ट्रंप का दावा: 200% टैरिफ की धमकी दी तो थमा भारत-पाक तनाव, झड़प में 11 जेट हुए तबाह
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। इस बार उन्होंने कहा कि पिछले साल मई में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव के दौरान 11 “बहुत महंगे” लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे।
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने दोनों देशों को 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देकर संघर्ष को रुकवाया। उनके मुताबिक, जब आर्थिक नुकसान की बात आई तो दोनों देश पीछे हट गए।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बढ़ा था तनाव
ट्रंप का यह बयान उस संदर्भ में आया है जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।
ट्रंप ने दावा किया कि उस दौरान हवाई संघर्ष जारी था और कई विमान गिराए गए। उन्होंने कहा, “11 जेट गिराए गए, बहुत महंगे जेट। मैंने दोनों नेताओं को फोन किया और कहा कि अगर आप लोग नहीं रुके तो मैं व्यापार समझौते खत्म कर दूंगा।”
पीएम मोदी से करीबी संबंध का जिक्र
अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि वह भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को अच्छी तरह जानते हैं और उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत कर हालात को संभाला। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सार्वजनिक रूप से उन्हें 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाने का श्रेय दिया था।
#WATCH | At the Board of Peace Event, US President Donald Trump says, "...He (Pakistani PM) said in front of our Chief of Staff that President Trump saved 25 million lives when he stopped the war between us and India...That war was raging. Planes were being shot down. And I got… pic.twitter.com/pm5eT7xjz3
— ANI (@ANI) February 19, 2026
भारत ने खारिज किया दावा
हालांकि भारत ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से युद्धविराम नहीं हुआ था। मंत्रालय का कहना है कि संघर्ष विराम का फैसला दोनों देशों के डीजीएमओ स्तर की बातचीत के बाद लिया गया था।
ट्रंप पहले भी कई बार आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत कूटनीति को भारत-पाक तनाव कम करने का कारण बता चुके हैं, लेकिन भारत लगातार इस दावे को अस्वीकार करता रहा है।
Trump Board of Peace: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से भारत ने बनाई दूरी, बैठक में ऑब्जर्वर के तौर पर की शिरकत
Trump Board of Peace: गाजा संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने औपचारिक सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में हिस्सा लिया। फिलहाल भारत इस बोर्ड का स्थायी सदस्य नहीं बना है, लेकिन उसकी भागीदारी ने कूटनीतिक हलकों में कई संकेत दिए हैं।
वाशिंगटन डीसी स्थित United States Institute of Peace में आयोजित इस बैठक में भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक नामग्या खम्पा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
दावोस में हुई थी पहल की घोषणा
पिछले महीने World Economic Forum, दावोस में ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापना के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की रूपरेखा पेश की थी। उन्होंने दावा किया था कि यह मंच भविष्य में संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को चुनौती दे सकता है।
बैठक में करीब 50 देशों के अधिकारी शामिल हुए। इनमें 27 देश औपचारिक सदस्य हैं, जबकि भारत और यूरोपीय संघ समेत कुछ अन्य देशों ने पर्यवेक्षक के तौर पर भाग लिया।
भारत का रुख क्या है?
भारत को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, लेकिन सरकार ने अभी तक इसे स्वीकार करने पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने वाली हर पहल का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री भी गाजा सहित पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक और स्थायी शांति की दिशा में उठाए गए कदमों का स्वागत कर चुके हैं।
हालांकि, पहली बैठक में भारतीय प्रतिनिधि की मौजूदगी से यह संकेत जरूर मिला है कि भारत इस मंच के साथ संवाद बनाए रखना चाहता है, भले ही अभी पूर्ण सदस्यता पर फैसला लंबित हो।
7 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सहमति
बैठक में ट्रंप ने बताया कि कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत समेत नौ देशों ने गाजा के लिए 7 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सहमति जताई है। साथ ही अमेरिका ने भी शांति बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की है, हालांकि इस राशि के उपयोग को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
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