अफगानिस्तान में भूख का बड़ा संकट, 34 लाख लोग आपातकालीन भुखमरी की चपेट में
अफगानिस्तान में करीब 1.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जिनमें से 34 लाख लोग भुखमरी के आपातकालीन (आईपीसी 4) स्तर पर हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने यह जानकारी दी है. स्थानीय मीडिया की बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों में हालात और बिगड़ने की आशंका है.
लाखों परिवार भोजन के लिए कर रहे संघर्ष
यूएन ओसीएचए की प्रवक्ता ओल्गा चेरेव्को ने दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान दौरे के बाद यह बयान दिया. अफगानिस्तान की समाचार एजेंसी 'खामा प्रेस' के अनुसार, उन्होंने बताया कि बेरोजगारी, कम आय और जरूरी सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण लाखों परिवार अभी भी पर्याप्त भोजन नहीं खरीद पा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की यह चेतावनी अगले कुछ महीनों की विषम स्थिति को देखते हुए सामने आई है. सर्दियों के मौसम में लोगों को अक्सर रोजगार की तलाश और भोजन खरीदने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ओल्गा चेरेव्को ने कहा कि वर्षों के संघर्ष, आर्थिक समस्याओं, सूखे और बार-बार आए संकटों ने अफगानिस्तान के लोगों की किसी भी नए झटके या संकट का सामना करने की क्षमता को कमजोर कर दिया है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए मानवीय सहायता जरूरी है, लेकिन यह सार्वजनिक सेवाओं, नौकरियों और आय के स्थायी स्रोतों की जगह नहीं ले सकती. चेरेव्को ने कृषि, ग्रामीण आजीविका, स्थानीय बाजारों, रोजगार, जल प्रणालियों और स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक निवेश करने तथा महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने का आह्वान किया.'खामा प्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सर्दियों के आने से पहले कदम उठाने की अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरतमंद परिवारों तक सहायता तब पहुंच जानी चाहिए, जब उनके पास बचे-खुचे संसाधन पूरी तरह खत्म न हुए हों. पिछले हफ्ते, खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने कहा था कि इस साल सर्दियों के मौसम में अफगानिस्तान की लगभग 40 प्रतिशत आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकती है. साथ ही, 2027 में गंभीर कुपोषण के मामलों में भी भारी वृद्धि होने की आशंका है.
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इन महीने में अधिक संकट होगा पैदा
संयुक्त राष्ट्र की इन दोनों एजेंसियों ने 'इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन' (आईपीसी) के ताजा विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि नवंबर से अप्रैल के बीच (जब भोजन की कमी सबसे अधिक होती है), लगभग 1.92 करोड़ (19.2 मिलियन) लोग - यानी कुल आबादी का 38 प्रतिशत - गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करेंगे. पिछले साल इसी अवधि के लिए यह आंकड़ा 1.74 करोड़ (17.4 मिलियन) रहने का अनुमान था. इनमें से लगभग 50 लाख लोगों को आपात कालीन स्तर की भुखमरी (आईपीसी चरण 4) का सामना करना पड़ सकता है. यह संख्या अप्रैल-सितंबर 2026 के लिए अनुमानित आंकड़ों से दोगुनी है. बदख्शां, बदगीस, दायकुंडी, घोर, समंगन, सर-ए-पोल और गजनी के ग्रामीण इलाकों में हालात सबसे खराब होने की आशंका है.
एक-चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा
एजेंसियों के अनुसार, कुपोषण के मामलों में 2026 की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह संख्या 40 लाख तक पहुंचने का अनुमान है. इनमें से एक-चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा हैं. बचाव और इलाज की सुविधाएं अपर्याप्त होने के कारण महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में हैं. यह संकट कई कारणों से पैदा हुआ है. इनमें इस साल ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी, सीमाओं पर पाबंदी, होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग में रुकावटें (जिससे जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ गई हैं), और मानवीय सहायता के लिए फंड की भारी कमी शामिल हैं. एजेंसियों ने बताया कि 2026 में अच्छी बारिश के कारण फसल उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन लगातार बेरोजगारी के चलते कई परिवार, जो अपना अनाज खुद नहीं उगाते, अब भी पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं.
अदाणी ग्रीन एनर्जी की ऊर्जा बिक्री पहली छमाही में 32 प्रतिशत बढ़ी; एबिटडा 7,900 करोड़ रुपए के पार
अहमदाबाद, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने बुधवार को नतीजे जारी किए। कंपनी का एबिटडा (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पूर्व आय) वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत बढ़कर 7,957 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, ऊर्जा की बिक्री सालाना आधार पर 32 प्रतिशत बढ़कर 25.75 अरब यूनिट्स हो गई है।
कंपनी की स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में बिजली आपूर्ति से होने वाली आय सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 8,299 करोड़ रुपए हो गई है, जबकि इस दौरान एबिटडा मार्जिन 92.9 प्रतिशत रहा।
इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में कैश प्रॉफिट सालाना आधार पर 35 प्रतिशत बढ़कर 4,176 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान कंपनी ने 17,160 करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय भी किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 38 प्रतिशत अधिक है। नेट डेट और रन-रेट एबीआईटीडीए का अनुपात 5.6 गुना रहा।
कंपनी के अनुसार, आय और मुनाफे में यह मजबूत वृद्धि लगातार क्षमता विस्तार, आधुनिक रिन्यूएबल एनर्जी तकनीकों को अपनाने और अपनी परियोजनाओं के बेहतर संचालन प्रदर्शन के कारण हुई है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष खन्ना ने कहा कि कंपनी को अपनी अक्षय ऊर्जा संपत्तियों के बेहतर क्रियान्वयन से लगातार फायदा मिल रहा है, जिससे ऊर्जा उत्पादन और वित्तीय प्रदर्शन में वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा, हमने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हमने खावड़ा में अपनी चालू बीईएसएस (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) क्षमता को बढ़ाकर 6.63 गीगावाट घंटा कर दिया है, जो कि एक ही स्थान पर स्थित दुनिया का सबसे बड़ा बैटरी स्टोरेज इंस्टॉलेशन है।
खन्ना ने बताया, इसके साथ ही एजीईएल भारत का सबसे बड़ा बीईएसएस ऑपरेटर बन गया है, जिसकी हिस्सेदारी देश की कुल चालू क्षमता के आधे से भी अधिक है। हमारा ध्यान स्टोरेज क्षमता को बढ़ाने पर है, साथ ही हम ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं।
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में, एजीईएल की ऊर्जा बिक्री 33 प्रतिशत बढ़कर 12,090 मिलियन यूनिट हो गई। बिजली आपूर्ति से प्राप्त आय सालाना आधार पर 45 प्रतिशत बढ़कर 4,019 करोड़ रुपए हो गया, जबकि बिजली आपूर्ति से प्राप्त एबिटडा 51 प्रतिशत बढ़कर 3,835 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। तिमाही नकद लाभ 45 प्रतिशत बढ़कर 1,951 करोड़ रुपए हो गया।
--आईएएनएस
एबीएस
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