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Myanmar training camp case: भारत आया मैथ्यू वैनडाइक फिर जाएगा अमेरिका, कोर्ट ने 24 फरवरी तक दी राहत

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। वे हाल ही में अमेरिका से लौटे हैं, जहाँ वे कोर्ट की अनुमति लेकर अपने परिवार से मिलने गए थे। उन पर म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में कानूनी कार्यवाही चल रही है, जिसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। कोर्ट ने इस मामले में सह-आरोपी छह यूक्रेनी नागरिकों को 24 फरवरी, 2027 को होने वाली अगली सुनवाई तक भारत से बाहर रहने की अनुमति दे दी है। साथ ही, कोर्ट ने वैनडाइक को भी अमेरिका जाने की छूट दी है। यह घटनाक्रम सितंबर में आए उस आदेश के बाद हुआ है, जिसमें सभी सात आरोपियों को कुछ शर्तों के साथ एक महीने के लिए अपने-अपने देश जाने की अनुमति दी गई थी। 

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वैनडाइक को सितंबर में अमेरिका जाने की अनुमति दी गई थी


सितंबर 2026 में, राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने वैनडाइक को अपने परिवार से मिलने के लिए एक महीने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे तय समय के बाद भारत लौट आएं और अदालत के सामने पेश हों। इसी तरह की शर्तों पर छह यूक्रेनी नागरिकों को भी यूक्रेन जाने की अनुमति दी गई थी। इन सात लोगों को 'डिफ़ॉल्ट ज़मानत' (default bail) दी गई थी। NIA ने जो चार्जशीट दायर की थी, उसमें 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025' की धाराएं तो लगाई गई थीं, लेकिन 'अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट' (UAPA) के तहत कोई आरोप शामिल नहीं किए गए थे। अदालत ने यह भी शर्त रखी थी कि ज़रूरत पड़ने पर वे जांच में सहयोग करेंगे।

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NIA का आरोप था कि म्यांमार में ड्रोन युद्ध (drone warfare) की ट्रेनिंग दी गई थी


NIA ने 13 मार्च 2026 को वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया था। उन पर आरोप था कि वे बिना ज़रूरी यात्रा दस्तावेज़ों के मिज़ोरम में दाखिल हुए और फिर म्यांमार चले गए, जहाँ उन्होंने कथित तौर पर कुछ सशस्त्र समूहों के सदस्यों को ट्रेनिंग दी। एजेंसी का आरोप है कि इस समूह ने 'चिन नेशनल फ्रंट' और 'काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी' जैसे सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध, ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबल करने और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग दी। ये कथित गतिविधियां म्यांमार की सैन्य सरकार (military junta) के ख़िलाफ़ लड़ रहे समूहों से जुड़ी थीं। इन आरोपों को अभी तक किसी के दोषी होने का सबूत नहीं माना गया है।

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भाई से शादी करने वाली अमेरिकी सांसद का नाम निकला फर्जी? ट्रंप ने भारत विरोधी एल्हान उमर पर लगाया बड़ा आरोप

अमेरिकी मिड टर्म इलेक्शन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए वोट मांग रहे हैं और इस दौरान उनके निशाने पर इल्हान उमर हैं। इल्हान उमर एक सांसद हैं जिन्हें भारत में लोग पाकिस्तान समर्थक और जिहादी मानसिकता वाली भारत विरोधी सांसद मानते हैं। उनके यहां हाल ही में छापा पड़ा तो वापस से मामला गरमाया हुआ है और अब उन्हें लेकर हैरान करने वाली जानकारियां भी सामने आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जानकारी के सामने आने पर उन्हें सुझाव दिया कि मिनिसोटा की सोमाली अमेरिकी सांसद इलहान उमर को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उन्होंने कांग्रेस में शपथ लेने के लिए एक फर्जी नाम का इस्तेमाल किया। ट्रंप अपनी पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करने के ओयोवा में थे। लेकिन उन्होंने इस मंच का इस्तेमाल दूसरे राज्यों के डेमोक्रेट्स पर निशाना साधने के लिए किया। इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने यह बताया है कि 12 अक्टूबर को इलहान उमर के घर पर मारे गए छापे में अमेरिकी इमीग्रेशन दस्तावेजों से जुड़ी एक विस्तृत जांच की जा रही है और यह छापामारी उसी का हिस्सा थी। इसके बाद से ही ट्रंप उन्हें लेकर हमलावर हैं और चुनावी रैलियों से लेकर सोशल मीडिया तक उनके खिलाफ बयान दे रहे हैं और उनके भाई के साथ कथित तौर पर शादी करने के मामले को खूब उछाल रहे हैं और अब उनके हाथ उनका असली नाम भी लग गया है। जिसे लेकर वह यह कह रहे हैं कि उनका नाम भी फर्जी है तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।

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उमर पर यह आरोप पहली बार साल 2016 में लगा। आलोचकों का दावा है कि उसने नागरिकता हासिल करने के लिए 2009 में अहमद नूर सैद एलमी से शादी की जो उसके भाई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप उमर की इमीग्रेशन बैकग्राउंड का मुद्दा समय समय पर उठाचे रहते हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि उमर अवैध रूप से अमेरिका आई और अपने भाई से शादी करके अमेरिका की नागरिकता ले ली। हालांकि ट्रंप के आरोप पर इल्हान उमर के कार्यालय ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया। उनके कार्यालय ने कहा, 'यह पूरी तरह झूठ है। इल्हान उमर ही उनका असली नाम है।

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कौन है इल्हान उमर ?


40 साल की इल्हान सोमालियाई अमेरिकी राजनेता हैं जो साल 2019 से मिनिसोटा में चुनाव जीतकर हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में आई थी। वो अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली दो मुस्लिम महिला सांसदों में से एक हैं। अमेरिकी संसद में पहुंचने वाली वो पहली सोमालियाई अमेरिकी नागरिक भी हैं। मूल रूप से वो अफ्रीका की नागरिक रही हैं। उमर ने एसोसिएटिव प्रेस से बात करते हुए कहा था, वह सोमालिया के नागरिक युद्ध से भागे शरणार्थी के रूप में 1995 में 12 साल की उम्र में अमेरिका पहुंची थीं। वह पांच साल बाद 17 साल की उम्र में अमेरिकी नागरिक बनीं। हिजाब पहनकर शपथ लेने वाली वो पहली अमेरिकी मुस्लिम सांसद बनीं।

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