दिल्ली में सरकार का एक साल पूरा, अब लोगों को “याद आ रहे केजरीवाल” के पोस्टर
दिल्ली की सियासत एक साल में काफी बदल चुकी है. यह अब दिखने लगा है. हाल ही में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि राजधानी की जमीनी हकीकत की तरफ इशारा था कि दिल्ली को एक साल में ही केजरीवाल याद आ रहे हैं. सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह वही दिल्ली है, जिसने 2025 से पहले आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी के क्षेत्र में बदलाव का मॉडल देखा था. मोहल्ला क्लीनिक गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सहारा थे. सरकारी स्कूलों के रिजल्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर की चर्चा देश-विदेश तक होती थी. बिजली के बिल कम आए, पानी की सप्लाई बेहतर हुई. आम आदमी को लगा कि सरकार उसके दरवाजे तक आई है.
सीधे जनता की भावना से जुड़ता है
अब एक वर्ष में हालात बदल गए हैं. शहर में होर्डिंग लगे, “एक साल, दिल्ली बेहाल, याद आ रहे केजरीवाल” तो उनमें किसी का फोटो नहीं था, न ही पीएम नरेंद्र मोदी का. सिर्फ एक संदेश था, जो सीधे जनता की भावना से जुड़ता है. सवाल यह है कि अगर सब कुछ ठीक है तो फिर नाम से डर कैसा?
शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं
आज दिल्ली की गलियों में लोग पूछ रहे हैं, मोहल्ला क्लीनिक क्यों बंद या सुस्त पड़े हैं? सरकारी अस्पतालों में लाइनें लंबी क्यों हो गईं? स्कूलों में वही ऊर्जा और सुधार क्यों नहीं दिख रहा? सड़कों पर जाम अब सामान्य बात बन चुका है. प्रदूषण का स्तर कम होने के बजाय कई बार और बढ़ जाता है. कई इलाकों से पानी न आने और सफाई व्यवस्था ढीली होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं.
फरवरी 2025 से पहले की सरकार में अरविंद केजरीवाल का नाम हर घर में एक ऐसे नेता के रूप में लिया जाता था, जिसने राजनीति की भाषा बदली. उन्होंने “वोट” के बदले “काम” की बात की. स्कूल ठीक हुए, क्लीनिक खुले, बिजली-पानी में राहत मिली. यही वजह है कि आज जब शहर में परेशानी बढ़ती दिखती है, तो लोगों को पुराना दौर याद आता है.
सड़क पर घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है
दिल्ली की जनता भावनाओं से ज्यादा अपने रोज़मर्रा के अनुभव से फैसला करती है. अगर सुबह घर में पानी नहीं आता, बच्चा सरकारी स्कूल में पहले जैसा माहौल नहीं पाता, क्लीनिक में डॉक्टर नहीं मिलता, सड़क पर घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है, तो नाराजगी स्वाभाविक है. यही नाराजगी अब होर्डिंग्स और चर्चाओं में झलक रही है. एक साल के शासन का मतलब सिर्फ सत्ता में बने रहना नहीं होता, बल्कि यह साबित करना होता है कि जनता का जीवन बेहतर हुआ. अगर राजधानी की तस्वीर में सुधार के बजाय अव्यवस्था दिखे, तो सवाल उठेंगे ही. और जब सवाल उठते हैं, तो तुलना भी होती है, उस दौर से, जब लोगों को लगता था कि सरकार उनके लिए काम कर रही है.
पीएम मोदी की बड़ी पहल, कानपुर में की भारत-फ्रांस एयरोनॉटिक्स स्किलिंग सेंटर की घोषणा
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कानपुर के राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान यानी नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआई) में एयरोनॉटिक्स और डिफेंस सेक्टर में कौशल विकास के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) स्थापित करने की घोषणा की।
यह केंद्र कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत फ्रांस सरकार के सहयोग से स्थापित किया जाएगा।
यह घोषणा भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष और संबंधित सहयोग पहलों के उद्घाटन के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में की गई। इसी अवसर पर एयरोनॉटिक्स के नए उत्कृष्टता केंद्र का भी ऐलान किया गया।
कानपुर में प्रस्तावित यह केंद्र एयरोनॉटिक्स, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ), एयरपोर्ट संचालन, रक्षा विनिर्माण और संबंधित क्षेत्रों में उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
इसे विश्व स्तरीय संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना है, जो भारत के एविएशन स्किलिंग इकोसिस्टम को मजबूत करेगा और देश के तेजी से बढ़ते एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों को समर्थन देगा।
कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पीएम-सेतु योजना भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के ढांचे को बदल रही है।
उन्होंने कहा कि कानपुर का यह केंद्र वैश्विक स्तर के कुशल एविएशन पेशेवरों की मजबूत शृंखला तैयार करेगा और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत कौशल विकास को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है और युवाओं को एयरोनॉटिक्स, डिफेंस और उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए तैयार किया जा रहा है।
पीएम-सेतु योजना के तहत इस केंद्र की स्थापना के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा फ्रांस सरकार के बीच एक आशय पत्र यानी लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) का आदान-प्रदान किया गया है।
यह कदम भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाता है और 2025 में कौशल विकास व व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद की अगली कड़ी है।
इस सहयोग के तहत संयुक्त रूप से पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे, प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे, समय-समय पर समीक्षा की जाएगी, आदान-प्रदान कार्यक्रम, भाषा प्रशिक्षण और संरचित मोबिलिटी व्यवस्था लागू की जाएगी।
दोनों देश एयरोनॉटिक्स, अंतरिक्ष और संबंधित क्षेत्रों में भी सहयोग करेंगे। आशय पत्र में दोनों सरकारों की प्रतिबद्धता दर्ज की गई है और इसके बाद विशिष्ट गतिविधियों को लेकर एक औपचारिक समझौता किया जाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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