पीएम मोदी की बड़ी पहल, कानपुर में की भारत-फ्रांस एयरोनॉटिक्स स्किलिंग सेंटर की घोषणा
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कानपुर के राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान यानी नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआई) में एयरोनॉटिक्स और डिफेंस सेक्टर में कौशल विकास के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) स्थापित करने की घोषणा की।
यह केंद्र कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत फ्रांस सरकार के सहयोग से स्थापित किया जाएगा।
यह घोषणा भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष और संबंधित सहयोग पहलों के उद्घाटन के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में की गई। इसी अवसर पर एयरोनॉटिक्स के नए उत्कृष्टता केंद्र का भी ऐलान किया गया।
कानपुर में प्रस्तावित यह केंद्र एयरोनॉटिक्स, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ), एयरपोर्ट संचालन, रक्षा विनिर्माण और संबंधित क्षेत्रों में उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
इसे विश्व स्तरीय संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना है, जो भारत के एविएशन स्किलिंग इकोसिस्टम को मजबूत करेगा और देश के तेजी से बढ़ते एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों को समर्थन देगा।
कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पीएम-सेतु योजना भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के ढांचे को बदल रही है।
उन्होंने कहा कि कानपुर का यह केंद्र वैश्विक स्तर के कुशल एविएशन पेशेवरों की मजबूत शृंखला तैयार करेगा और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत कौशल विकास को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है और युवाओं को एयरोनॉटिक्स, डिफेंस और उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए तैयार किया जा रहा है।
पीएम-सेतु योजना के तहत इस केंद्र की स्थापना के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा फ्रांस सरकार के बीच एक आशय पत्र यानी लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) का आदान-प्रदान किया गया है।
यह कदम भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाता है और 2025 में कौशल विकास व व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद की अगली कड़ी है।
इस सहयोग के तहत संयुक्त रूप से पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे, प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे, समय-समय पर समीक्षा की जाएगी, आदान-प्रदान कार्यक्रम, भाषा प्रशिक्षण और संरचित मोबिलिटी व्यवस्था लागू की जाएगी।
दोनों देश एयरोनॉटिक्स, अंतरिक्ष और संबंधित क्षेत्रों में भी सहयोग करेंगे। आशय पत्र में दोनों सरकारों की प्रतिबद्धता दर्ज की गई है और इसके बाद विशिष्ट गतिविधियों को लेकर एक औपचारिक समझौता किया जाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अब देशभर में होगा SIR, चुनाव आयोग ने बताया प्रक्रिया कब से होगी शुरू
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी व त्रुटिरहित बनाने के लिए देशव्यापी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है. आयोग के मुताबिक, इसी साल अप्रैल से यह अभियान पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. बता दें कि इससे पहले बिहार समेत 13 राज्यों में चुनाव आयोग की ओर से ये प्रक्रिया की जा चुकी है.
बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, जबकि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह काम फिलहाल जारी है. शेष राज्यों में अप्रैल से SIR की शुरुआत की जाएगी.
इन राज्यों में होगा SIR
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
झारखंड
महाराष्ट्र
कर्नाटक
आंध्र प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश
चंडीगढ़
जम्मू और कश्मीर
लद्दाख
मणिपुर
मेघालय
मिजोरम
नागालैंड
ओडिशा
पंजाब
उत्तराखंड
तेलंगाना
त्रिपुरा
सिक्किम
दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
क्या है SIR और क्यों जरूरी?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक विशेष अभियान है, जिसके तहत मतदाता सूची की गहन जांच की जाती है। इसमें मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट नामों को हटाया जाता है और पात्र नागरिकों को जोड़ा जाता है.
चुनाव आयोग का मानना है कि नियमित संशोधन के अलावा समय-समय पर गहन समीक्षा जरूरी है, ताकि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और विश्वसनीय बनी रहे. यह अभियान विशेष रूप से उन राज्यों में अहम माना जा रहा है जहां हाल के वर्षों में बड़ी जनसंख्या गतिशीलता या शहरीकरण हुआ है.
बिहार बना मॉडल राज्य
बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेटेड बताया जा रहा है. आयोग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया से हजारों डुप्लिकेट और अपात्र नाम हटाए गए, जबकि बड़ी संख्या में नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा गया. इसी मॉडल को आधार बनाकर अब अन्य राज्यों में भी अभियान को तेज किया जाएगा.
अप्रैल से राष्ट्रव्यापी विस्तार
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल से यह प्रक्रिया शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगी. इसके लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी नागरिकों को अपने विवरण की जांच और संशोधन का अवसर मिलेगा.
पारदर्शिता और भरोसे की दिशा में कदम
ECI का कहना है कि यह पहल आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है, ताकि मतदाता सूची में किसी तरह की गड़बड़ी या विवाद की गुंजाइश न रहे.
यह भी पढ़ें - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ग्लोबल सहमति बनाना बहुत जरूरी है: वैसिलियोस मिखाइल
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















