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मेट्रो शहरों में 3 साल में 3 गुना बढ़े तलाक:58% केस में महिलाएं पहल कर रहीं, आर्थिक आजादी असंतुष्ट वैवाहिक रिश्ता खत्म करने में सक्षम बना रही

दिल्ली की एक फैमिली कोर्ट, सुबह के दस बज रहे हैं। बेंच पर एक महिला बैठी है- उम्र 28-29 साल, हाथ में फाइल, उसकी आंखों में न आंसू, न घबराहट। बस एक शांत, मुश्किल फैसला। महज तीन साल पहले इसी लड़की की शादी बड़े धूमधाम से हुई थी। लेकिन आज वो यहां है, एक ऐसे फैसले के साथ, जो उसने अकेले लिया, चुपचाप लिया और जिसे वो सही मानती है। ये कोई एक कहानी नहीं है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारत में दो दशक पहले जहां 0.6% विवाहित महिलाएं तलाकशुदा या अलग थीं, अब ये करीब 1% हो गई हैं। पुणे स्टडी 1986-87 के अनुसार, तलाक के 849 केस में 570 (67%) पतियों ने शुरू किए थे, पर अब करीब 58% महिलाएं पहल कर रही हैं। कौन ले रहा? औसतन 31 वर्ष की महिलाएं और 36 के पुरुष - तलाकशुदा महिलाओं और पुरुषों का कोई एकीकृत सरकारी राष्ट्रीय डेटा नहीं है। मगर, प्राइवेट मार्केट रिसर्च कंपनियों की स्टडी कहती है- देश में तलाक की औसत आयु महिलाओं में 31, पुुरुषों में 36 है। - पीएलएफएस 2017-2024 के अनुसार, शहरी भारत में पुरुषों में तलाकशुदा का अनुपात 0.3% (2017-18) से बढ़कर 0.5% (2023-24) हो गया और महिलाओं में 0.6% से 0.7% हो गया। - घरेलू हिंसा, बेवफाई या पारिवारिक दबाव जैसे निजी कारण तलाक की सबसे बड़ी वजह बनते हैं। - पढ़ी-लिखी महिलाएं कानूनी अधिकारों को बेहतर समझती हैं और उनके इस्तेमाल में नहीं हिचकतीं। कब ले रहे? शादी के 3 साल में सबसे ज्यादा रिश्ते टूट रहे - मुंबई फैमिली कोर्ट के एक अध्ययन के अनुसार, 40% मामलों में विवाह शादी के तीन साल के भीतर ही टूट जाता है और तलाक मांगने वाली अधिकतर महिलाएं 25 से 34 साल के बीच की हैं। - एक स्टडी के अनुसार, जनवरी, सितंबर और मई में तलाक की सबसे ज्यादा याचिकाएं आती हैं। वहीं, अक्टूबर-नवंबर, दिसंबर और मार्च में सबसे कम। - इसके पीछे त्योहार, बच्चों की छु​ट्टियां, अदालत के ग्रीष्मकालीन अवकाश जैसे कारण गिनाए जाते हैं। - अदालतें अनिवार्य 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि को माफ कर रही हैं। यह प्रक्रिया विवादित तलाक की तुलना में 30% कम तनावपूर्ण व तेज मानी गई है।

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सांसद को ‘पीटने’ वाले IPS अफसर नायक का क्या होगा:बिना वारंट दीवार फांदकर घर में घुसी आंध्र पुलिस, क्या चंद्रबाबू नायडू की कार्रवाई रुकवाएंगे नीतीश

एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य की राजधानी में घुसकर एक सीनियर IPS अधिकारी के घर में दीवार फांद कर घुसती है। बिना वारंट के सरकारी आवास से गिरफ्तार करती है। IPS अफसर तुरंत कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं और अदालत पुलिस को फटकार लगाने के साथ उसकी ट्रांजिट रिमांड की अर्जी को खारिज कर देती है। यह कोई फिल्मी स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि 23 फरवरी को पटना में यह हकीकत में हुई। पूरी घटना आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री YS जगन मोहन रेड्डी और वर्तमान मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सालों पुरानी दुश्मनी का नया अध्याय है। बीच में फंस गए हैं बिहार कैडर के IPS अफसर सुनील नायक, जिन्हें जगन का 'करीबी' माना जाता है। सवाल यह है क्या बिहार सरकार उन्हें बचा पाएगी, या अफसर इस राजनीतिक खेल में एक और मोहरा साबित होंगे। आइए, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में पूरी घटना को स्टेप बाय स्टेप समझते हैं...। सवाल-1ः IPS सुनील नायक कौन हैं? किस आरोप में आंध्र प्रदेश की पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची? जवाबः मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले एम. सुनील कुमार नायक 2005 बैच के बिहार कैडर के IPS अफसर हैं। फिलहाल बिहार होम होमगार्ड एंड फायर सर्विसेंज में IG हैं। 23 फरवरी को पटना में आंध्र प्रदेश पुलिस की एक टीम नायक को गिरफ्तार करने उनके आवास पर पहुंची। नायक पर सांसद को टॉर्चर करने और पीटने का आरोप सवाल-2ः कोर्ट ने क्या कहते हुए IPS की ट्रांजिट रिमांड को खारिज कर दिया? जवाबः 23 फरवरी की सुबह नायक को आंध्र प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद पटना की ACJM 12 कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए पेश किया। सवाल-3: सुनील नायक की गिरफ्तारी की घटना के पीछे की राजनीति है क्या? जवाबः नायक की गिरफ्तारी की घटना में सीधे तौर पर आंध्र प्रदेश की राजनीति का रोल है। IPS अफसर नायक को जगन मोहन रेड्डी का करीबी माना जाता है। तेलगु देशम पार्टी (TDP) चीफ चंद्रबाबू नायडू की सरकार जून 2024 में आई। इसके बाद से पूर्व CM वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी (YSRCP) के करीबी कई IPS अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से सस्पेंशन, एक्सटेंशन, अरेस्ट, ट्रांसफर और जांच के रूप में हुई हैं। जगन की पार्टी YSRCP इसे राजनीतिक बदला कहती है। जबकि, TDP सरकार इसे कानूनी कार्रवाई और पिछली सरकार के दौरान हुए पावर के मिसयूज की जांच बताती है। नायक पर आंध्रा पुलिस की कार्रवाई भी इसी कड़ी का हिस्सा है। इसे नायडू सरकार के आने के बाद जगन के करीबी अफसरों पर हुई कार्रवाई से समझिए… सवाल-4ः IPS सुनील को क्या बिहार सरकार से मदद मिल सकती है? जवाबः उम्मीद कम है। क्योंकि बिहार और आंध्र प्रदेश, दोनों जगह NDA की सरकार है। भाजपा सरकार में साझेदार है। अब जब नायक पर नायडू सरकार कार्रवाई करना चाह रही है तो भाजपा इसे रोकने का प्रयास नहीं करेगी।

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इंदौर नगर निगम ने बुधवार को चलाया बड़ा वसूली अभियान, 1590 बकायादारों से 7 करोड़ वसूले, कई होटल और अस्पताल सील

शहर में संपत्ति और जलकर के बड़े बकायादारों के खिलाफ इंदौर नगर निगम ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। दिनभर चले सघन राजस्व वसूली अभियान के दौरान निगम ने 1590 बकायादारों से 7 करोड़ 6 लाख रुपये से अधिक की राशि वसूल की। इस विशेष अभियान के लिए सभी जोनल कार्यालयों और … Wed, 25 Feb 2026 20:42:59 GMT

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