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शाइनी आहूजा रेप केस:मेड ने बयान बदला, कहा- रेप नहीं हुआ, 7 साल की सजा हुई; ₹15 लाख की हुई मांग

बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के शाइनी आहूजा रेप केस के पार्ट-1 में अब तक आपने पढ़ा कि कैसे शाइनी पर उनकी मेड ने रेप के आरोप लगाए, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। शाइनी आहूजा ने पुलिस कस्टडी में माना कि उन्होंने मेड के साथ शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन ये मेड की रजामंदी से हुआ था। रेप की बात उन्हें फंसाने के लिए की गई थी। केस में नया मोड़ तब आया, जब शाइनी ने कहा कि मेड उनसे प्यार करती थी। अब पार्ट-2 में जानिए आगे की कहानी- पड़ोसी का दावा- नहीं सुनी चीखों की आवाज केस चर्चा में था तभी एक अखबार में दावा किया गया कि शाइनी के खिलाफ पुलिस को कई सबूत मिले हैं। दावा था कि शाइनी की पड़ोसी ने उस रोज मेड की चीखों की आवाजें सुनी थीं। इन दावों के बीच शाइनी आहूजा की पत्नी अनुपम आहूजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि उनके पति निर्दोष हैं, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनुपम के साथ उनकी वो पड़ोसी भी शामिल थीं, जिनके नाम से चीखें सुने जाने का दावा किया गया। उन्होंने मीडिया के सामने साफ कहा कि पुलिस ने उनका स्टेटमेंट नहीं लिया है और न ही उन्होंने किसी से इस तरह का कुछ कहा है। शाइनी बोले- मेड मुझसे प्यार करती थी इस दौरान पुलिस कस्टडी में शाइनी आहूजा ने कहा कि उनकी मेड उन्हें फंसाने की कोशिश कर रही है। उनके बीच शारीरिक संबंध मर्जी से बने। घटना से एक रोज पहले ही मेड उन्हें बार-बार कॉल कर रही थी, क्योंकि वो उनसे प्यार करने का दावा करती थी। लेकिन संबंध बनाने के बाद वो ब्लैकमेल करने लगी और फिर बाद में झूठी शिकायत दर्ज करवाई। दूसरी मेड ने दिया शाइनी के पक्ष में बयान शाइनी आहूजा के घर शिकायतकर्ता के अलावा एक और मेड काम करती थीं, जिनका नाम था संगीता। पुलिस ने उनका स्टेटमेंट भी लिया। उनके बयान के अनुसार, वो दोपहर करीब 1 बजे ही चर्च के लिए निकली थीं। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि शाइनी एक अच्छे इंसान हैं। अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम के साथ जेल में रहे शाइनी आहूजा गिरफ्तारी के बाद शाइनी आहूजा को अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम के साथ सेल में रखा गया था। वो जेल में वर्कआउट करते और साथी कैदियों के साथ अच्छा व्यवहार रखते थे। शाइनी और अबू सलेम का एक ही सेल में रहना काफी अटपटा था, क्योंकि जेल जाने से कुछ समय पहले ही शाइनी आहूजा ने फिल्म गैंगस्टर में काम किया था, जो डॉन अबू सलेम पर ही आधारित थी। जेल के सूत्रों के अनुसार, अबू सलेम को फिल्म गैंगस्टर पसंद आई थी, ऐसे में उनका एक्टर के लिए सॉफ्ट कॉर्नर था। जून में हुई गिरफ्तारी अक्टूबर में मिली बेल कई बार जमानत याचिका खारिज होने के बाद शाइनी आहूजा को 1 अक्टूबर 2009 को बॉम्बे हाईकोर्ट से बेल मिली। उनके वकील ने कोर्ट में तर्क दिया- वकील बोले- अगर पीड़िता ने चीखा तो पुलिस ने पड़ोसियों का बयान क्यों नहीं लिया सुनवाई के दौरान शाइनी के वकील ने ये भी कहा कि शिकायतकर्ता ने कहा था कि रेप होने के समय वो काफी चीख रही थीं। बिल्डिंग की हर मंजिल पर चार फ्लैट हैं। इसलिए जांच अधिकारी का यह फर्ज था कि वह आसपास के फ्लैट में रहने वाले लोगों से पूछताछ करते और उनके बयान दर्ज करते। शाइनी के बेडरूम की एक दीवार पड़ोसी के फ्लैट से जुड़ी हुई है। अगर पुलिस ने पड़ोसियों के बयान लिए होते, तो पता चल सकता था कि पीड़िता सच में चिल्लाई थी या नहीं। साथ ही वकील ने कहा कि पुलिस ने जांच सही और निष्पक्ष तरीके से नहीं की। वकील ने ये भी कहा कि सबसे पहले तो यह साबित ही नहीं होता कि शारीरिक संबंध बने थे। और अगर बने भी हों, तो यह भी संभव है कि वह पीड़िता की सहमति से बने हों। वकील ने यह भी कहा कि आरोपी कोर्ट द्वारा लगाई जाने वाली हर शर्त को मानने के लिए तैयार है। सेशंस जज ने पहले ही यह माना है कि आरोपी के भागने की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि वो एक एक्टर हैं और उनका घर भी मुंबई में ही है। फिर भी सेशंस जज ने जमानत इसलिए नहीं दी, क्योंकि उन्हें लगा कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। आरोपी की तरफ से कहा गया कि वह दिल्ली में अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए तैयार है, जिससे सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो जाएगी। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि मेडकिल रिपोर्ट में साफ है कि पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए गए हैं। साथ ही उनके शरीर पर चोट के निशान मिले हैं, जिससे साफ है कि संबंध उनकी मर्जी से नहीं बनाए गए। इस पर शाइनी के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता एक मेड हैं। रोज के काम करते हुए शरीर पर कई चोट लगती हैं, इन्हें रेप से नहीं जोड़ा जा सकता। कोर्ट ने कई शर्तों पर दी शाइनी आहूजा को जमानत दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने एक्टर को 50 हजार रुपए निजी मुचलके पर जमानत दी। साथ ही शर्त रखी गई- सुनवाई के दौरान बयान से पलटी मेड साल 2009 के आखिर में इस केस की सुनवाई शुरू हुई। शाइनी सुनवाई के लिए दिल्ली से ही अप-डाउन करते थे। 27 सितंबर 2010 को इस केस की सुनवाई अहम साबित हुई। शाइनी पर रेप का आरोप लगाने वाली मेड ने अपना बयान बदल दिया। मेड के बयान के अनुसार, शाइनी ने उनका रेप नहीं किया। उन्होंने साथ काम करने वाली रेखा माने के दबाव में आकर शाइनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। बता दें कि वो रेखा माने ही थीं, जिन्होंने शिकायतकर्ता को शाइनी के घर में काम दिलवाया था। कोर्ट में मेड के बयान बदलते ही जज ने उन्हें चेतावनी दी कि झूठी शिकायत दर्ज करवाने और कोर्ट का समय बर्बाद करने पर उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है। केस कवर करने वाले सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट कहते हैं, ‘जब कोई घटना सत्य नहीं होती, तो व्यक्ति अपने पहले दिन दिए गए बयान को याद ही नहीं रख सकता। फिर वो बार-बार अपनी बात बदलता है। लेकिन अगर कोई घटना सच में घटी होती है, तो वो इंसान के जहन में हमेशा साफ रहती है। इस केस में भी मेरे हिसाब से यही हुआ है। मुझे इस पूरे मामले में सच्चाई का भारी अभाव दिखाई देता है।’ ‘मैं साफ कहना चाहता हूं कि मैं आज तक न तो शाइनी आहूजा से मिला हूं, न उनकी पत्नी से, न किसी एजेंट या वकील से। लेकिन मुझे अपने इनफॉर्मर्स और सोर्सेस पर गहरा भरोसा है। जो जानकारी वो मेरे पास लेकर आते हैं, वो हमेशा सत्य के बेहद करीब रही है। इस केस में मुझे सच्चाई का बहुत बड़ा अभाव दिखाई देता है। और अगर यह बाई गैंग का केस नहीं है, तो फिर यह कोई दूसरा केस हो ही नहीं सकता।’ 30 मार्च 2011 को कोर्ट ने शाइनी आहूजा को दोषी माना शाइनी आहूजा रेप केस का फैसला 30 मार्च 2011 को आया। मुंबई सेशन्स कोर्ट ने मेड के पलटने के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट, मेड के मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान के आधार पर शाइनी आहूजा को आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषी करार दिया। 98 पन्नों के जजमेंट में कोर्ट ने 109 पन्नों की चार्जशीट, 12 गवाहों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर 1 अप्रैल 2011 को कोर्ट ने एक्टर को 7 साल के कारावास की सजा सुनाई और 3 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। शाइनी आहूजा के सपोर्ट में उतरे एक्टर कोर्ट का फैसला आने के बाद देशभर में इसका विरोध किया गया। एक्टर अरशद वारसी ने कोर्ट का फैसला आने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा, "हत्यारे, आतंकवादी और भ्रष्ट नेता खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन शाइनी आहूजा को सात साल की सजा मिल गई... न्यायपालिका को कलाकारों को इस तरह साफ-साफ निशाना बनाना बंद करना चाहिए।" कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक्टर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की याचिका सेशन्स कोर्ट के फैसले के विरुद्ध एक्टर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जस्टिस अभय थिप्से की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान एक्टर के वकील मनोज मोहिटे और मुंदर्गी ने कहा कि ट्रायल के दौरान कथित पीड़िता ने कोर्ट में अपने बलात्कार के आरोप वापस ले लिए थे और उन्हें नकार दिया था। इसके बावजूद, अभियोजन पक्ष ने डीएनए और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर भरोसा किया, जिनमें कई खामियां थीं। अपील में यह भी कहा गया कि पुलिस ने मेड के फोन कॉल रिकॉर्ड (CDR) तक नहीं निकाले, जिससे यह साबित हो सकता था कि आरोप गलत थे। साथ ही, पुलिस ने उन CCTV फुटेज का भी इस्तेमाल नहीं किया, जो शाइनी के पक्ष में थे। शाइनी का कहना है कि जांच अधिकारी ने खुद माना कि उसे कॉल रिकॉर्ड या CCTV फुटेज की जांच करना जरूरी नहीं लगा, जिससे जांच में पक्षपात साफ दिखाई देता है। अपील में यह भी कहा गया कि डीएनए टेस्ट के लिए लिए गए सैंपल की सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। एक गवाह ने बताया कि सैंपल को सील करने या देने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। यहां तक कि एक सैंपल की रिपोर्ट, जिसमें डीएनए नहीं मिला था, वह गायब हो गई। सुनवाई के दौरान शाइनी की पत्नी कोर्ट में मौजूद थीं, लेकिन शाइनी खुद कोर्ट में नहीं आए, क्योंकि उनकी मौजूदगी जरूरी नहीं थी। सेशन्स कोर्ट ने एक्टर को 7 साल की सजा सुनाई, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट में केस आने के बाद उन्हें बेल मिल गई। अंतिम चरण में शाइनी आहूजा का केस ये केस आज भी कोर्ट में है। शाइनी आहूजा के वकील किरण सिंह राजपूत ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- अब यह मामला अंतिम सुनवाई के लिए लगा हुआ है। अपील करने वाले व्यक्ति को मामले की स्थिति देखते हुए जमानत मिल चुकी है। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनका पासपोर्ट नवीनीकरण करने की अनुमति भी दी। आम तौर पर कानून के अनुसार, अगर किसी पर गंभीर मामला चल रहा हो या सजा हो चुकी हो, तो पासपोर्ट सिर्फ एक साल के लिए दिया जाता है। लेकिन हाई कोर्ट ने उन्हें एक साल की जगह पूरे 10 साल के लिए पासपोर्ट नवीनीकरण की अनुमति दी। अभी यह मामला जस्टिस आर. एम. जोशी के सामने अंतिम सुनवाई के लिए लगा हुआ है। सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल कहते हैं, ‘बात को तोड़-मरोड़ कर अटेम्प्ट टू रेप का रूप दिया गया और वसूली की कोशिश की गई। जब शाइनी द्वारा पैसे देने से इनकार किया गया, तो केस दर्ज हुआ, गिरफ्तारी हुई और अंडर द टेबल 15 लाख रुपये लेकर जमानत दिलाने की बात सामने आई। जब यह रकम नहीं दी गई, तो शाइनी को पुलिस और न्यायिक हिरासत में समय बिताना पड़ा। कुल मिलाकर, पुलिस ने पूरा केस लड़की के बयान के आधार पर बनाया, लेकिन फॉरेंसिक जांच या किसी गवाह से ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया, जिसके आधार पर शाइनी आहूजा को सजा दिलाई जा सके।’ 'मीडिया ट्रायल पर विवेक अग्रवाल कहते हैं, सोचिए, एक व्यक्ति जिसने कुछ गलत नहीं किया, उसे ड्रैकुला, नरपिशाच, नरभक्षी जैसे शब्दों से नवाजा गया। हमारे अखबार फिर भी काफी हद तक संयम बरतते हैं, लेकिन मुझे बहुत अफसोस है कि हमारा ब्रॉडकास्ट मीडिया जब किसी के खिलाफ बोलना शुरू करता है, तो वह भाषा इंसानियत के किसी भी पैमाने पर सही नहीं होती। जिस तरह के विशेषण दिए जाते हैं और जिस नफरत के साथ मीडिया ट्रायल चलाया जाता है, वह बेहद शर्मनाक है। एक इंसान की पूरी जिंदगी, उसकी मेहनत, उसकी तपस्या बर्बाद करने के बाद मीडिया दूसरी खबरों का जश्न मनाने लगती है। मुझे इसका बहुत अफसोस होता है।' शाइनी आहूजा ने वेलकम बैक से किया कमबैक, फिर छोड़ी इंडस्ट्री रेप के आरोप लगने के बाद शाइनी आहूजा को फिल्मों में काम मिलना लगभग बंद हो गया। 5 साल के लंबे ब्रेक के बाद उन्होंने फिल्म वेलकम बैक से कमबैक किया, लेकिन ये फिल्म खास नहीं चली। इसके बाद एक्टर अपने परिवार के साथ फिलिपिंस शिफ्ट हो गए। वो वहां कपड़ो का बिजनेस करते हैं। जब विवेक अग्रवाल से पूछा गया कि आप शाइनी आहूजा को किसका सबसे बड़ा शिकार मानते हैं? तो जवाब में उन्होंने कहा, ‘मेरे हिसाब से शाइनी आहूजा बाई गैंग से ज्यादा मीडिया ट्रायल के शिकार हैं। पुलिस की अपथिकता, शरारतों और बदमाशियों से ज्यादा उन्हें मीडिया ने नुकसान पहुंचाया। ऐसे दर्जनों लोग हैं जिन्हें मैं जानता हूं, जो आज भी मीडिया ट्रायल के शिकार हैं। लेकिन आप किसे समझाएंगे? जब अखबार, चैनल और डिजिटल मीडिया कॉरपोरेट हाउसेज और एकतरफा बिजनेस हितों के हाथ में चले गए हैं, तब से हालात बिगड़ते चले गए हैं।’ विवेक अग्रवाल आगे कहते हैं, ‘जो लोग सेल्फ-मेड होते हैं, उनके साथ यह समस्या सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में नहीं, हर जगह होती है। चाहे बिजनेस हो, जर्नलिज्म हो या ऑफिस पॉलिटिक्स जहां सत्ता, पैसा और कॉन्टैक्ट्स होते हैं, वही सब कुछ तय करते हैं। जिसके पास ताकत है, वही बच जाता है। और जिसके पास नहीं है, वही कुचला जाता है। शाइनी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।’ शाइनी पर बनी फिल्म सेक्शन 375, रिसर्च के लिए राइटर 176 सुनवाई में बैठे शाइनी आहूजा की गिरफ्तारी से ठीक पहले राइटर मनीष गुप्ता उनके साथ सीरियल किलर चार्ल्स शोभराज पर बनी फिल्म में काम कर रहे थे। हालांकि गिरफ्तारी के बाद वो फिल्म बंद पड़ गई। जब केस अपने अंतिम नतीजे के करीब पहुंचा तो उन्हीं मनीष गुप्ता ने शाइनी आहूजा केस पर फिल्म लिखी सेक्शन 375। इस फिल्म को बनाने में आईं चुनौतियों पर मनीष गुप्ता कहते हैं, ‘काफी सेंसिटिव सब्जेक्ट होने की वजह से मुझे फिल्म लिखने में करीब 3 साल लगे। मैं बिल्कुल गहराई तक गया करीब 176 हियरिंग्स में बैठा, कई रेप सर्वाइवर्स, विक्टिम्स और उनके परिजनों से बात की। वकीलों से भी कई जानकारियां इकट्ठा कीं।’ ‘आप हैरान होंगे यह जानकर कि भारत में 80 प्रतिशत से ज्यादा केस इस सेक्शन के तहत झूठे साबित हुए हैं। किसी ने पैसों के लिए, तो किसी ने किसी आदमी से पीछा छुड़ाने के लिए इस कानून का गलत इस्तेमाल किया है। और इसका नुकसान उन्हें भुगतना पड़ता है जिनके साथ सच में रेप हुआ है, क्योंकि फिर उनके केस को गंभीरता से नहीं लिया जाता।’ ‘मेरी फिल्म सेक्शन 375 में, रिलीज के बाद कानूनी जटिलताएं न हों इसलिए मैंने रियल कैरेक्टर्स में कुछ बदलाव किए जैसे शाइनी को एक्टर नहीं दिखाकर डायरेक्टर दिखाया, और नौकरानी की जगह असिस्टेंट कॉस्ट्यूम डिजाइनर दिखाया है।’ जेल से लौटने के बाद शाइनी की हुई थी मनीष गुप्ता से बात शाइनी से हुई आखिरी बातचीत पर मनीष गुप्ता कहते हैं, ‘शाइनी के अरेस्ट होने और फिर जेल से बाहर आने के बाद उनका एक बार मुझे कॉल आया था। कॉल पर उन्होंने मुझे थैंक्यू कहा कि मैंने उस मुश्किल घड़ी में उनका साथ दिया। अब वो फिलीपींस में जाकर बस गए हैं। उनका परिवार भी वहीं उनके साथ है। इस केस के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह सोसाइटी से अलग कर लिया था।’ ‘शाइनी के अरेस्ट होते ही उन पर एक ठप्पा लग गया था, जैसे सच में उन्होंने क्राइम किया हो। वैसे जब मैं फिल्म के लिए रिसर्च कर रहा था, तब मैंने नौकरानी द्वारा दिए गए स्टेटमेंट्स भी पढ़े इतनी डिटेल में लिखी गई चीजें थीं कि पढ़कर मैं भी सोच में पड़ गया। लेकिन आज तक किसी को मालूम नहीं है कि कौन सही है और कौन गलत।’ ‘शाइनी के जेल से निकलने के बाद फाइनेंसर ने हाथ खींच लिए, प्रोड्यूसर्स ने भी फिल्म में पैसा लगाने से मना कर दिया यह सोचकर कि शायद दर्शक अब शाइनी को एक्सेप्ट नहीं करेंगे। उस दौरान सोशल मीडिया पर शाइनी को लेकर कई तरह के मीम्स बन रहे थे “देखो, नौकरानी से रेप किया” जैसी बातें चल रही थीं। कोर्ट का जजमेंट आने से पहले ही लोगों ने शाइनी को अपराधी मान लिया था, जो कि बिल्कुल गलत है।’ ……………………………………………………… पार्ट-1, शाइनी आहूजा रेप केस:मेड बोली- कमरे में बंद किया; सीमन सैंपल हुए मैच, एक्टर बोले- संबंध रजामंदी से बने 14 जून 2009 शाम का समय था। एक लड़की रोती-बिलखती हालत में ओशिवारा पुलिस स्टेशन में दाखिल हुई। उसके साथ कुछ और लोग भी थे। लड़की को पुलिस स्टेशन में बैठाया गया। साथ मौजूद लोगों ने जोर देकर बोला- इसका रेप हुआ है। लड़की लगातार रोए जा रही थी। पुलिस ने पूछा किसने किया, जवाब मिला- शाइनी आहूजा, बॉलीवुड एक्टर। वहां मौजूद हर शख्स हैरान था। मामला हाई प्रोफाइल था, तो पुलिस ने भी बिना देरी किए शिकायत लिखना शुरू किया। आसपास के लोगों ने लड़की का हौसला बढ़ाया और फिर उसने स्टेटमेंट देना शुरू किया- मेरा नाम माधुरी जोशी है, मैं 20 साल की हूं। शाइनी आहूजा के घर में मई से काम करती हूं। मैं सुबह 9 बजे काम पर जाती हूं और शाम के 6 बजे तक वहीं रहती हूं। आगे पढ़िए… (नोट- ये खबर शाइनी आहूजा के वकील, उनके साथ काम कर चुके राइटर मनीष गुप्ता और केस को कवर करने वाले मशहूर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल के बयान के आधार पर क्रिएटिव लिबर्टी के साथ लिखी गई है।) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय …………………………………………………….. अगले मंगलवार-बुधवार, 3-4 मार्च को बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-7 में पढ़िए कहानी मोनिका बेदी अंडरवर्ल्ड केस की। और जानिए कैसे एक्ट्रेस को धमकियों की बदौलत फिल्मों में काम मिला और फिर एक फर्जी पासपोर्ट से एक्ट्रेस को हुई सजा। इवेंट मैनेजर समझकर डॉन से बात करती रहीं मोनिका बेदीः फर्जी पासपोर्ट के सहारे दुनिया घूमी, पुर्तगाल की जेल में डॉन को लिए लव-लेटर जानम समझा करो, जोड़ी नं.1 और प्यार इश्क और मोहब्बत जैसी फिल्मों में नजर आईं एक्ट्रेस मोनिका बेदी को 2001 के बाद से ही फिल्मों में काम मिलना लगभग बंद हो गया। मोनिका जद्दोजहद में थीं कि किसी तरह उनका करियर पटरी पर आ जाए कि तभी एक परिचित ने उनके सामने दुबई के नामी बिजनेसमैन का नाम लिया। उस शख्स का नाम बताया गया अरसलान, जो कथित तौर पर दुबई में रहता था और उसकी बॉलीवुड में मजबूत पकड़ थी। मोनिका ने उसे कॉल किया और मदद मांगी। शुरुआत में दोनों की कोई मुलाकात नहीं हुई। अचानक मोनिका को बिना कोई ऑडिशन 8-9 फिल्मों में काम मिल गया। और फिर फिल्मी गलियारों में खबर फैली कि मोनिका का अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन है। जिस अरसलान से मोनिका इतने महीनों से बात कर रही थीं, असल में वो दुबई का कोई इवेंट मैनेजर नहीं, बल्कि भारत का मोस्ट वॉन्डेट अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम था। पूरी कहानी पढ़िए अगले हफ्ते, बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-7 में। ………………………………………………………… भास्कर की नई सीरीज बॉलीवुड क्राइम फाइल्स की ये कहानियां भी पढ़िए- पार्ट-1, बालिका वधु एक्ट्रेस प्रत्युषा बोलीं- मैं बिकने नहीं आई:आखिरी कॉल में मां-बाप को गालियां दीं, फिर फंदे पर लटकी मिलीं 1 अप्रैल 2016, दोपहर करीब 12 बजे… प्रत्युषा बनर्जी, बॉयफ्रेंड एक्टर-प्रोड्यूसर राहुल राज के साथ मुंबई के गोरेगांव की हार्मनी बिल्डिंग की सातवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 703 में रहती थीं। दोपहर में राहुल अपने काम से लोखंडवाला गए थे। कुछ देर बाद ही उन्होंने प्रत्युषा को कॉल किया तो वो जोर-जोर से रो रही थीं। थोड़ी कहासुनी होने के बाद प्रत्युषा ने कहा- वोह, राहुल राज, इगो अपने पास रखो, क्योंकि कुछ ही घंटों में, शायद मिनटों में, किसी को इगो दिखाने के लिए नहीं बचेगा। राहुल ने जवाब दिया- देखो, मैं तुमसे बस इतना बोल रहा हूं, खाली सुनो। प्रत्युषा ने बात काटते हुए कहा- मैं तुमसे इतना बोल रही हूं…. मैंने तुमसे बहुत प्यार किया है। पूरी कहानी पढ़िए… पार्ट-2, मौत से पहले प्रत्युषा बनर्जी ने करवाया अबॉर्शन:बॉयफ्रेंड की एक्स ने की थी मारपीट, पोस्टमॉर्टम में शरीर में मिली 100ml शराब प्रत्युषा बनर्जी के दोस्तों ने जिस सलोनी शर्मा पर उनसे मारपीट के आरोप लगाए थे, उन्होंने पुलिस बयान में कबूला कि उन्होंने एक्ट्रेस को थप्पड़ मारा था, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि वो और राहुल राज एक समय में रिलेशनशिप में थे, लेकिन प्रत्युषा की वजह से राहुल ने उन्हें छोड़ दिया। पूरी कहानी पढ़िए ………………………………………………………………………. पार्ट-1, एक्ट्रेस के घर से लापता हुए कास्टिंग डायरेक्टर ग्रोवर: एक कॉल से पुलिस ने सुलझाई गुत्थी, कातिलों ने लाश के सामने बनाए शारीरिक संबंध मई 2008 की बात है उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, ‘जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी?’ जिग्ना जो बड़े-बड़े केस की रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया- ‘सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।’ पूरी खबर पढ़िए… पार्ट-2, लाश के सामने एक्ट्रेस ने बनाए शारीरिक संबंध: मॉल से खरीदी चाकू, लाश के टुकड़े थैलियों में भरकर जंगल में जलाए, जानिए कैसे हुए हत्याकांड का खुलासा मारिया की बिल्डिंग के गार्ड ने पूछताछ में बताया कि मारिया 7 मई 2008 की शाम कुछ भारी बैग्स ले जाती दिखी थीं, उस समय उनके बॉयफ्रेंड जेरोम मैथ्यू भी साथ थे, जबकि पूछताछ में जेरोम ने कहा था कि वो मारिया की बिल्डिंग गए ही नहीं थे। विवेक की गुमशुदगी के करीब 2 हफ्ते बाद सख्ती करने पर मारिया ने कहा कि विवेक की हत्या हो चुकी है। जेरोम ने विवेक का कत्ल किया, फिर उन्होंने लाश के सामने एक्ट्रेस का रेप किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर लाश के टुकड़े किए और उन्हें ठिकाने लगाया। पूरी कहानी पढ़िए… ……………………………………………………………. पार्ट-1, फार्महाउस गया एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता: एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी बम ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। पूरी खबर पढ़िए... पार्ट-2, जमीन खोदकर निकाले गए एक्ट्रेस के परिवार के 6 कंकाल: एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, कातिल तसल्ली होने तक सिर कुचलता रहा लैला खान छुट्टी मनाने फार्महाउस गईं और अचानक लापता हो गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ लैला ही नहीं, उनके परिवार के 6 और लोग लापता 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मासूम शर्मा ने 'म्यूजिक' में पूरी की दूसरी मास्टर डिग्री:रोहतक के कॉलेज से ग्रेजुएशन, अमृतसर के खालसा कॉलेज से MA की; बोले-अचीवमेंट फैंस को समर्पित

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच विवाद के बीच अपनी दूसरी मास्टर डिग्री पूरी कर ली है। सोशल मीडिया अकाउंट पर उन्होंने दीक्षांत समारोह में डिग्री के साथ कई फोटोज भी शेयर किए हैं। मासूम शर्मा ने अमतृसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक सब्जेक्ट में MA की है। करीब डेढ़ साल पहले ही उन्होंने अपनी मास्टरर्स पूरी कर ली थी, मगर सोमवार को हुए दीक्षांत समारोह में उन्हें ये डिग्री मिली। मासूम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा- गायकी मेरा इश्क है, पढ़ाई मेरी ताकत। दो मास्टर डिग्री पूरी करने की अचीवमेंट अपने हर एक फैन को समर्पित करता हूं। अब पढ़िए…मासूम का स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक का सफर गांव के स्कूल से की दसवीं की पढ़ाई मासूम शर्मा का जन्म जींद के गांव ब्राह्मणवास गांव में 27 मार्च 1991 को हुआ था। मासूम ने दसवीं तक की पढ़ाई हिंदू स्कूल जुलाना से पूरी की। इसके बाद उन्होंने 12वीं की पढ़ाई एसडी स्कूल किला जफरगढ़ से की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए रोहतक का रुख किया। पंडित लख्मीचंद कॉलेज रोहतक से फिल्म एंड एक्टिंग में उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। मास कम्युनिकेशन में पहली डिग्री की ग्रेजुएशन के बाद मासूम शर्मा ने 2019 में मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया प्रोडक्शन में एमए की पढ़ाई पूरी की। यह डिग्री भी उन्होंने पंडित लख्मीचंद यूनिवर्सिटी रोहतक से ही हासिल की। 2019 में ही पंडित लख्मीचंद कॉलेज में मास्टर डिग्री का पहला बैच शुरू हुआ था। मासूम इसी बैच के स्टूडेंट थे। दूसरी मास्टर डिग्री, म्यूजिक में विशेषज्ञता मासूम शर्मा ने अपनी दूसरी मास्टर डिग्री वर्ष 2024 में म्यूजिक विषय में पूरी की थी। वहीं, ग्रेजुएशन में 2011 में एडमिशन लिया था, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रोसेस के कारण यह सात साल में पूरी हुई और वर्ष 2017 में उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। हालांकि यह डिग्री 2014 में ही पूरी होनी थी। बड़ा बेटा फर्स्ट क्लॉस में पढ़ाई कर रहा मासूम शर्मा के के दो बेटे और एक बेटी है। जिनमें से एक एलकेजी और दूसरा बच्चा फर्स्ट क्लास में पढ़ाई करता है। जबकि छोटा बेटा अभी तीन साल का है। अब पढ़िए मासूम शर्मा का ‘सरपंच’ विवाद 18 फरवरी को जींद में मासूम शर्मा के बहनोई धर्मवीर आर्य की 25वीं सालगिराह के दौरान हुए कार्यक्रम में सरपंच विवाद हुआ था। मासूम शर्मा ने लाइव शो के दौरान स्टेज पर पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा को देखकर भड़क गए थे। मासूम ने यहां तक कह दिया था कि मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। इसके बाद विवाद बढ़ा तो पूर्व सरपंच ने उन्हें सरपंच का चुनाव तक लड़ने की चुनौती दे डाली। इसके बाद मासूम के बड़े भाई विकास शर्मा ने मुआना गांव में पूर्व सरपंच के सामने बैठकर मामले में मासूम की गलती स्वीकार की थी, लेकिन विवाद फिर भी नहीं रुका। हालांकि मासूम ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अपने शब्द वापस लेने की बात कही थी, लेकिन उसके साथ कहा था कि एक व्यक्ति के कहने पर पंचायत नहीं होती है। -------------- सरपंच विवाद की ये खबरें भी पढ़िए… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा की मुश्किलें बढ़ीं: दोस्त मुकेश जाजी ने गलती मानी, सरपंचों ने किया बहिष्कार; प्रदेश प्रभारी बोले- मौत के कार्यक्रम में भी नचा लो पूर्व सरपंच बोले-पैसे देकर मासूम शर्मा को कहीं नचवा लो:पंच चुनाव जीतकर दिखाए, जींद में महापंचायत की तैयारी; सिंगर ने स्टेज से उतारा था फतेहाबाद में सरपंचों की मासूम शर्मा को चेतावनी:माफी मांगने की मांग; बोले- वरना कोई भी इवेंट्स नहीं होने देंगे

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Gautam Gambhir का Axar Patel पर बड़ा बयान, बोले- हम आंकड़े नहीं, Impact Player देखते हैं

अक्षर पटेल ने नेट सत्र के दौरान लगभग 30 मिनट तक अपनी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी को निखारा जिससे जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत के करो या मरो के मैच की एकादश में उनकी संभावित वापसी का संकेत मिलता है। अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में वाशिंगटन सुंदर को अक्षर पर तरजीह दी गई थी। क्रिकेट के नजरिए से यह कोई गलत विचार नहीं था क्योंकि टीम प्रबंधन पावर प्ले में दक्षिण अफ्रीका के बाएं हाथ के दो आक्रामक बल्लेबाजों क्विंटन डिकॉक और रेयान रिकेल्टन के खिलाफ वाशिंगटन की ऑफ स्पिन का इस्तेमाल करना चाहता था।

लेकिन भारत की यह रणनीति कामयाब नहीं हो पाई क्योंकि जसप्रीत बुमराह ने डिकॉक और रिकेल्टन को जल्दी आउट कर दिया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन रन की हार ने भारत के लिए बचे हुए दो सुपर आठ मैच को जीतना अनिवार्य बना दिया है और इसमें से पहला मैच बृहस्पतिवार को यहां जिम्बाब्वे के खिलाफ होगा। जिम्बाब्वे के भी शीर्ष क्रम में बाएं हाथ के दो बल्लेबाज सलामी बल्लेबाज ताडी मारुमानी और चौथे नंबर पर रेयान बर्ल हैं। तो क्या वाशिंगटन एकादश में अपनी जगह बरकरार रख पाएंगे या अक्षर की वापसी होगी।

रिंकू सिंह के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में वाशिंगटन को हटाए बिना अक्षर को खिलाया जा सकता है। भारत में पास हालांकि कुलदीप यादव को भी टीम में शामिल करने का विकल्प है। अक्षर सुपर आठ और उसके बाद के मुकाबलों के लिए चुने जाने के दावेदार हैं क्योंकि वह स्टंप्स को निशाना बनाने की अपनी काबिलियत के लिए जाने जाते हैं। उन्हें अब तक तीन मैच में 12.16 के औसत और 6.63 की इकोनॉमी से छह विकेट लिए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच के लिए चेपक की पिच लाल और काले रंग के मिश्रण वाली होने की उम्मीद है जिसमें काले रंग की मिट्टी अधिक होगी जो बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने की आजादी देगी। ऐसी स्थिति में अक्षर की अहमियत बढ़ जाती है।

यहां तक ​​कि मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी कहा था कि टीम का चयन पूरी तरह से आंकड़ों पर नहीं बल्कि खिलाड़ी की अहमियत पर आधारित होता है। उन्होंने कहा था, ‘‘हम औसत और आंकड़े नहीं देखते। हम देखते हैं कि उस स्थान पर कौन अधिक अच्छा कर सकता है। और अक्षर ने बहुत अच्छा किया है। लोग हमेशा इसके बारे में बात करते रहेंगे लेकिन मुझे लगता है कि हम भविष्य में भी इसी तरह आगे बढ़ना चाहते हैं।

Wed, 25 Feb 2026 10:44:38 +0530

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