WFP ने गाजा और वेस्ट बैंक में 7 लाख फलस्तीनियों की खाद्य सहायता रोकी
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी ने गंभीर वित्तीय संकट के कारण गाजा में पांच लाख और वेस्ट बैंक में दो लाख फलस्तीनियों को दी जाने वाली खाद्य सहायता में कटौती की है। एजेंसी के प्रमुख ने यह जानकारी दी। विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के कार्यवाहक प्रमुख कार्ल स्काऊ ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता देने की अपील की, ताकि एजेंसी खाद्य सहायता बहाल करने और अगले छह महीने तक गाजा तथा वेस्ट बैंक में गर्म भोजन एवं खाद्य पैकेट उपलब्ध कराने में सक्षम हो सके।
उन्होंने कहा कि धन की कमी के कारण इस महीने गाजा में खाद्य सहायता पाने वाले लोगों की संख्या 16 लाख से घटाकर 11 लाख और वेस्ट बैंक में चार लाख से घटाकर दो लाख कर दी गई है। दोनों फलस्तीनी क्षेत्रों का दौरा कर लौटे स्काऊ ने यरुशलम से वीडियो ब्रीफिंग के दौरान संयुक्त राष्ट्र के संवाददाताओं से कहा कि गाजा में जीवन अब भी ‘‘बेहद कठिन’’ और अविश्वसनीय रूप से खतरनाक है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की टीमों ने पिछले सप्ताह हर दिन लगभग 50 हमले दर्ज किए।
हालांकि, उन्होंने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम के बाद से ‘‘हम अकाल की स्थिति को पीछे करने में सक्षम रहे हैं।’’ डब्ल्यूएफपी के अनुसार, इसके बावजूद गाजा की अनुमानित 14 लाख आबादी, यानी कुल जनसंख्या के 67 प्रतिशत लोग अब भी ‘‘संकट के स्तर या उससे भी बदतर स्थिति में गंभीर खाद्य असुरक्षा’’ का सामना कर रहे हैं। इनमें करीब दो लाख लोगों को भुखमरी से बचाने के लिए तत्काल खाद्य सहायता की जरूरत है। स्काऊ ने कहा कि डब्ल्यूएफपी अब सबसे ज्यादा जरूरतमंद लोगों को खाद्य सहायता देने को प्राथमिकता देगा।
इनमें बीमार लोग, कुपोषण के जोखिम का सामना कर रहीं माताएं और बच्चे तथा उस ‘‘पीली रेखा’’ के निकट रहने वाले लोग शामिल हैं, जो इजराइली बलों की मौजूदगी वाले क्षेत्र और फलस्तीनियों के रहने के क्षेत्र को अलग करती है। मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब इजराइली सेना ने पिछले सप्ताह गाजा में खाद्य पदार्थों सहित वाणिज्यिक वस्तुओं की आपूर्ति रोक दी। हालांकि, उसने सोमवार को कहा कि वह गाजा में वाणिज्यिक ट्रकों के प्रवेश के समन्वय की प्रक्रिया फिर शुरू करेगी।
साथ ही चेतावनी दी कि व्यापारियों द्वारा हमास को कर देने की खबरें सामने आने पर उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। स्काऊ ने कहा कि वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों के निवासियों के बढ़ते हमलों ने पहले से मौजूद मानवाधिकार और संरक्षण संकट को ‘‘भूख के संकट’’ में बदल दिया है, क्योंकि पिछले तीन वर्षों में खाद्य असुरक्षा दोगुने से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि वहां अब करीब 10 लाख फलस्तीनियों को खाद्य सहायता की जरूरत है।
अपने दौरे के दौरान स्काऊ ने जले हुए जैतून के बाग, शिविर और गांव देखे। उन्होंने कहा, ‘‘फसल कटाई के इन शुरुआती दो सप्ताह में ही बस्ती के निवासियों के हमलों की संख्या पिछले पूरे साल के आंकड़े से अधिक हो गई है।’’ स्काऊ ने चेतावनी दी कि ‘‘जहां भूख होती है, वहां अस्थिरता आती है। खाद्य सुरक्षा अब ऐसी सीमा बन गई है, जिसे पार करने का जोखिम हम नहीं उठा सकते।’’
France Protests: फ्रांस में हिंसा के बाद सख्ती, पेरिस समेत 5 शहरों में लगा रात का कर्फ्यू
फ्रांस में बढ़ती महंगाई के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। पेरिस और देश के चार उत्तरी शहरों में सोमवार से रात के समय कुछ इलाकों में आने-जाने पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला तब लिया गया, जब प्रदर्शनकारियों ने पेरिस के मशहूर लूव्र म्यूजियम के प्रवेश द्वार को भी रोक दिया।
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार हालात को सामान्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर देश में आपातकाल लगाया जा सकता है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहा कि हिंसा के दौरान पुलिस के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया था।
चार शहरों में रात का कर्फ्यू
सरकार के अनुसार, लिली समेत चार उत्तरी शहरों में सोमवार और मंगलवार रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक कुछ इलाकों में कर्फ्यू रहेगा। इसका मकसद दुकानों और कारोबार को नुकसान से बचाना है।
पेरिस में भी सोमवार रात 9 बजे से कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। प्रदर्शन के आयोजकों ने अगले शनिवार को फिर से विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
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आधे मिलियन लोग सड़कों पर उतरे
शनिवार को पूरे फ्रांस में करीब 5 लाख लोगों ने बढ़ती महंगाई और रहने के बढ़ते खर्च के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह विरोध पिछले चार हफ्तों से चल रहा था। शुरुआत में छात्रों ने स्कूलों में बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था।
हालांकि, बाद में कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। नकाब पहने लोगों ने पुलिस पर हमला किया, सरकारी इमारतों में घुसकर तोड़फोड़ की और कई जगह आग लगा दी। दुकानों में लूटपाट हुई और कारों, साइकिलों और स्कूटरों में भी आग लगाई गई।
लूटे गए सामान की ऑनलाइन बिक्री पर रोक
हिंसा और लूटपाट के बाद फ्रांस की डिजिटल मंत्री ऐन ले हेनान्फ ने ऑनलाइन सामान बेचने वाली वेबसाइटों से चोरी का सामान बेचने वाले विज्ञापन हटाने को कहा है। इस मामले में Vinted और eBay जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है। अमेजन, लेबोनकॉइन, मेटा और टिकटॉक के प्रतिनिधियों को भी बैठक के लिए बुलाया गया है।
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2,500 से ज्यादा लोग गिरफ्तार
हिंसा के दौरान 2,500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। करीब 1,000 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के जवान घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों में भी कई लोग घायल हुए। एक प्रदर्शनकारी का हाथ पुलिस की भीड़ को रोकने वाली ग्रेनेड की चपेट में आने से उड़ गया।
शनिवार को करीब 60,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद कई जगहों पर हालात बिगड़ गए। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी सरकार की कार्रवाई में हुई कमियों को माना है।
3,000 से ज्यादा दुकानें प्रभावित
फ्रांस के छोटे कारोबारियों के मंत्री सर्ज पापिन के मुताबिक, देशभर में कम से कम 3,000 दुकानें प्रभावित हुई हैं। हिंसा और तोड़फोड़ से सैकड़ों मिलियन यूरो का नुकसान होने का अनुमान है।
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