Swami Ramdev Health Tips: 100 साल तक निरोगी जीवन जीना है तो करें ये काम, स्वामी रामदेव ने बताया
Swami Ramdev Health Tips: हर इंसान अपने जीवन में लंबी आयु की कामना करता है. पतंजलि के स्वामी रामदेव ने मंगलवार को अपने फेसबुक लाइव सेशन में लोगों को रोग मुक्त और जीवन में अच्छी आयु के लिए अपनी रोज की लाइफस्टाइल में योग को शामिल करना चाहिए. वे कहते हैं कि योग आपको हर समस्या से दूर कर सकता है. जेनेटिक्स बीमारी हो या लाइफस्टाइल रोग या फिर खराब वातावरण से होने वाली बीमारियां, हर किसी को दूर करना है तो योगाभ्यास करना चाहिए. उन्होंने बताया कि ये काम हर इंसान को रोज करने चाहिए.
यहां देखें लाइव वीडियो
क्या बोले स्वामी रामदेव?
फेसबुक लाइव में स्वामी रामदेव ने दर्शकों को बताया कि रोग नहीं योग बड़ा है. इसलिए, ऐसी कोई बीमारी नहीं जिसका तोड़ योग द्वारा न किया जाए. अगर बीमारी गंभीर हो जाए तो आयुर्वेद के इलाज से उसे दूर किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बीमारियों से बचने के लिए और 100 साल जीने के लिए सबसे जरूरी है सुबह के समय पसीना बहाना. इसके लिए आप योग और जॉगिंग कर सकते हैं. सूर्य नमस्कार के प्रतिदिन कम से कम 10-20 अभ्यास करें. डंड बैठक करने से भी शरीर से पसीना निकलेगा.
सुबह-सुबह हंसना-ताली बजाना जरूरी क्यों?
स्वामी रामदेव ने कहा अच्छे और लंबे जीवन के लिए हर दिन योगाभ्यास करने के साथ-साथ सुबह के समय जोर-जोर से कुछ मिनटों के लिए ताली बजानी चाहिए. इसके साथ ही जोर-जोर से खुलकर हंसना भी चाहिए. ये भी हमारे लिए अच्छा होता है. ऐसा करने से हमारे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. पूरे दिन हमारे शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़िया रहता है और तनाव भी कम होता है. हंसने से शरीर के अंदर हैप्पी हार्मोन बनते हैं, जो मूड को रिलैक्स करते हैं. इसे अंग्रेजी में क्लैपिंग और लाफिंग थेरेपी कहते हैं. ताली बजाना एक्यूप्रेशर की तरह भी काम करता है, जो दर्द से राहत दिलाता है.
मरीजों ने बताया कैसे आयुर्वेद ने दूर की समस्या?
लाइव सेशन के दौरान कई मरीजों ने बताया कि वे शुगर, बीपी के पेशंट हैं. साथ ही कई लोग फ्रैक्चर, ओबेसिटी और किडनी के रोगी पहुंचे थे. उन्होंने भी बताया कि पतंजलि वैलनेस सेंटर में बिना एलोपैथी दवाओं के आयुर्वेद और योग की मदद से वे निरोगी हो गए.
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Holashtak 2026: आज से शुरु हुआ होलाष्टक, इन 8 दिनों तक क्या कार्य सही और क्या कार्य हैं वर्जित, जानिए
Holashtak 2026: आज यानी 24 फरवरी 2026, मंगलवार से होलाष्टक की शुरुआत हो चुकी है. फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 07 बजकर 01 मिनट पर जैसे ही लगी, वैसे ही होलाष्टक की शुरुआत हो गई. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज से लेकर होलिका दहन तक के ये 8 दिन बेहद भारी माने जाते हैं. अगर आप कोई नया या शुभ काम करने की सोच रहे हैं तो ये समय आपके लिए बिल्कुल भी शुभ नहीं माना जाता है, क्योंकि इन 8 दिनों में शुभ कार्यों पर पूरी तरह पाबंदी लग जाती है. आइए जानते हैं कि आखिर इन दिनों में क्या करना वर्जित माना जाता है और इसके पीछे का असली कारण क्या है.
होलाष्टक 2026 शुभ मुहूर्त
आज यानी 24 फरवरी 2026, मंगलवार को होलाष्टक के दिन ब्रह्मा मुहूर्त सुबह 05 बजकर 23 मिनट से 06 बजकर 12 मिनट तक होगा. सन्ध्या मुहूर्त सुबह 05 बजकर 47 मिनट से 07 बजकर 01 मिनट तक होगा. अभिजित मुहूर्त की बात करें तो दोपहर 12 बजकर 28 मिनट से 01 बजकर 15 मिनट तक होगा. विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 49 मिनट से 03 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 40 मिनट से 07 बजकर 05 मिनट तक होगा.
होलाष्टक के दिन न करें ये काम
मांगलिक कार्य न करें
ज्योतिष के अनुसार, होलाष्टक के इन 8 दिनों में शादी, सगाई, मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार बिल्कुल नहीं किए जाते. माना जाता है कि इस समय ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं होती जिससे रिश्तों में खटास आ सकती है.
विवाद से बचें
शास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक के दौरान किसी भी तरह के विवाद, बहस या फिर गुस्सा करने से बचना चाहिए. कहा जाता है कि इस समय मानसिक तनाव बढ़ सकता है. इससे रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है.
नकारात्मक विचार न लाएं
होलाष्टक के दौरान नकारात्मक विचार और आलस्य बढ़ सकता है इसलिए ध्यान, पूजा-पाठ और सकारात्मक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए.
नए घर में प्रवेश न करें
अगर आपका नया घर बनकर तैयार है तो होलाष्टक के दिन गृह प्रवेश की गलती न करें. मान्यता है कि इस समय घर में प्रवेश करने से मानसिक अशांति और कलह बढ़ सकती है.
बड़ी खरीदारी से बचें
ज्योतिष के अनुसार, नई गाड़ी, सोना-चांदी या जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री जैसे बड़े निवेश इन दिनों में नहीं करने चाहिए. अगर बहुत जरूरी न हो तो कीमती सामान की खरीदारी होली के बाद ही करें.
इन 8 दिनों को क्यों माना जाता है अशुभ?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं. एक पौराणिक और दूसरा ज्योतिषीय. पौराणिक कथा के अनुसार, इन्हीं 8 दिनों में राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए क्रूर योजनाएं बनाई थीं. प्रह्लाद के उन कष्टों वाले दिनों को ही शोक और संयम के रूप में याद किया जाता है.
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