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उज्जैन के नानाखेड़ा और जाल स्कूल मैदान में आज होगा रावण दहन, शाम 7 बजे कार्यक्रम, पहले होगी आतिशबाजी

उज्जैन में दशहरे के बाद भी रावण दहन के कार्यक्रम जारी हैं। दरअसल आज गुरुवार को नानाखेड़ा मैदान और फ्रीगंज के जाल स्कूल ग्राउंड में शाम 7 बजे रावण दहन होगा। बता दें कि नानाखेड़ा में 101 फीट ऊंचा रावण तैयार किया गया है, जबकि जाल स्कूल मैदान में इस बार सतरंगी रावण लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। दोनों जगह रावण दहन से पहले करीब एक घंटे तक आतिशबाजी की जाएगी। पिछले दो दिनों में शहर में सात जगह रावण दहन हो चुका है।

दरअसल दशहरे के मौके पर अलग-अलग मैदानों में रावण दहन के आयोजन किए गए थे। 20 अक्टूबर को चार स्थानों पर और 21 अक्टूबर को तीन जगह रावण के पुतले जलाए गए। अब गुरुवार को दो और आयोजन होंगे। दोनों जगह कार्यक्रम शाम 7 बजे शुरू होंगे। आयोजकों ने रावण दहन से पहले आतिशबाजी की व्यवस्था भी की है। नानाखेड़ा मैदान में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां भूमि पूजन के साथ शुरू की गई थीं। वहीं जाल स्कूल मैदान में वाल्मीकि रावण दहन समिति पिछले 16 साल से लगातार यह आयोजन कर रही है।

नानाखेड़ा मैदान में 101 फीट ऊंचे रावण का होगा दहन

वहीं नानाखेड़ा मैदान में रावण दहन के लिए 101 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया गया है। यहां कार्यक्रम समिति अध्यक्ष डॉ. प्रकाश रघुवंशी की अध्यक्षता में होगा। रावण दहन के संयोजक अभिषेक सिसोदिया ने बताया कि कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद गिरी महाराज, नगर निगम सभापति कलावती यादव, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी और विवेक यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। आयोजकों के मुताबिक रावण दहन से पहले करीब एक घंटे तक आतिशबाजी की जाएगी। इसके बाद रावण के पुतले का दहन होगा। नानाखेड़ा में आयोजन की तैयारियां भूमि पूजन के साथ शुरू की गई थीं। यहां हर साल रावण दहन देखने के लिए लोग पहुंचते हैं। इस बार भी 101 फीट ऊंचे पुतले को तैयार किया गया है। कार्यक्रम के लिए समिति की ओर से व्यवस्थाएं की गई हैं।

जाल स्कूल मैदान में सतरंगी रावण रहेगा आकर्षण का केंद्र

वहीं फ्रीगंज क्षेत्र के जाल स्कूल मैदान में भी गुरुवार शाम 7 बजे रावण दहन किया जाएगा। यहां इस बार 101 फीट ऊंचा रावण तैयार किया गया है। इसकी खास बात यह है कि पुतले को सतरंगी रूप दिया गया है। आयोजन में यह सतरंगी रावण लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। रावण दहन से पहले यहां भी आतिशबाजी की जाएगी। जाल स्कूल मैदान में वाल्मीकि रावण दहन समिति पिछले 16 वर्षों से आयोजन कर रही है। समिति इस बार भी रावण दहन की तैयारी कर चुकी है। कार्यक्रम शाम 7 बजे होगा। आतिशबाजी के बाद रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। नानाखेड़ा की तरह यहां भी 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा लेकिन सतरंगी रूप इस आयोजन को अलग पहचान देता है।

उज्जैन में दो दिन में सात जगह हो चुका रावण दहन

बता दें कि उज्जैन में 20 अक्टूबर को चार स्थानों पर रावण दहन किया गया था। दशहरा मैदान और कार्तिक मेला मैदान में 101-101 फीट ऊंचे रावण के पुतले जलाए गए थे। वहीं उन्हेल चौराहे पर भी 101 फीट ऊंचे रावण का दहन हुआ था। हीरा मिल मैदान में 51 फीट ऊंचे रावण का पुतला जलाया गया था। इसके अगले दिन 21 अक्टूबर को शास्त्री नगर, खाकचौक और भैरवगढ़ में रावण दहन के कार्यक्रम हुए। इस तरह दो दिनों में शहर में सात जगह रावण दहन हो चुका है।

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Greg Chappell ने Team India को तोड़ा, Harbhajan Singh ने 2007 World Cup पर किया खुलासा

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 2007 का एकदिवसीय विश्व कप आज भी प्रशंसकों को निराशा की याद दिलाता है। मजबूत खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई थी। उस समय टीम के हेड कोच रहे ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल भी काफी विवादों में रहे थे। अब पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने उस दौर को याद करते हुए चैपल पर टीम के खिलाड़ियों के बीच फूट डालने का गंभीर आरोप लगाया है।

हरभजन सिंह ने प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि चैपल के कार्यकाल में भारतीय टीम की एकता को बड़ा नुकसान पहुंचा था। उनके मुताबिक, चैपल ने ऐसी रणनीति अपनाई, जिसमें खिलाड़ियों के बीच मतभेद बढ़े और टीम का आपसी तालमेल कमजोर हो गया। हरभजन ने इसे भारतीय क्रिकेट के सबसे खराब दौर में से एक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि चैपल को मुख्य कोच बनाना भारतीय क्रिकेट प्रबंधन के सबसे गलत फैसलों में शामिल था।

हरभजन के अनुसार, 2003 के एकदिवसीय विश्व कप में उपविजेता रही भारतीय टीम के खिलाड़ी आपस में काफी अच्छे संबंध रखते थे। उस समय खिलाड़ियों के बीच मजबूत तालमेल था और सभी मिलकर खेलते थे। लेकिन चैपल के आने के बाद स्थिति बदलने लगी। हरभजन का दावा है कि जो खिलाड़ी पहले एक-दूसरे के साथ मिलकर खेलते थे, उनके बीच बातचीत तक कम हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चैपल ने टीम को अंदर से कमजोर कर दिया।

बता दें कि ग्रेग चैपल और तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के बीच विवाद उस समय भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक था। चैपल के कोच रहते गांगुली को पहले एकदिवसीय टीम और फिर टेस्ट टीम से बाहर होना पड़ा था। इसके बाद राहुल द्रविड़ को भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा बटोरी थी।

विवाद उस समय और बढ़ गया, जब बीसीसीआई को भेजे गए चैपल के एक ईमेल की बातें सार्वजनिक हो गईं। इसमें गांगुली के प्रदर्शन और नेतृत्व को लेकर आलोचनात्मक बातें सामने आई थीं। गांगुली भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में गिने जाते थे, इसलिए उन्हें टीम से बाहर किए जाने का मुद्दा काफी बड़ा बन गया था। उनकी टीम से अनुपस्थिति पर संसद में भी चर्चा हुई थी।

हरभजन सिंह ने बातचीत में यह भी आशंका जताई कि भारतीय टीम में फूट डालने के पीछे चैपल का कोई दूसरा मकसद हो सकता था। उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय टीम ही ऐसी टीमों में शामिल थी, जो ऑस्ट्रेलिया को लगातार कड़ी चुनौती दे सकती थी। हरभजन के विचार में, अगर भारतीय खिलाड़ी एकजुट नहीं रहते तो मैदान पर उनका प्रदर्शन प्रभावित होना स्वाभाविक था।

उन्होंने यह संभावना भी जताई कि टीम के भीतर मतभेद पैदा होने से ऑस्ट्रेलिया को फायदा मिल सकता था। हालांकि, चैपल ने जानबूझकर ऐसा ऑस्ट्रेलियाई टीम के लाभ के लिए किया था या नहीं, इस बारे में हरभजन ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। यह उनकी व्यक्तिगत राय और उस दौर के अनुभवों पर आधारित आरोप है।

गौरतलब है कि 2007 के विश्व कप में भारत बांग्लादेश से हारने के बाद ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाया था। इसके बाद देशभर में प्रशंसकों ने खिलाड़ियों के खिलाफ नाराजगी जताई थी और कई जगह उनके पुतले तक जलाए गए थे। हरभजन के ताजा बयान ने एक बार फिर उस निराशाजनक दौर, चैपल-गांगुली विवाद और भारतीय टीम के भीतर के माहौल को चर्चा में ला दिया है।

Thu, 22 Oct 2026 19:28:00 +0530

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