अक्षर पटेल ने नेट सत्र के दौरान लगभग 30 मिनट तक अपनी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी को निखारा जिससे जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत के करो या मरो के मैच की एकादश में उनकी संभावित वापसी का संकेत मिलता है।
अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में वाशिंगटन सुंदर को अक्षर पर तरजीह दी गई थी।
क्रिकेट के नजरिए से यह कोई गलत विचार नहीं था क्योंकि टीम प्रबंधन पावर प्ले में दक्षिण अफ्रीका के बाएं हाथ के दो आक्रामक बल्लेबाजों क्विंटन डिकॉक और रेयान रिकेल्टन के खिलाफ वाशिंगटन की ऑफ स्पिन का इस्तेमाल करना चाहता था।
लेकिन भारत की यह रणनीति कामयाब नहीं हो पाई क्योंकि जसप्रीत बुमराह ने डिकॉक और रिकेल्टन को जल्दी आउट कर दिया।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन रन की हार ने भारत के लिए बचे हुए दो सुपर आठ मैच को जीतना अनिवार्य बना दिया है और इसमें से पहला मैच बृहस्पतिवार को यहां जिम्बाब्वे के खिलाफ होगा।
जिम्बाब्वे के भी शीर्ष क्रम में बाएं हाथ के दो बल्लेबाज सलामी बल्लेबाज ताडी मारुमानी और चौथे नंबर पर रेयान बर्ल हैं।
तो क्या वाशिंगटन एकादश में अपनी जगह बरकरार रख पाएंगे या अक्षर की वापसी होगी।
रिंकू सिंह के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में वाशिंगटन को हटाए बिना अक्षर को खिलाया जा सकता है। भारत में पास हालांकि कुलदीप यादव को भी टीम में शामिल करने का विकल्प है।
अक्षर सुपर आठ और उसके बाद के मुकाबलों के लिए चुने जाने के दावेदार हैं क्योंकि वह स्टंप्स को निशाना बनाने की अपनी काबिलियत के लिए जाने जाते हैं।
उन्हें अब तक तीन मैच में 12.16 के औसत और 6.63 की इकोनॉमी से छह विकेट लिए हैं।
जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच के लिए चेपक की पिच लाल और काले रंग के मिश्रण वाली होने की उम्मीद है जिसमें काले रंग की मिट्टी अधिक होगी जो बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने की आजादी देगी। ऐसी स्थिति में अक्षर की अहमियत बढ़ जाती है।
यहां तक कि मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी कहा था कि टीम का चयन पूरी तरह से आंकड़ों पर नहीं बल्कि खिलाड़ी की अहमियत पर आधारित होता है।
उन्होंने कहा था, ‘‘हम औसत और आंकड़े नहीं देखते। हम देखते हैं कि उस स्थान पर कौन अधिक अच्छा कर सकता है। और अक्षर ने बहुत अच्छा किया है। लोग हमेशा इसके बारे में बात करते रहेंगे लेकिन मुझे लगता है कि हम भविष्य में भी इसी तरह आगे बढ़ना चाहते हैं।
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आज यानी की 25 फरवरी को अभिनेता शाहिद कपूर अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। अभिनेता के पेरेंट्स फिल्मों में काम करते हैं। लेकिन इसके बाद भी शाहिद को इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने के लिए काफी स्ट्रगल करना पड़ा। अपने करियर की शुरूआत में शाहिद को दोस्तों से कपड़े उधार लेने पड़ते थे। तब वह ऑडिशन के लिए जाते थे। लेकिन अब शाहिद कपूर की गिनती इंडस्ट्री के सफल अभिनेताओं में होती है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर अभिनेता शाहिद कपूर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
दिल्ली में 25 फरवरी 1981 को शाहिद कपूर का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम पंकज कपूर है, जोकि अभिनेता हैं और मां का नाम नीलिमा अजीम है। शाहिद कपूर ने कई फिल्मों में काम किया है। लेकिन उनकी सफलता की कहानी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर खुद को सफल अभिनेताओं के रूप में स्थापित किया।
बैक डांसर
शाहिद कपूर ने महज 15 साल की उम्र में डांस में रुचि महसूस की और शामक डावर के संस्थान में एडमिशन लिया। यहां पर शाहिद ने न सिर्फ डांस सीखा बल्कि अपने अभिनय करियर की ओर भी कदम बढ़ाया। यहीं से शाहिद का सफर फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर के रूप में शुरू हुआ। शाहिद ने फिल्म 'दिल तो पागल है' और 'ताल' आदि में बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया। इसके अलावा वह शुरूआती दिनों में स्टेज शो भी परफॉर्म किया, जिससे उनका कॉन्फिडेंस बढ़ा।
टीवी विज्ञापनों में किया काम
अभिनेता ने बॉलीवुड में नाम कमाने से पहले टीवी विज्ञापनों में काम करके अपनी पहचान बनाई। शाहिद कपूर कई ब्रांड्स के विज्ञापनों में नजर आए और कई म्यूजिक वीडियो में अभिनय किया। शाहिद कपूर ने कुमार सानू के म्यूजिक वीडियो 'आंखों में' में काम किया। यह अभिनेता के करियर में एक अहम मोड़ साबित हुआ। यहां से निर्माता रमेश तौरानी ने शाहिद को फिल्म में काम करने का ऑफर दिया।
असिस्टेंट डायरेक्टर
शाहिद कपूर फिल्मों में आने से पहले अपने पिता के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम करते थे। उन्होंने साल 1998 में 'मोहनदास' नाम के टेलीविजन शो में अपने पिता पंकज कपूर के असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया। यह एक्सपीरियंस उनके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ। क्योंकि इससे उन्होंने फिल्म निर्माण की दुनिया को करीब से समझा।
इस फिल्म से मिली पहचान
अभिनेता शाहिद कपूर ने साल 2003 में फिल्म 'इश्क विश्क' से डेब्यू किया था। यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी, जिसमें शाहिद ने कॉलेज स्टूडेंट का रोल किया था। यह फिल्म स्लीपर हिट साबित हुई। इस फिल्म के लिए शाहिद को सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। वहीं इस फिल्म के साथ ही शाहिद कपूर ने दर्शकों के दिलों में भी अपनी जगह बना ली थी।
हर रोल में जमाया रंग
शाहिद कपूर के एक्टिंग करियर में कई तरह के मोड़ आए। अभिनेता ने फिल्मों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं और दर्शकों को अपनी प्रतिभा का सबूत दिया। किसी फिल्म में अभिनेता ने शर्मीले और आदर्शवादी युवक का रोल निभाया। तो किसी फिल्म में गुस्सैल प्रेमी बनकर फैंस के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है।
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