, पुलस्त्य प्रमाचला और मौजूदा न्यायाधीष परवीन सिंह का नाम शामिल है. उसी कॉम्प्लेक्स में एक और स्पेशल कोर्ट में हाई-प्रोफाइल मामले चलाए गए.  दिल्ली दंगों के मामले में स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद, शरजील इमाम, आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर आरोप लगे हैं.

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इन सभी पर एंटी-टेरर कानून यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए. इन मामलों की सुनवाई के दौरान भी बार-बार जजों का ट्रांसफर हुआ. यानी इस मामलों में कोर्ट में फिर से दलीलें दोहरानी पड़ीं और रिकॉर्ड को दोबारा से देखने पड़ा. यही वजह थी कि केस शुरू होने में काफी देरी हुई. बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में स्पेशल कोर्ट उन जांचों की आलोचना करते रहे हैं. जिनमें बरी होने के फैसले रिकॉर्ड किए गए. जजों ने कई बार कहा कि प्रॉसिक्यूशन ने नकली गवाह पेश किए या उन्होंने ऐसे सबूतों पर यकीन किया जो मनगढंत लग रहे थे.

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  Sports

Gautam Gambhir का Axar Patel पर बड़ा बयान, बोले- हम आंकड़े नहीं, Impact Player देखते हैं

अक्षर पटेल ने नेट सत्र के दौरान लगभग 30 मिनट तक अपनी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी को निखारा जिससे जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत के करो या मरो के मैच की एकादश में उनकी संभावित वापसी का संकेत मिलता है। अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में वाशिंगटन सुंदर को अक्षर पर तरजीह दी गई थी। क्रिकेट के नजरिए से यह कोई गलत विचार नहीं था क्योंकि टीम प्रबंधन पावर प्ले में दक्षिण अफ्रीका के बाएं हाथ के दो आक्रामक बल्लेबाजों क्विंटन डिकॉक और रेयान रिकेल्टन के खिलाफ वाशिंगटन की ऑफ स्पिन का इस्तेमाल करना चाहता था।

लेकिन भारत की यह रणनीति कामयाब नहीं हो पाई क्योंकि जसप्रीत बुमराह ने डिकॉक और रिकेल्टन को जल्दी आउट कर दिया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन रन की हार ने भारत के लिए बचे हुए दो सुपर आठ मैच को जीतना अनिवार्य बना दिया है और इसमें से पहला मैच बृहस्पतिवार को यहां जिम्बाब्वे के खिलाफ होगा। जिम्बाब्वे के भी शीर्ष क्रम में बाएं हाथ के दो बल्लेबाज सलामी बल्लेबाज ताडी मारुमानी और चौथे नंबर पर रेयान बर्ल हैं। तो क्या वाशिंगटन एकादश में अपनी जगह बरकरार रख पाएंगे या अक्षर की वापसी होगी।

रिंकू सिंह के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में वाशिंगटन को हटाए बिना अक्षर को खिलाया जा सकता है। भारत में पास हालांकि कुलदीप यादव को भी टीम में शामिल करने का विकल्प है। अक्षर सुपर आठ और उसके बाद के मुकाबलों के लिए चुने जाने के दावेदार हैं क्योंकि वह स्टंप्स को निशाना बनाने की अपनी काबिलियत के लिए जाने जाते हैं। उन्हें अब तक तीन मैच में 12.16 के औसत और 6.63 की इकोनॉमी से छह विकेट लिए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच के लिए चेपक की पिच लाल और काले रंग के मिश्रण वाली होने की उम्मीद है जिसमें काले रंग की मिट्टी अधिक होगी जो बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने की आजादी देगी। ऐसी स्थिति में अक्षर की अहमियत बढ़ जाती है।

यहां तक ​​कि मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी कहा था कि टीम का चयन पूरी तरह से आंकड़ों पर नहीं बल्कि खिलाड़ी की अहमियत पर आधारित होता है। उन्होंने कहा था, ‘‘हम औसत और आंकड़े नहीं देखते। हम देखते हैं कि उस स्थान पर कौन अधिक अच्छा कर सकता है। और अक्षर ने बहुत अच्छा किया है। लोग हमेशा इसके बारे में बात करते रहेंगे लेकिन मुझे लगता है कि हम भविष्य में भी इसी तरह आगे बढ़ना चाहते हैं।

Wed, 25 Feb 2026 10:44:38 +0530

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