भारत बना रहा बेबी ब्रह्मोस, 20 गुना कम कीमत:भविष्य की जंग की तैयारी, सुरक्षा का नया फॉर्मूला
रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने साफ कर दिया है कि भविष्य की जंग अब महीनों और सालों खिंचेगी। इस हकीकत को देख भारत भी तैयारी में जुट गया है। सेना का फोकस अब केवल महंगी मिसाइलों पर नहीं, बल्कि इनके ‘मिनी मॉडल्स’ के बड़े भंडार पर है। हाल ही में पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ के परीक्षण को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दरअसल, ब्रह्मोस जैसी अचूक सटीकता और मारक क्षमता के कारण इसे ‘बेबी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है। हाल ही में सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने इस बदलाव को जरूरी बताते हुए कहा कि अगर हमारे पास किफायती लेकिन उच्च तकनीक वाले हथियार होंगे, तो हम लंबी जंग (हाई डेंसिटी वार) में किसी भी बड़े दुश्मन को पीछे धकेलने में सक्षम होंगे। रक्षा संबंधी कमेटी की रिपोर्ट- कम लागत में देश में बनें हथियार संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में इस रणनीति पर सकारात्मक रुख दिखाया है। समिति ने जोर दिया है कि भीषण और लंबे युद्ध की स्थिति में भारत को ऐसे हथियारों की जरूरत है जो बड़े पैमाने पर और कम लागत में देश के भीतर ही बनाए जा सकें। इसी नीति के तहत बजट में आवंटित राशि का एक बड़ा हिस्सा स्वदेशी खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है ताकि युद्ध के समय विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर न रहना पड़े। जंग में टिके रहने के लिए जरूरी स्वदेशी हथियार इजरायल-हमास जंग में इजरायल को चंद हजार के रॉकेट गिराने के लिए 50 लाख की मिसाइलें खर्च करनी पड़ीं। यूक्रेन-सूडान में सस्ते ड्रोन्स ने करोड़ों के टैंकों को मलबे में बदल चौंका दिया। वहीं, म्यांमार में विद्रोहियों ने जुगाड़ से बड़े हमलों को नाकाम किया। इनसे सबक मिला कि जंग केवल बड़े हथियारों से नहीं, बल्कि सस्ते, स्वदेशी और हथियारों के बड़े भंडार से जीती जा सकती है। ये भी तैयारी: इजराइल से ‘आयरन बीम’ मिलेगा स्वदेशी ताकत के साथ भारत इजराइल से ‘आयरन बीम’ जैसी लेजर आधारित प्रणाली हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। यह तकनीक चंद रुपयों की बिजली खर्च कर रॉकेटों को हवा में जला देती है। दूसरी ओर, भारत छोटे हथियारों के हब बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। आर्मेनिया के बाद अब फ्रांस ने पिनाका रॉकेट सिस्टम (बेबी ब्रह्मोस का वर्जन) में गहरी रुचि दिखाई है। ---------------- ये खबर भी पढ़ें… भारत ने K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया: पनडुब्बी से 3500km की रेंज तक मार करेगी भारत ने बंगाल की खाड़ी में न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन INS अरिघाट से 3,500 किलोमीटर रेंज वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। ये मिसाइल 2 टन तक न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। K-सीरीज की मिसाइलों में “K” अक्षर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में रखा गया है। इनकी भारत के मिसाइल कार्यक्रम में अहम भूमिका रही है। पूरी खबर पढ़ें…
केरल- 5 लाख लोगों को वॉट्सएप पर चुनावी मैसेज मिला:हाईकोर्ट बोला- ये निजता का गंभीर उल्लंघन; CM ऑफिस पर प्रशासनिक पोर्टल से डेटा लेने का आरोप
केरल में सरकारी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और विभिन्न लाभार्थियों सहित करीब 5 लाख लोगों को वॉट्सएप पर चुनावी संदेश भेजकर केरल सरकार घिर गई है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को नाराजगी जताते हुए पूछा कि मुख्यमंत्री कार्यालय को इनके मोबाइल नंबर कैसे मिले। कोर्ट ने डेटा सोर्स की पुष्टि तक ऐसे संदेश भेजने पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस पहल में गोपनीयता की कमी है। साथ ही, संदेह जताया कि कहीं वेतन और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए बने एसपीएआरके पोर्टल का डेटा गलत तरीके से मुख्यमंत्री कार्यालय तक तो नहीं पहुंचाया गया। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक डेटा का राजनीतिक प्रचार के लिए उपयोग अनुच्छेद-21 के तहत निजता के अधिकार और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट ने पूछा है कि डेटा प्रोसेसिंग का कानूनी आधार क्या है? हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। याचिका में आरोप है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने गोपनीयता कानून का उल्लंघन कर विधानसभा चुनाव से पहले सीएम के फोटो वाले वॉट्सएप संदेश भेजे। इनमें 10% डीए बढ़ोतरी जैसे काम गिनाए गए थे। केरल: इकलौता राज्य जहां लेफ्ट सत्ता में, इसी साल चुनाव केरल देश का इकलौता राज्य है, जहां अभी भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी। वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… केरल चुनाव से 3 महीने पहले दक्षिण में कुम्भ: पेशवाई जैसी रथयात्रा केरल के मल्लपुरम जिले का मात्र 37 हजार की आबादी वाला छोटा सा कस्बा तिरुनावाया। वैसे तो यह जगह राज्य के प्राचीन भगवान नवमुकुंद (विष्णु) मंदिर और यहां हर 12 साल में होने वाले मामांकम उत्सव के लिए विख्यात है, लेकिन इस बार यहां 18 जनवरी से 'दक्षिण भारत का पहला कुम्भ' होने जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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