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भारत के साथ संबंध मजबूत करने को लेकर उत्सुक हूं : जापानी विदेश मंत्री मोटेगी

टोक्यो, 24 फरवरी (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी को उनके पद पर दोबारा नियुक्ति की बधाई दी। वहीं, जापान के विदेश मंत्री ने ईएएम जयशंकर के बधाई संदेश के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वह भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक (एफआईओपी) को साकार करने के लिए उत्सुक हैं।

जापान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी का धन्यवाद संदेश साझा किया।

बयान में लिखा था, मेरी दोबारा नियुक्ति पर आपके बधाई संदेश के लिए आपका धन्यवाद। मैं द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफआईओपी) को साकार करने के लिए आपके साथ लगातार काम करने के लिए उत्सुक हूं।

भारत के विदेश मंत्री ने मोटेगी के लिए बधाई संदेश में लिखा था, जापान के विदेश मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति पर विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी को बधाई। हमारी खास रणनीति और वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।

इससे पहले, 8 फरवरी को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रतिनिधि सभा के चुनाव में जीत पर सनाए ताकाइची को बधाई दी थी। अपने संदेश में पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि वह और ताकाइची भारत और जापान की दोस्ती को और ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

इसके जवाब में ताकाइची ने एक्स पर पोस्ट किया, प्रतिनिधि सभा के चुनाव पर आपकी हार्दिक बधाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। मैं जापान और भारत के बीच स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप को मजबूत करने और एक फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) को साकार करने में सहयोग करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करना जारी रखने के लिए उत्सुक हूं।

बता दें, भारत और जापान के बीच का मंत्रीपूर्ण संबंध काफी पुराना है। दोनों देशों के बीच के संबंध, रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद गहरे और मजबूत हैं।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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शंकराचार्य के समर्थक फलहारी बाबा का बड़ा ऐलान, 'आशुतोष ब्रह्मचारी की नाक काटने वाले के 21 लाख देंगे इनाम'

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगाए गए आरोपों के बाद अब मामला केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संत समाज के भीतर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी को लेकर कई धार्मिक नेताओं ने कड़ी नाराज़गी जताई है, जिससे विवाद और गहरा गया है.

इस बीच श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज (जिन्हें फलाहारी बाबा के नाम से भी जाना जाता है) ने बेहद आक्रामक बयान देते हुए बड़ा ऐलान कर दिया है.

21 लाख के इनाम की घोषणा

फलाहारी महाराज ने सार्वजनिक रूप से कहा कि जो व्यक्ति आशुतोष ब्रह्मचारी की 'नाक काटेगा' उसे 21 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा. इतना ही नहीं, उन्होंने आशुतोष को जूतों की माला पहनाने जैसी अपमानजनक बातें भी कही. उनके बयान के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है.

फलाहारी महाराज ने यह भी आरोप लगाया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य पर 'घिनौना आरोप' लगाकर सनातन समाज का अपमान किया है. उन्होंने आशुतोष को 'गौ हत्यारा' तक कह डाला और दावा किया कि हिंदू समाज उन्हें स्वीकार नहीं करता.

संत समाज की प्रतिक्रिया

कई संतों का कहना है कि शंकराचार्य जैसे पद पर आसीन व्यक्ति करोड़ों हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र होते हैं. ऐसे में उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर स्वाभाविक रूप से भावनात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही है. हालांकि कुछ धर्माचार्यों ने यह भी कहा है कि किसी भी विवाद का समाधान कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, न कि उग्र बयानबाज़ी से.

धार्मिक संगठनों के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग स्वर देखने को मिल रहे हैं. एक पक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खुलकर सामने आ रहा है, जबकि दूसरा पक्ष संयम और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखने की बात कह रहा है.

बढ़ती बयानबाज़ी से कानून-व्यवस्था की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की इनामी घोषणाएं और उत्तेजक बयान कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं. पुलिस और प्रशासन ऐसे मामलों में सतर्कता बरत रहे हैं, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो.

कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाने वाले बयान स्वयं दंडनीय हो सकते हैं. ऐसे में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है.

विवाद अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और कानूनी आयामों में फैल चुका है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है न्यायिक प्रक्रिया के तहत शांतिपूर्ण समाधान की ओर या फिर बयानबाज़ी की और तेज होती धार के साथ.

यह भी पढ़ें - अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने खटखटाया इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा, दाखिल की अग्रिम जमानत की याचिका

 

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