पाकिस्तान-ईरान में फंसे अफगान पत्रकारों के हालात बिगड़े, वीजा में तेजी की मांग की
काबुल, 19 फरवरी (आईएएनएस)। अफगानिस्तान मीडिया सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (एएमएसओ) ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान और ईरान में फंसे अफगान पत्रकार मानवीय वीजा का इंतजार करते हुए बदतर हालात का सामना कर रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा खतरों के कारण अफगानिस्तान छोड़ने वाले कई पत्रकार अब मेजबान देशों से निष्कासन (डिपोर्टेशन) के जोखिम में हैं, जबकि उनका पुनर्वास लंबित है।
अफगानिस्तान की प्रमुख समाचार एजेंसी खामा प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एएमएसओ ने कहा कि लंबी प्रशासनिक देरी और वीजा प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा न होने से पत्रकारों की मानसिक और शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। संगठन ने विशेष रूप से ब्राजील के अधिकारियों और राजनयिक मिशनों से अपील की है कि वे मानवीय वीजा आवेदनों पर तुरंत कार्रवाई करें और पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराएं।
कई अफगान पत्रकार, जो तालिबान शासन के बाद देश छोड़कर भागे थे, पड़ोसी देशों पाकिस्तान और ईरान में रह रहे हैं, जहां उनकी कानूनी स्थिति और आजीविका दोनों अनिश्चित बनी हुई हैं। एएमएसओ और अंतरराष्ट्रीय अधिकार संगठनों का कहना है कि शीघ्र पुनर्वास ही उन्हें विदेशों में जारी असुरक्षा और कानूनी जोखिमों से बचा सकता है।
2 फरवरी को एएमएसओ ने जानकारी दी थी कि पिछले दो सप्ताह में पाकिस्तान पुलिस ने पांच अफगान पत्रकारों को हिरासत में लिया। संगठन के अनुसार, पत्रकार समीम फोरूघ फैजी और कैमरामैन अताउल्लाह शिरजाद को भी हिरासत में लिया गया था, जबकि अन्य ने सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन एएमएसओ ने कहा कि मनमानी हिरासत और असुरक्षा अब भी पाकिस्तान में रह रहे अफगान पत्रकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान में कई अफगान शरणार्थियों के वीजा का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है, जिससे पत्रकारों और उनके परिवारों के सामने अस्थिरता और कानूनी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
मानवाधिकार समूहों ने भी चेतावनी दी है कि बढ़ती निर्वासन कार्रवाइयों और कड़े आव्रजन नियमों के कारण विदेशों में सुरक्षा और पुनर्वास की तलाश कर रहे अफगान पत्रकारों की स्थिति और खराब हुई है। एएमएसओ ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे पाकिस्तान में कानूनी और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे अफगान पत्रकारों के समर्थन में आगे आएं।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एआई समिट में मैक्रों का छलका भारत प्रेम, कैमरे पर बोले- 'मुझे आपके देश से प्यार'
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत दौरे पर हैं। गुरुवार को इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने भारत मंडपम पहुंचे। उद्घाटन समारोह में शामिल हुए फिर इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो का दौरा भी किया। इस दौरान जैसे ही आईएएनएस का कैमरा देखा तपाक से पास आ बोले- आई लव योर कंट्री (मुझे आपके देश से प्यार है)।
इस दौरे के दौरान ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब मैक्रों ने भारत प्रेम का इजहार खुलकर किया हो। उनके अंदाज में कई बार इसकी झलक दिखी है। मुंबई से जब बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे तो एयरपोर्ट पर लोक कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुति दी। रिमझिम बरसती बूंदों के बीच खड़े होकर फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष ने कलाकारों का हाथ जोड़कर आभार जताया। इससे पहले मुंबई में जॉगिंग करते हुए भी आम लोगों का अभिवादन स्वीकार करते दिखे थे।
भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने संबोधन की शुरुआत नमस्ते से और अंत जय हो के साथ की।
उन्होंने मंच से भारत के डिजिटल मॉडल की खुलकर तारीफ की और कहा कि भारत ने जो किया है, वह दुनिया में किसी और ने नहीं किया। मैक्रों ने स्ट्रीट वेंडर की कहानी के जरिए भारत की संस्कृति और मिट्टी से जुड़ाव की नजीर पेश की। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले मुंबई का एक स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता भी नहीं खोल सकता था; न उसके पास पता था, न दस्तावेज और न पहचान थी। लेकिन आज वही वेंडर अपने फोन पर पूरे देश में किसी से भी तुरंत और मुफ्त डिजिटल पेमेंट ले रहा है। उन्होंने कहा, “ये सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, सभ्यता की कहानी है।”
तीन दिवसीय यात्रा पर आए मैक्रों ने एआई समिट में भारत के साथ अपने रिश्तों और देश के बढ़ते कद की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, पिछले एक साल में एआई स्ट्रेटेजिक कॉम्पिटिशन का फील्ड बन गया है, लेकिन इनोवेशन, आत्मनिर्भरता और स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी पर फोकस करने वाला एक रास्ता अभी भी बना हुआ है। भारत ने छोटे, टास्क स्पेसिफिक लैंग्वेज मॉडल विकसित करके और स्टार्टअप्स का समर्थन करने के लिए सस्ती दरों पर 38,000 सरकारी फंडेड जीपीयूएस लगाकर सॉवरेन चॉइस बनाई हैं।
आखिर में मैक्रों ने कहा, मैंने मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर की कहानी से शुरुआत की थी। दस साल पहले, दुनिया ने भारत से कहा था कि 1.4 बिलियन लोगों को डिजिटल इकॉनमी में नहीं लाया जा सकता। भारत ने उन्हें गलत साबित कर दिया।
बता दें, भारत और फ्रांस साल 2026 को भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर के रूप में मना रहे हैं। यह एक साल तक चलने वाली संयुक्त पहल है, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच नई तकनीक, शोध और औद्योगिक नवाचार में सहयोग बढ़ाना है। इस इनोवेशन ईयर का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर है। भारत और फ्रांस मिलकर एक साझा एआई रोडमैप पर काम कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य जिम्मेदार और एथिकल एआई सिस्टम विकसित करना है।
--आईएएनएस
के आर/
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