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प. बंगाल में SIR,हर सीट पर औसतन 19000 नाम हटे:TMC बोली- सवा करोड़ बंगाली लाइन में लगे; भाजपा का आरोप- ममता को घोस्ट वोटर्स हटने का डर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो-तीन माह ही बचे हैं। यहां अभी भाषण और रैलियों का शोर नहीं है। लेकिन, सियासत भरपूर गर्म है। कोलकाता के न्यू मार्केट से चांदनी चौक, न्यू टाउन से जेसप बिल्डिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से बर्द्धमान तक करीब 600 किमी के सफर में साफ हो गया कि अभी वोटर लिस्ट ही चुनावी रणभूमि बनी हुई है। कोलकाता के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि ममता बनर्जी ने SIR की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ले जाकर अपनी जुझारू छवि फिर हाईलाइट की है। टीएमसी उनके सुप्रीम कोर्ट के वीडियो वायरल कर रही है। जगह-जगह ममता की काले कोट में होर्डिंग लगे हैं। भाजपा SIR को घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई बता रही थी। पर, ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ यानी विसंगति के आधार पर जारी सवा करोड़ बंगाली लाइन में लग गए हैं। हर सीट पर औसतन 19 हजार से ज्यादा नाम हटे हैं। टीएमसी बोली- ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में खड़ा कर दिया टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, भाजपा ने SIR से हमारी लड़ाई आसान कर दी। 15 साल की सत्ता की कुछ एंटी-इंकंबेंसी होगी, तो खत्म हो गई। एसआईआर भाजपा के लिए उल्टा तीर हो गया। वे फील्ड में नहीं जा पा रहे। ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में लगवा दिया। भाजपा का आरोप- ममता अपने ‘घोस्ट वोटर्स’ के नाम कटने से डर में हैं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष समिक भट्टाचार्य कहते हैं कि ममता ‘घोस्ट’ वोटर्स और घुसपैठियों के नाम कटने से डरी हैं। वह इनकी बदौलत जीतती थीं। मैं ऐसे लोगों को जानता हूं, जो कई साल पहले गुजर चुके, लेकिन उनके वोट पड़ते थे। सिर्फ वोटर लिस्ट की सफाई नहीं हो रही, यह ममता के विसर्जन का रास्ता बन रहा है। एनालिस्ट ने बताया नाम कटने से जीत-हार का गणित एक पार्टी के लिए काम कर रहे डेटा एनालिस्ट बताते हैं कि 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। इनमें टीएमसी 102 और भाजपा 64 सीट जीती थी। एसआईआर के तहत ड्राफ्ट सूची से प्रति सीट औसतन 19,795 नाम हटे हैं। जहां जीत का अंतर कम था, वहां मतदाता सूची में बदलाव का असर ज्यादा दिख सकता है। वे यह भी कहते हैं कि टीएमसी 68 सीटें 25,001 से 50,000 के अंतर से जीती थी, जबकि भाजपा को ऐसी 12 ही सीटें मिली थीं। 50 हजार से ज्यादा अंतर से टीएमसी 43 और भाजपा सिर्फ एक सीट जीती थी। यानी जहां मुकाबला करीबी था, वहां अंतिम सूची की बारीकी राजनीतिक रूप से ज्यादा मायने रखेगी। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के तहत ज्यादातर नोटिस SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58 लाख 20 हजार 898 नाम हटे हैं। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ तथा ‘अनमैप्ड’ श्रेणियों को मिलाकर करीब 1.26 करोड़ नोटिस जारी हुए हैं। निर्वाचन आयोग के दफ्तरों में दस्तावेज अपलोड करने और जांच की आपाधापी है। कोलकाता नॉर्थ के जिला निर्वाचन ऑफिस जेसप बिल्डिंग में 14 फरवरी को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ की सुनवाई में मूल रूप से बिहार के रहने वाले एक बुजुर्ग पत्नी और बेटे के साथ आए। वे लंबे समय से कोलकाता में हैं, पहले वोट दे चुके हैं, लेकिन इस बार नोटिस मिला। कोलकाता की बबीता ने बताया कि वोटर लिस्ट में उनके पिता के नाम में ‘कुमार’ है, लेकिन 2002 की लिस्ट में ‘KR’ लिखा है। इसलिए मेरा नाम लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में आ गया। एक अन्य महिला के पति का नाम ‘Ashok’ लिखा है लेकिन लिस्ट में नाम ‘Asoke’ है। इसलिए सुनवाई में आना पड़ा। देवी की स्पेलिंग ‘Devi’ या ‘Debi’ होना, गांगुली और गंगोपाध्याय, चटर्जी और चट्टोपाध्याय को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस मिले हैं। वोटर लिस्ट से नाम हटने पर क्या करें? चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांच लें। मतदाता eci.gov.in पर जाकर अपना नाम और EPIC नंबर देखकर पुष्टि कर सकते हैं। अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया 6 आसान सवाल-जवाब में पढ़ें... सवालः फॉर्म-6 कहां से मिलेगा? जवाबः फॉर्म-6 आप अपने नजदीकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से ले सकते हैं। यह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इसके अलावा तहसील, SDM कार्यालय या इलेक्शन ऑफिस से भी फॉर्म-6 मिल जाता है। सवालः फॉर्म-6 कैसे भरें? जवाबः फॉर्म-6 भरते समय अपना पूरा नाम, सही पता, उम्र और मोबाइल नंबर ध्यान से लिखें। अगर पहले कहीं आपका नाम वोटर लिस्ट में था और उसकी जानकारी याद हो तो वह भी दर्ज करें। फॉर्म पूरा भरने के बाद अंत में अपना हस्ताक्षर करना न भूलें। सवालः कौन-से दस्तावेज लगेंगे? जवाबः फॉर्म के साथ पहचान के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट की कॉपी लगानी होगी। पते के प्रमाण के रूप में राशन कार्ड, बिजली का बिल या बैंक पासबुक की कॉपी दी जा सकती है। उम्र के प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट की कॉपी लगानी होगी। सवालः फॉर्म जमा कहां करें? जवाबः फॉर्म आप अपने इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को दे सकते हैं। चाहें तो इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी इलेक्शन ऑफिस में जाकर भी फॉर्म जमा किया जा सकता है। सवालः जांच और सुनवाई कैसे होगी? जवाबः फॉर्म जमा होने के बाद बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आपके बताए पते पर आकर जांच करेगा। अगर किसी जानकारी को लेकर जरूरत पड़ी, तो आपको सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। सवालः नाम कब तक जुड़ेगा? जवाबः जांच पूरी होने के बाद अगर सब जानकारी सही पाई जाती है, तो आपका नाम अंतिम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। ...................................... SIR से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... तमिलनाडु में SIR से 97 लाख वोटर के नाम कटे: गुजरात में 73 लाख नाम हटाए; राजस्थान-बंगाल में 1 करोड़ से ज्यादा नाम कट चुके चुनाव आयोग ने शुक्रवार शाम तमिलनाडु, गुजरात में कराए गए स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की। तमिलनाडु में 97 लाख से ज्यादा नाम काटे गए हैं। SIR से पहले राज्य में वोटर्स की संख्या 6.41 करोड़ थी। अब घटकर 5.43 करोड़ हो गई है। राज्य में अब 2.66 करोड़ पुरुष, 2.77 करोड़ महिलाएं और 7,191 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें...

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भास्कर अपडेट्स:महाराष्ट्र- करेले की सब्जी बनाने पर बेटे ने मां की हत्या की

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में करेले की सब्जी बनाने से नाराज एक शख्स ने अपनी 65 साल की मां की हत्या कर दी। पीड़ित की पहचान सुमित्रा पेटकुले (65) के रूप में हुई है, जबकि आरोपी जगदीश पेटकुले (37) को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक जगदीश शराब का आदी था। उसकी पत्नी दो महीने पहले घर छोड़कर चली गई थी जिसके बाद से वह अपनी मां के साथ रह रहा था। घटना वाली रात, वह नशे में घर लौटा और करेला पकाने को लेकर अपनी मां से बहस करने लगा। फिर उनकी हत्या कर दी। आज की अन्य बड़ी खबरें… सुप्रीम कोर्ट ने ‘बाबरी’ नाम पर निर्माण रोकने की मांग खारिज की सुप्रीम कोर्ट ने मुगल शासक बाबर के नाम पर किसी भी धार्मिक ढांचे के निर्माण पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग संबंधी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस ले ली। याचिकाकर्ता के वकील ने तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के ऐलान का हवाला दिया। हुमायूं ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया है। याचिका में इस संबंध में केंद्र सरकार, राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश देने की मांग की गई थी।

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Shikhar Dhawan Wedding: फिर दूल्हा बने धवन, सोफी शाइन से की शादी, बारात में पहुंचा ये भारतीय स्टार, Photos

टीम इंडिया के स्टार ओपनर रहे शिखर धवन की 14 साल पहले आएशा मुखर्जी से शादी हुई थी लेकिन ये शादी 9 साल बाद ही टूट गई थी. फिर करीब डेढ़ साल पहले ही सोफी शाइन और धवन का रिलेशनशिप शुरू हुआ था. Sat, 21 Feb 2026 20:22:20 +0530

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