गाजा के इजरयली सेना ने हमास की [करीब 1 किलोमीटर लंबी सुरंग का पहले पता लगाया और फिर उसे नष्ट कर दिया। सुरंग में हमास के लड़ाकों ने विस्फोटक छिपा कर रखे थे। इजराइली सेना के एललीजियालोम यूनिट ने सुरंग को नष्ट कर दिया है। इजराइली डिफेंस फोर्स का कहना है कि गाजा में हमास के बड़े सुरंग नेटवर्क का करीब 60% हिस्सा 60% एरिया अभी भी चालू है। गाजा डिवीजन की उत्तरी ब्रिगेड के सफाई अभियान के दौरान यह सुरंग गाजा युद्धविराम रेखा के इजरायली हिस्से में स्थित थी। बाद में इसे विशिष्ट याहलोम लड़ाकू इंजीनियरिंग इकाई द्वारा ध्वस्त कर दिया गया। सेना का मानना है कि गाजा पट्टी में हमास द्वारा फैलाई गई अनुमानित 550-650 किलोमीटर (350-400 मील) लंबी सुरंगों के नेटवर्क का कम से कम 60% हिस्सा अभी भी सुरक्षित है।
आईडीएफ ने वेस्ट बैंक में हाल ही में चलाए गए अभियानों की हेलमेट कैमरा फुटेज जारी की, जिसमें दुवदेवन यूनिट के सैनिकों को नाबलस शहर के पास दो अलग-अलग गांवों में गिरफ्तारियां करते हुए दिखाया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक इलाके में विस्फोटक बनाने और आतंकवादी साजिशों को बढ़ावा देने में शामिल था। दूसरा व्यक्ति पहले लायंस डेन आतंकवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और उसके पास बंदूक और गोला-बारूद था जिससे वह आईडीएफ सैनिकों पर हमला करने की योजना बना रहा था।
भारतीय रक्षा बल (आईडीएफ) ने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के कई ठिकानों पर हमला किया, जिन्हें उसने आतंकी साजो-सामान के केंद्र बताया। आईडीएफ के अनुसार, इनमें हथियार भंडारण सुविधाएं और मिसाइल लॉन्चर सहित अन्य ठिकाने शामिल थे। आईडीएफ ने कहा कि ये हमले हिज़्बुल्लाह द्वारा "युद्धविराम समझौतों के बार-बार उल्लंघन" के जवाब में किए गए थे, और यह भी कहा कि ऐसे साजो-सामान के केंद्रों की मौजूदगी ही समझौतों का उल्लंघन है।
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अगले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की होने वाली इजराइल यात्रा से ठीक पहले भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जहां भारत ने इजराइल के खिलाफ यूएन में अपना पक्ष रखा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें वेस्ट बैंक में इजराइल द्वारा नियंत्रण मजबूत करने की कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई है। यूएन का यह बयान 100 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा जारी किया गया है। जिसमें यूनाइटेड किंगडम, रशिया, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश शामिल है और भारत ने भी इस बयान के डेडलाइन समाप्त होने से ठीक पहले इस बयान का समर्थन किया है। इस बयान में कहा गया है कि वेस्ट बैंक में इजराइल की एकतरफ़ा कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही 1967 के बाद कब्जे वाली फिलिस्तीनी क्षेत्रों जिसमें पूर्वी यरूशलेम भी शामिल है।
वहां की जनसंख्यिकी और भौगोलिक स्थिति बदलने की किसी भी कोशिश को खारिज किया गया है। आपको बता दें इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र की अंडर सेक्रेटरी जनरल रोजमरी डिकालो ने भी चेतावनी दी है कि यह कदम डिफेक्टो एनेक्सेशन यानी व्यवहारिक रूप से कब्जे की स्थिति बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। यह मुद्दा यूनाइटेड नेशन सुरक्षा परिषद तक पहुंच चुका है। भारत का ये रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि नई दिल्ली और तेल अवी के रिश्ते पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं। खास करके रक्षा और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में। लेकिन भारत लगातार हमेशा से दो राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है। जिसमें एक तरफ स्वतंत्र फिलिस्तीन दूसरी तरफ सुरक्षित सीमाओं के भीतर इजराइल दोनों साथ-साथ अस्तित्व में हो ऐसा भारत मानता है।
यह कदम एक संतुलित कूटनीति का संकेत भी है। जहां भारत फिलिस्तीन और इजराइल दोनों से अपने रिश्ते बेहतर करना चाहता है। एक ओर भारत इजराइल के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है। तो दूसरी ओर वो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों में फिलिस्तीन का समर्थन भी कर रहा है। अब सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी की आगामी इजराइल यात्रा के दौरान यह मुद्दा वहां पर उठ सकता है और क्या भारत अपने पारंपरिक संतुलन वाले रुख को बरकरार रखते हुए पश्चिमी एशिया में बड़े भूमिका निभाने की कोशिश करेगा। एक बात तो स्पष्ट है कि भारत ने यह संदेश दिया है कि दोस्ती अपनी जगह लेकिन वैश्विक नियम और सिद्धांत भी उतने ही महत्वपूर्ण है।
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