नेपाल चुनाव: झापा-5 सीट पर सबकी नजर, केपी शर्मा ओली के सामने ‘बालेन’ की चुनौती
नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले संसदीय चुनाव में झापा-5 संसदीय क्षेत्र सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का मुकाबला इंजीनियर-रैपर से राजनेता बने बालेन शाह से है। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
झापा-5 से यह ओली का आठवां चुनाव है। वह 34 वर्ष पहले पहली बार इसी सीट से निर्वाचित हुए थे। पहले के चुनावों में ओली देशभर में रैलियां कर अपनी पार्टी के लिए माहौल बनाते थे, लेकिन इस बार राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बालेन के मैदान में उतरने के बाद ओली को अपने ही क्षेत्र में ज्यादा समय देना पड़ रहा है और वे अन्य स्थानों पर प्रचार के लिए कम जा पा रहे हैं।
बालेन, जो मई 2022 में काठमांडू महानगर के 15वें मेयर के रूप में चुने गए थे, इस साल जनवरी में पद से इस्तीफा देकर झापा-5 से चुनाव लड़ने मैदान में उतरे। वे काठमांडू के पहले निर्दलीय मेयर रहे हैं, जिन्होंने पारंपरिक दलों को चुनौती दी थी।
पिछले वर्ष युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ओली यूएमएल-नेपाली कांग्रेस गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री थे। इन प्रदर्शनों में कम से कम 19 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई थीं। सितंबर 2025 में विरोध के बीच ओली के इस्तीफे के बाद बालेन को जेन-जी प्रदर्शनकारियों के एक चेहरे के रूप में देखा गया।
सोशल मीडिया पर सक्रिय बालेन अपने तीखे और बेबाक विचारों के लिए जाने जाते हैं। लाखों फॉलोअर्स वाले बालेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध हटाने के मुद्दे पर भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी। कई युवाओं ने उन्हें “नई पीढ़ी की आवाज” के रूप में समर्थन दिया।
अपने मेयर कार्यकाल के दौरान बालेन का कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) से टकराव भी चर्चा में रहा। सोशल मीडिया पर उनके और ओली के बीच तीखी बयानबाजी होती रही, जो अब चुनावी अखाड़े में सीधी टक्कर में बदल गई है।
बालेन ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) से जुड़कर चुनावी मैदान में कदम रखा है। आरएसपी ने उन्हें संभावित भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में भी पेश किया है। इस मुकाबले को पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था के प्रतिनिधि ओली और नई राजनीतिक ताकतों के प्रतीक बालेन के बीच सीधी भिड़ंत के रूप में देखा जा रहा है।
झापा-5 को लंबे समय से कम्युनिस्ट समर्थकों का गढ़ माना जाता रहा है और इसे ओली का राजनीतिक किला कहा जाता है। हालांकि, 2023 में दिखे “स्विंग वोट” को बालेन के लिए एक संभावित अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
इस बार झापा-5 में कुल 1,63,379 मतदाता पंजीकृत हैं। उनका फैसला न केवल इस हाई-वोल्टेज मुकाबले का परिणाम तय करेगा, बल्कि दोनों नेताओं के राजनीतिक भविष्य की दिशा भी निर्धारित कर सकता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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Bihar News: सोनपुर से उड़ेगी बिहार की उड़ान! बनने जा रहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, कैबिनेट की मंजूरी
Bihar News: बिहार कैबिनेट की शुक्रवार को हुई अहम बैठक में राज्य के विकास से जुड़ा बड़ा फैसला लिया गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सोनपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने को मंजूरी दे दी गई. मुख्य सचिवालय में आयोजित बैठक में सभी मंत्री मौजूद रहे और कुल 35 एजेंडों पर मुहर लगी.
4200 एकड़ से ज्यादा जमीन पर बनेगा एयरपोर्ट
सरकार ने सोनपुर में करीब 4200 एकड़ से ज्यादा जमीन पर ग्रीनफील्ड मॉडल के तहत अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने की योजना को अंतिम स्वीकृति दी है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 1302 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है. जानकारी के मुताबिक एयरपोर्ट के निर्माण के लिए लगभग 4228 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा.
यहां होगा एयरपोर्ट का निर्माण
यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजमार्ग के उत्तर और गंडक नदी के पश्चिम दरियापुर चंवर इलाके में बनाया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस परियोजना से उत्तर बिहार समेत आसपास के जिलों को सीधा लाभ मिलेगा. हवाई यात्रा आसान होगी और क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा.
रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद
बताया जा रहा है कि सोनपुर में बनने वाला यह एयरपोर्ट पूर्वी भारत का पहला और देश का पांचवां बड़ा ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा. इसके बनने से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. स्थानीय लोगों को भी रोजगार के मौके मिलेंगे और क्षेत्र का आर्थिक विकास तेज होगा.
छोटे हवाई अड्डे विकसित करने की भी योजना
इसके अलावा राज्य सरकार ने छह अन्य शहरों में छोटे हवाई अड्डे विकसित करने की योजना को भी आगे बढ़ाया है. मधुबनी, वीरपुर, मुंगेर, वाल्मीकि नगर, मुजफ्फरपुर और सहरसा में हवाई सेवा शुरू करने की तैयारी चल रही है. इन शहरों में एयरपोर्ट शुरू होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लोगों को लंबी दूरी की यात्रा में सहूलियत मिलेगी.
सोनपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की मंजूरी को बिहार के बुनियादी ढांचे में बड़ा कदम माना जा रहा है. आने वाले समय में यह परियोजना राज्य की हवाई कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल सकती है.
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