लखनऊ विश्वविद्यालय में आज फिर बवाल:हनुमान चालीसा पढ़ने से पहले छात्र हिरासत में, नमाज के विरोध में इकट्ठा हुए थे
लखनऊ विश्वविद्यालय में आज लगातार तीसरे दिन भी बवाल जारी है। कैंपस में मुस्लिम छात्रों के नमाज पढ़ने के विरोध में आज दूसरे गुट के छात्र हनुमान चालीसा पढ़ने पहुंचे थे। उनके इकट्ठा होते ही पुलिस भी पहुंच गई। छात्रों को पकड़-पकड़कर गाड़ी में ठूंस दिया। चालीसा पाठ करने छात्रों का कहना है कि जब यहां नमाज पढ़ी गई, इफ्तार पार्टी की गई तो कोई कार्रवाई नहीं की गई। आज हनुमान चालीसा पर कार्रवाई क्यों की जा रही है? यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग पर कुदाल चलाई गई, उन पर देशद्रोह का मुकदमा होना चाहिए। हम अपने धर्म का भी सम्मान करते हैं। 3 तस्वीरें देखिए… विवाद-बवाल की पूरी जड़ जानिए यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर लाल बारादरी बिल्डिंग है, जिसके अंदर मस्जिद होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, कई छात्रों का यह भी कहना है कि उसके अंदर एक छोटा मंदिर भी है। बिल्डिंग काफी जर्जर हो गई है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन उसका रेनोवेशन करा रहा है। रविवार को जैसे ही खोदाई शुरू हुई, बड़ी संख्या में NSUI के स्टूडेंट मौके पर पहुंच गए। छात्रों ने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कहा- लाल बारादरी ASI द्वारा संरक्षित स्थल है, इसलिए बिना उसकी अनुमति के कोई कंस्ट्रक्शन नहीं किया जा सकता। रविवार को जिस जगह मुस्लिम छात्रों ने नमाज पढ़ी और इफ्तार किया, सोमवार को उसी जगह हिंदू छात्रों ने जय भवानी, जय श्रीराम के जयकारे लगाए। नमाज पढ़ने वाले छात्र उस स्थल पर निर्माण रुकवाने पहुंचे थे तो दूसरे गुट ने पहुंचकर नारेबाजी करते हुए उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। कैंपस के पल-पल अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग पढ़िए…
मेट्रो शहरों में 3 साल में 3 गुना बढ़े तलाक:58% केस में महिलाएं पहल कर रहीं, आर्थिक आजादी असंतुष्ट वैवाहिक रिश्ता खत्म करने में सक्षम बना रही
दिल्ली की एक फैमिली कोर्ट, सुबह के दस बज रहे हैं। बेंच पर एक महिला बैठी है- उम्र 28-29 साल, हाथ में फाइल, उसकी आंखों में न आंसू, न घबराहट। बस एक शांत, मुश्किल फैसला। महज तीन साल पहले इसी लड़की की शादी बड़े धूमधाम से हुई थी। लेकिन आज वो यहां है, एक ऐसे फैसले के साथ, जो उसने अकेले लिया, चुपचाप लिया और जिसे वो सही मानती है। ये कोई एक कहानी नहीं है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारत में दो दशक पहले जहां 0.6% विवाहित महिलाएं तलाकशुदा या अलग थीं, अब ये करीब 1% हो गई हैं। पुणे स्टडी 1986-87 के अनुसार, तलाक के 849 केस में 570 (67%) पतियों ने शुरू किए थे, पर अब करीब 58% महिलाएं पहल कर रही हैं। कौन ले रहा? औसतन 31 वर्ष की महिलाएं और 36 के पुरुष - तलाकशुदा महिलाओं और पुरुषों का कोई एकीकृत सरकारी राष्ट्रीय डेटा नहीं है। मगर, प्राइवेट मार्केट रिसर्च कंपनियों की स्टडी कहती है- देश में तलाक की औसत आयु महिलाओं में 31, पुुरुषों में 36 है। - पीएलएफएस 2017-2024 के अनुसार, शहरी भारत में पुरुषों में तलाकशुदा का अनुपात 0.3% (2017-18) से बढ़कर 0.5% (2023-24) हो गया और महिलाओं में 0.6% से 0.7% हो गया। - घरेलू हिंसा, बेवफाई या पारिवारिक दबाव जैसे निजी कारण तलाक की सबसे बड़ी वजह बनते हैं। - पढ़ी-लिखी महिलाएं कानूनी अधिकारों को बेहतर समझती हैं और उनके इस्तेमाल में नहीं हिचकतीं। कब ले रहे? शादी के 3 साल में सबसे ज्यादा रिश्ते टूट रहे - मुंबई फैमिली कोर्ट के एक अध्ययन के अनुसार, 40% मामलों में विवाह शादी के तीन साल के भीतर ही टूट जाता है और तलाक मांगने वाली अधिकतर महिलाएं 25 से 34 साल के बीच की हैं। - एक स्टडी के अनुसार, जनवरी, सितंबर और मई में तलाक की सबसे ज्यादा याचिकाएं आती हैं। वहीं, अक्टूबर-नवंबर, दिसंबर और मार्च में सबसे कम। - इसके पीछे त्योहार, बच्चों की छुट्टियां, अदालत के ग्रीष्मकालीन अवकाश जैसे कारण गिनाए जाते हैं। - अदालतें अनिवार्य 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि को माफ कर रही हैं। यह प्रक्रिया विवादित तलाक की तुलना में 30% कम तनावपूर्ण व तेज मानी गई है।
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