हैकर समूह का एसबीआई से संबंधित गोपनीय ग्राहक जानकारी प्राप्त करने का दावा
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीरियसिम नाम से सक्रिय एक अज्ञात हैकर समूह ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से संबंधित गोपनीय ग्राहक जानकारी प्राप्त करने का दावा किया है। इसमें व्यक्तिगत विवरण, ऋण आवेदन और खाता खोलने जैसे दस्तावेज शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा निगरानी खाते साइबरपल्स 56 ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस दावे को उजागर किया।
पोस्ट के अनुसार, समूह के पास कथित तौर पर देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता से संबंधित सीएसवी प्रारूप में 3.75 लाख डेटा प्रविष्टियां और 2,722 पीडीएफ दस्तावेज हैं।
कथित तौर पर लीक हुए डेटासेट में ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी, आवासीय पते, ऋण आवेदन, सहायक दस्तावेज और आवेदन से संबंधित अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं। साइबरपल्स56 ने 16 अक्टूबर को सबसे पहले इस दावे की रिपोर्ट करते हुए बताया कि सिरियसिम ने इस सामग्री को डेटासेट के अपने पहले खुलासे के रूप में प्रस्तुत किया था।
हालांकि, कथित डेटा लीक की प्रामाणिकता और स्रोत की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। रिपोर्ट की गई प्रविष्टियों की संख्या से यह भी स्पष्ट नहीं होता कि कितने व्यक्तिगत ग्राहक प्रभावित हुए होंगे, क्योंकि कई रिकॉर्ड एक ही व्यक्ति से संबंधित हो सकते हैं।
इस बात की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि एसबीआई के सिस्टम में सेंध लगाई गई थी या दस्तावेज सीधे बैंक से आए थे। इकोनॉमिक टाइम्स ने 20 अक्टूबर को रिपोर्ट किया कि प्रकाशन के समय तक एसबीआई ने टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया था।
साइबरपल्स56 ने चेतावनी दी कि यदि डेटासेट प्रामाणिक साबित होते हैं तो जानकारी का दुरुपयोग पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी, लक्षित फिशिंग हमलों और फर्जी ऋण आवेदनों के लिए किया जा सकता है।
यह आरोप भारत के वित्तीय क्षेत्र को प्रभावित करने वाले साइबर सुरक्षा जोखिमों को लेकर व्यापक चिंताओं के बीच आया है। हालांकि, केवल इस दावे से यह साबित नहीं होता कि एसबीआई के सिस्टम में सेंधमारी हुई है, क्योंकि एसबीआई ने अभी तक हैकर के दावों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
इस बीच, इस साल की शुरुआत में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल खतरों के खिलाफ बैंकिंग प्रणाली की मजबूती बढ़ाने के व्यापक प्रयासों के तहत वाणिज्यिक बैंकों के लिए साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं को बढ़ा दिया है।
--आईएएनएस
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US-India Trade Deal: भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते में आया बड़ा अपडेट, जानें दोनों देशों के बीच कब तक हो सकती है डील?
US-India Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच, लंबे वक्त से अटके द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को मुंबई में कहा कि दोनों देश ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं. समझौते से जुड़े कुछ मुद्दों का सुलझना ही अब बाकी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस बारे में अच्छी खबर सामने आ सकती है.
एस. जयशंकर से मिले मार्को रुबियो
भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की. बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री सर्जियो गोर और भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे. बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, ऊर्जा सहयोग, निवेश और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं. रुबियो ने कहा कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों पक्षों की बीच बातचीत आगे बढ़ रही है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है. समझौते ही औपचारिक घोषणा और हस्ताक्षर होने तक इसे अंतिम रूप से संपन्न नहीं माना जा सकता है.
रूस से तेल खरीद और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में ऊर्जा का मुद्दा भी अहम बना हुआ है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से कच्चा तेल खरीदता है, जिनमें रूस भी शामिल है. रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की नीतियों और संभावित टैरिफ संबंधी कदमों ने पिछले समय में द्विपक्षीय बातचीत को प्रभावित किया था.
रुबियो ने कहा कि हर देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों, भौगोलिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसले लेने पड़ते हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों के बीच संतुलन बनाना अमेरिका के लिए भी महत्वपूर्ण है.
वेनेजुएला के तेल में भारत की भूमिका
रुबियो ने वेनेजुएला के तेल उत्पादन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के संदर्भ में भारत की रिफाइनिंग क्षमता की भी सराहना की. उनके अनुसार, भारत के पास भारी कच्चे तेल को परिष्कृत करने की मजबूत क्षमता है और वह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
हालांकि, वेनेजुएला के तेल से जुड़े संभावित सहयोग में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से संबंधित बाधाओं को ध्यान में रखना होगा. तेल उत्पादन में बढ़ोतरी से बाजार में आपूर्ति बेहतर हो सकती है, लेकिन इससे वैश्विक कमी पूरी तरह समाप्त होने की गारंटी नहीं है.
ट्रेड डील से कारोबार को मिल सकती है नई दिशा
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच बेहतर करना है. भारत ने अपने निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धी टैरिफ दरों और व्यापारिक स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया है.
अब दोनों देशों के बीच शेष मुद्दों पर सहमति और समझौते की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी. यदि बातचीत तय दिशा में आगे बढ़ती है, तो ट्रेड डील से निवेश, निर्यात और आर्थिक सहयोग को नई गति मिल सकती है. फिलहाल, रुबियो के बयान ने समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ाई हैं, लेकिन अंतिम नतीजा दोनों सरकारों की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा.
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