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एआई में मानवता को बेहतर बनाने की अपार क्षमता बस सही तरीके से किया जाए इस्तेमाल: यूएन चीफ गुटेरेस

नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस गुरुवार को इंडिया एआई-इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौतियों के बारे में चेतावनी दी। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि एआई को मानव क्षमता का स्थान न लेकर उसका पूरक बनना चाहिए।

एआई के खतरे को लेकर उन्होंने कहा, “हमें श्रमिकों में निवेश करना चाहिए, ताकि एआई इंसानी क्षमता को बढ़ाए, उसे रिप्लेस न करे।”

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के उद्घाटन पर उन्होंने एआई के विस्तार से आने वाली सामाजिक, आर्थिक और इकोलॉजिकल समस्याओं से निपटने की अपील की। उन्होंने कहा, “असली इम्पैक्ट का मतलब है ऐसी तकनीक जो जिंदगी को बेहतर बनाए और धरती की रक्षा करे। आइए डिफॉल्ट सेटिंग के तौर पर गरिमा के साथ सबके लिए एआई बनाएं।”

ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण पर असर के बारे में उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे एआई की एनर्जी और पानी की डिमांड बढ़ रही है, डाटा सेंटर्स और सप्लाई चेन को क्लीन पावर पर स्विच करना चाहिए न कि कमजोर समुदाय पर खर्च कर देना चाहिए।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि “एआई सभी के लिए सुरक्षित होना चाहिए।” इसके लिए लोगों को शोषण, हेरफेर और दुरुपयोग से बचाना जरूरी है।

बच्चों पर सोशल मीडिया के बुरे असर को लेकर जारी विवाद के बीच एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, “किसी भी बच्चे को अनियंत्रित एआई का परीक्षण विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।”

गुटेरेस ने कहा, एआई सभी का होना चाहिए। बिना निवेश के कई देश एआई के दौर से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने एआई पर एक ग्लोबल फंड की अपनी मांग दोहराई और कहा, हर जगह बेसिक कैपेसिटी बनाने के लिए स्किल्स, डाटा, सस्ती कंप्यूटिंग पावर और सबको साथ लेकर चलने वाले इकोसिस्टम।

उन्होंने एआई ग्लोबल फंडिंग के लिए इस बार 3 बिलियन डॉलर का लक्ष्य तय किया है और कहा कि 3 बिलियन डॉलर किसी एक टेक कंपनी के सालाना रेवेन्यू के एक फीसदी से भी कम है। उन्होंने कहा कि यह एआई विस्तार की एक छोटी सी कीमत है जिससे सभी को फायदा होता है, जिसमें एआई बनाने वाले बिजनेस भी शामिल हैं। सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट (जो सालाना रेवेन्यू में टेक कंपनियों में चौथे नंबर पर है) हर साल 305 बिलियन डॉलर कमाती है।

गुटेरेस ने कहा कि हालांकि एआई असमानता को गहरा कर सकता है, पूर्वाग्रह को बढ़ा सकता है और नुकसान को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन अगर सही तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए तो इसमें मानवता को बेहतर बनाने की अपार क्षमता है।

--आईएएनएस

केके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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एआई से बदलेगा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और शोध का भविष्य: सुनील मित्तल

नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। भारती ग्रुप के चेयरमैन सुनील मित्तल ने गुरुवार को कहा कि हेल्थकेयर, शिक्षा, गहन शोध और चिकित्सा विज्ञान जैसे क्षेत्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की ताकत से तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बोलते हुए मित्तल ने कहा कि एआई अब केवल एक तकनीकी ट्रेंड नहीं रहा, बल्कि यह उद्योगों में बदलाव का प्रमुख आधार बन चुका है।

उन्होंने बताया कि एआई कंपनियों के काम करने और सेवाएं देने के तरीके को बदल रहा है। उन्होंने कहा कि खासकर हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को एआई से बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि इससे कार्यक्षमता, नवाचार और सेवाओं तक पहुंच में सुधार होगा।

उन्होंने कहा कि भारती समूह के लिए एआई पहले से ही संचालन का अहम हिस्सा बन चुका है। कंपनी एआई का उपयोग ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने, मजबूत नेटवर्क तैयार करने और उन्हें अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए कर रही है। एआई की मदद से सेवा की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और आंतरिक प्रक्रियाएं भी अधिक तेज और स्मार्ट बन रही हैं।

मित्तल ने जोर देकर कहा कि एआई का प्रभाव सिर्फ एक या दो क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। मेडिकल रिसर्च से लेकर उन्नत वैज्ञानिक शोध तक, एआई भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कंपनियां जैसे-जैसे इस तकनीक को अपनाएंगी, नए विकास और नवाचार के अवसर खुलेंगे।

इससे पहले जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, एक्सपो में 300 से अधिक चुने हुए प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए जा रहे हैं, जिन्हें पीपल, प्लेनेट और प्रोग्रेस जैसे तीन प्रमुख विषयों के तहत रखा गया है।

इसके अलावा 600 से अधिक संभावनाशील स्टार्टअप्स भी इसमें भाग ले रहे हैं, जिनमें से कई वैश्विक स्तर पर उपयोगी समाधान विकसित कर रहे हैं। ये स्टार्टअप्स अपने ऐसे समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं जो पहले से ही वास्तविक दुनिया में लागू किए जा चुके हैं।

समिट के दौरान 500 से अधिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 3,250 से ज्यादा विशेषज्ञ वक्ता और पैनल सदस्य हिस्सा लेंगे।

इन सत्रों में विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभाव पर चर्चा की जाएगी और इस बात पर विचार किया जाएगा कि एआई का लाभ दुनिया के हर नागरिक तक कैसे पहुंचाया जाए।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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