एआई और भविष्य की तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर पीएम मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस ने की चर्चा (लीड-1)
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने गुरुवार को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने भविष्य की तकनीकों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर में निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।
दोनों नेताओं की मुलाकात नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुई। यह क्राउन प्रिंस की भारत की दूसरी आधिकारिक यात्रा है। इससे पहले वे सितंबर 2024 में भारत आए थे।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि क्राउन प्रिंस के साथ उनकी चर्चा फलदायी रही और दोनों देशों ने एआई, सुपरकंप्यूटर, भारत में डेटा सेंटर में निवेश समेत भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, शिक्षा तथा सांस्कृतिक सहयोग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 18 फरवरी 2026 को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर के चार वर्ष पूरे हो गए हैं, जिसके दौरान द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय निवेश प्रवाह की सराहना की और यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड्स को भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। इस संदर्भ में ‘लइमाद’ जैसे नए सॉवरेन फंड की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान, भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और संयुक्त अरब अमीरात के स्वास्थ्य एवं रोकथाम मंत्रालय के बीच स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने का भी स्वागत किया गया। यह समझौता पेशेवर आदान-प्रदान, संस्थागत सहयोग, अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ, फार्मास्यूटिकल्स और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों के विकास को बढ़ावा देगा।
साथ ही, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक), जी42 और मोहम्मद बिन जायद यूनिवर्सिटी ऑफ एआई के बीच भारत में सुपरकंप्यूटर क्लस्टर की तैनाती के लिए टर्म शीट को अंतिम रूप दिए जाने का भी स्वागत किया गया। यह सुपरकंप्यूटर क्लस्टर ‘एआई इंडिया मिशन’ का हिस्सा होगा और सार्वजनिक व निजी दोनों क्षेत्रों के लिए अनुसंधान, अनुप्रयोग विकास और व्यावसायिक उपयोग हेतु उपलब्ध रहेगा।
दोनों नेताओं ने गुजरात के गिफ्ट सिटी में अबू धाबी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के कार्यालय की स्थापना का भी स्वागत किया।
क्राउन प्रिंस ने एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने अगले एआई समिट की मेजबानी के लिए स्विट्जरलैंड और उसके बाद यूएई की पहल का स्वागत किया।
पीएमओ ने कहा कि इस यात्रा ने भारत और यूएई के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद की परंपरा को दोहराया है और एआई व उन्नत तकनीकों को द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए तकनीकी साझेदारी को और मजबूत किया है।
--आईएएनएस
डीएससी
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अमेरिका की बढ़ती सैन्य ताकत के बीच आ गया ईराना का बड़ा बयान, ट्रंप को दे दी ये सलाह
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हालात बिगड़ने की स्थिति में अमेरिका सैन्य विकल्प अपना सकता है. इसी बीच रूस ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है.
मॉस्को में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि क्षेत्र में तनाव 'अभूतपूर्व स्तर' पर है, लेकिन राजनीतिक और राजनयिक रास्ता अभी भी खुला है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस ईरान के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाता रहेगा, पर साथ ही सभी पक्षों से विवेक और धैर्य की अपेक्षा करता है.
संयुक्त नौसैनिक अभ्यास पर सफाई
तनाव के बीच रूस और ईरान द्वारा हाल ही में किए गए संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों को लेकर भी चर्चा तेज है. पेस्कोव ने कहा कि ये अभ्यास पहले से तय थे और इनका मौजूदा घटनाक्रम से सीधा संबंध नहीं है. रूस का कहना है कि वह किसी भी संघर्ष की बजाय बातचीत के जरिए समाधान का पक्षधर है.
ट्रंप की मांगें और परमाणु वार्ता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु वार्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है. बताया जा रहा है कि यदि ईरान उनकी शर्तों को लगातार खारिज करता रहा तो सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है. हालांकि अभी तक किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है.
सूत्रों के अनुसार, व्हाइट हाउस को जानकारी दी गई है कि अमेरिकी सेना संभावित अभियान के लिए तैयार स्थिति में है और राष्ट्रपति अपने सलाहकारों से लगातार चर्चा कर रहे हैं.
क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अतिरिक्त लड़ाकू विमान, विमानवाहक पोत और सैन्य संसाधन क्षेत्र में पहुंचाए गए हैं. यह तैनाती सामान्य रूटीन से अलग मानी जा रही है और इसे संभावित सैन्य दबाव रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी सैन्य तैयारी संकेत देती है कि अमेरिका सभी विकल्प खुले रखे हुए है.
90 प्रतिशत तक कार्रवाई की अटकलें
कुछ विश्लेषकों ने सैन्य कार्रवाई की संभावना को 90 प्रतिशत तक बताया है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर ऐसी किसी पुष्टि से बचा जा रहा है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति तनाव को कम कर पाएगी या पश्चिम एशिया एक बड़े टकराव की ओर बढ़ रहा है.
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