भास्कर अपडेट्स:महाराष्ट्र- करेले की सब्जी बनाने पर बेटे ने मां की हत्या की
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में करेले की सब्जी बनाने से नाराज एक शख्स ने अपनी 65 साल की मां की हत्या कर दी। पीड़ित की पहचान सुमित्रा पेटकुले (65) के रूप में हुई है, जबकि आरोपी जगदीश पेटकुले (37) को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक जगदीश शराब का आदी था। उसकी पत्नी दो महीने पहले घर छोड़कर चली गई थी जिसके बाद से वह अपनी मां के साथ रह रहा था। घटना वाली रात, वह नशे में घर लौटा और करेला पकाने को लेकर अपनी मां से बहस करने लगा। फिर उनकी हत्या कर दी। आज की अन्य बड़ी खबरें… सुप्रीम कोर्ट ने ‘बाबरी’ नाम पर निर्माण रोकने की मांग खारिज की सुप्रीम कोर्ट ने मुगल शासक बाबर के नाम पर किसी भी धार्मिक ढांचे के निर्माण पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग संबंधी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस ले ली। याचिकाकर्ता के वकील ने तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के ऐलान का हवाला दिया। हुमायूं ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया है। याचिका में इस संबंध में केंद्र सरकार, राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश देने की मांग की गई थी।
गुजरात HC बोला-मायके गई पत्नी को थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं:अत्याचार साबित करने को मारपीट के ठोस सबूत चाहिए; पति को आरोपों से बरी किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि पत्नी के बिना बताए मायके में रात रुकने पर पति द्वारा थप्पड़ मारने की एक घटना को क्रूरता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने एक पुराने मामले में पति को आरोपों से बरी कर दिया। जस्टिस गीता गोपी ने आदेश में कहा कि क्रूरता साबित करने के लिए लगातार और असहनीय मारपीट के ठोस सबूत जरूरी हैं। आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में यह भी दिखाना होगा कि आरोपी के कृत्य और आत्महत्या के बीच नजदीकी कारण संबंध था। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा संबंध साबित नहीं हुआ। अब जानिए क्या है पूरा मामला यह फैसला दिलीपभाई मंगलाभाई वरली की अपील पर आया। उन्होंने सेशंस कोर्ट के 2003 के फैसले को चुनौती दी थी। सेशंस कोर्ट ने मई 1996 में पत्नी की आत्महत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए धारा 306 में सात साल और धारा 498ए में एक साल की सजा सुनाई थी। अपीलकर्ता की ओर से धवल व्यास ने दलील दी कि आरोप सामान्य थे और दहेज मांग या उकसाने का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि विवाद पति के रात में बैंजो बजाने के लिए बाहर जाने और देर से लौटने को लेकर होता था। राज्य की ओर से ज्योति भट्ट ने सजा बरकरार रखने की मांग की। हाई कोर्ट ने कहा कि अभियोजन लगातार क्रूरता, मेडिकल रिकॉर्ड या पूर्व शिकायतें पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त सबूत के बिना सजा दी थी। ---------------- ये खबर भी पढ़ें… बिना वजह पति से दूरी बनाना मानसिक क्रूरता: 10 साल से मायके में पत्नी पत्नी ने बिना पर्याप्त कारण वैवाहिक जीवन से दूरी बनाई, यह पति के प्रति मानसिक क्रूरता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद में फैसला सुनाते हुए पति की तलाक मंजूर कर ली है। पत्नी पिछले 10 साल से मायके में रह रही है। पूरी खबर पढ़ें…
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