Uttarakhand Madrasa Holiday Change: मदरसों के साप्ताहिक अवकाश में किया गया बदलाव
Uttarakhand Madrasa Holiday Change: उत्तराखंड में मदरसों की साप्ताहिक छुट्टी को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है. अब शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त और मान्यता के लिए आवेदन कर चुके मदरसों में शुक्रवार की जगह रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा. राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने इस संबंध में शिक्षा विभाग को जरूरी निर्देश दिए हैं. ये व्यवस्था कुल 206 मदरसों पर लागू होगी. सरकार का कहना है कि इन संस्थानों में भी दूसरे स्कूलों की तरह शिक्षा से जुड़े नियम लागू किए जाएंगे, ताकि पढ़ाई और शैक्षणिक व्यवस्था में एकरूपता लाई जा सके. अधिक जानकारी के लिए देखें पूरा वीडियो-
अफगानिस्तान में भूख का बड़ा संकट, 34 लाख लोग आपातकालीन भुखमरी की चपेट में
अफगानिस्तान में करीब 1.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जिनमें से 34 लाख लोग भुखमरी के आपातकालीन (आईपीसी 4) स्तर पर हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने यह जानकारी दी है. स्थानीय मीडिया की बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों में हालात और बिगड़ने की आशंका है.
लाखों परिवार भोजन के लिए कर रहे संघर्ष
यूएन ओसीएचए की प्रवक्ता ओल्गा चेरेव्को ने दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान दौरे के बाद यह बयान दिया. अफगानिस्तान की समाचार एजेंसी 'खामा प्रेस' के अनुसार, उन्होंने बताया कि बेरोजगारी, कम आय और जरूरी सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण लाखों परिवार अभी भी पर्याप्त भोजन नहीं खरीद पा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की यह चेतावनी अगले कुछ महीनों की विषम स्थिति को देखते हुए सामने आई है. सर्दियों के मौसम में लोगों को अक्सर रोजगार की तलाश और भोजन खरीदने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ओल्गा चेरेव्को ने कहा कि वर्षों के संघर्ष, आर्थिक समस्याओं, सूखे और बार-बार आए संकटों ने अफगानिस्तान के लोगों की किसी भी नए झटके या संकट का सामना करने की क्षमता को कमजोर कर दिया है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए मानवीय सहायता जरूरी है, लेकिन यह सार्वजनिक सेवाओं, नौकरियों और आय के स्थायी स्रोतों की जगह नहीं ले सकती. चेरेव्को ने कृषि, ग्रामीण आजीविका, स्थानीय बाजारों, रोजगार, जल प्रणालियों और स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक निवेश करने तथा महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने का आह्वान किया.'खामा प्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सर्दियों के आने से पहले कदम उठाने की अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरतमंद परिवारों तक सहायता तब पहुंच जानी चाहिए, जब उनके पास बचे-खुचे संसाधन पूरी तरह खत्म न हुए हों. पिछले हफ्ते, खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने कहा था कि इस साल सर्दियों के मौसम में अफगानिस्तान की लगभग 40 प्रतिशत आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकती है. साथ ही, 2027 में गंभीर कुपोषण के मामलों में भी भारी वृद्धि होने की आशंका है.
ये भी पढ़ें: Karwa Chauth 2026: करवा चौथ कब है? जानें चांद दिखने के बाद व्रत खोलने की A2Z विधि
इन महीने में अधिक संकट होगा पैदा
संयुक्त राष्ट्र की इन दोनों एजेंसियों ने 'इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन' (आईपीसी) के ताजा विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि नवंबर से अप्रैल के बीच (जब भोजन की कमी सबसे अधिक होती है), लगभग 1.92 करोड़ (19.2 मिलियन) लोग - यानी कुल आबादी का 38 प्रतिशत - गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करेंगे. पिछले साल इसी अवधि के लिए यह आंकड़ा 1.74 करोड़ (17.4 मिलियन) रहने का अनुमान था. इनमें से लगभग 50 लाख लोगों को आपात कालीन स्तर की भुखमरी (आईपीसी चरण 4) का सामना करना पड़ सकता है. यह संख्या अप्रैल-सितंबर 2026 के लिए अनुमानित आंकड़ों से दोगुनी है. बदख्शां, बदगीस, दायकुंडी, घोर, समंगन, सर-ए-पोल और गजनी के ग्रामीण इलाकों में हालात सबसे खराब होने की आशंका है.
एक-चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा
एजेंसियों के अनुसार, कुपोषण के मामलों में 2026 की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह संख्या 40 लाख तक पहुंचने का अनुमान है. इनमें से एक-चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा हैं. बचाव और इलाज की सुविधाएं अपर्याप्त होने के कारण महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में हैं. यह संकट कई कारणों से पैदा हुआ है. इनमें इस साल ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी, सीमाओं पर पाबंदी, होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग में रुकावटें (जिससे जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ गई हैं), और मानवीय सहायता के लिए फंड की भारी कमी शामिल हैं. एजेंसियों ने बताया कि 2026 में अच्छी बारिश के कारण फसल उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन लगातार बेरोजगारी के चलते कई परिवार, जो अपना अनाज खुद नहीं उगाते, अब भी पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









