भारत के ऑफिस रियल एस्टेट बाजार में जीसीसी के चलते बढ़ेगी मांग, योगदान 50 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद
मुंबई, 19 फरवरी (आईएएनएस)। देश के शीर्ष सात शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) की हिस्सेदारी भारतीय ऑफिस रियल एस्टेट की मांग में 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसमें अमेरिकी कंपनियों की ओर से मांग सबसे अधिक रहेगी। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।
कोलियर्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से भारत में जीसीसी देशों की लीजिंग गतिविधियों में अमेरिकी कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत रही है, जबकि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की कंपनियों की हिस्सेदारी 8-10 प्रतिशत रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ वर्षों में जीसीसी देशों द्वारा ग्रेड ए ऑफिस स्पेस की वार्षिक मांग 35-40 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच सकती है, जो कुल ऑफिस स्पेस की मांग का 40-50 प्रतिशत होगी।
कोलियर्स इंडिया के ऑफिस सर्विसेज के प्रबंध निदेशक अर्पित मेहरोत्रा ने कहा,अमेरिकी कंपनियों से टेक केंद्रित जीसीसी की मांग स्थिर हो सकती है, लेकिन हम यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की कंपनियों से, विशेष रूप से इंजीनियरिंग और विनिर्माण, बीएफएसआई और परामर्श क्षेत्रों में मांग बढ़ने की उम्मीद करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ चल रहे व्यापार समझौतों और शुल्क युक्तिकरण से टेक्नोलॉजी, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, इंजीनियरिंग और विनिर्माण तथा परामर्श क्षेत्रों में दीर्घकालिक कार्यालय स्थान की मांग बढ़ने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से देश में कुल 310 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की मांग में से लगभग 117 मिलियन वर्ग फुट यानी 38 प्रतिशत की हिस्सेदारी जीसीसी की रही है। जीसीसी की ओर से मांग में लगातार वृद्धि इस बात से स्पष्ट है कि 2020 में मांग लगभग 16 मिलियन वर्ग फुट से बढ़कर 2025 तक लगभग 30 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गई है।
कोलियर्स इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नादर ने कहा, “जीसीसी देश भारत में ऑफिस स्पेस की मांग को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे, जिससे किराएदारों के आधार में लगातार हो रही वृद्धि और विविधता को समर्थन मिलेगा।”
नादर ने कहा कि वैश्विक व्यापारिक तनाव अपेक्षाकृत कम हो गया है, और भारत तथा उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच हाल ही में हुए द्विपक्षीय समझौतों से भारतीय ऑफिस बाजार की प्रमुख मांग को गति मिलेगी।
रियल एस्टेट सेवा फर्म ने आगे कहा कि कुशल प्रतिभाओं की उपलब्धता और लागत में अंतर से भारत में क्षमता केंद्रों के विस्तार को और बढ़ावा मिलेगा।
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भारत ने वो बनाया जो किसी और ने नहीं किया, एआई समिट में मैक्रों ने शेयर की मुंबई के स्ट्रीट वेंडर की कहानी
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक दिलचस्प कहानी सुनाई। उन्होंने मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर का जिक्र कर भारत के डिजिटल बदलाव के बारे में सबको बताया। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति एक दशक पहले बैंक अकाउंट नहीं खोल पाता था, वह अब आसानी से ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करता है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत नमस्ते से की और अपने होस्ट का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, इस शानदार शहर और इस शानदार देश में हमारा स्वागत करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 2024 के अपने राजकीय दौरे के बाद आपके द्वारा होस्ट किए गए इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट के लिए वापस आना बहुत अच्छा लग रहा है।
इसके बाद मैक्रों ने भारत की टेक्नोलॉजी में हुई तरक्की को बताने के लिए एक किस्सा शेयर किया।
उन्होंने कहा, मैं एक कहानी से शुरू करना चाहता हूं। दस साल पहले, मुंबई में एक रेहड़ी वाला बैंक अकाउंट नहीं खोल सकता था, कोई पता नहीं, कोई कागजात नहीं, कोई एक्सेस नहीं। आज, वही वेंडर देश में किसी से भी अपने फोन पर तुरंत और मुफ्त में पेमेंट लेता है। यह सिर्फ एक टेक कहानी नहीं है। यह एक सिविलाइजेशन की कहानी है।
इमैनुएल मैक्रों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के स्केल पर जोर देते हुए कहा, भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो दुनिया के किसी और देश ने नहीं बनाया है। 140 करोड़ लोगों के लिए एक डिजिटल पहचान। एक पेमेंट सिस्टम जो अब हर महीने 20 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है और एक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर जिसने 500 मिलियन डिजिटल हेल्थ आईडी जारी किए हैं।
पिछले साल के संयुक्त पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, पिछले साल, जब फ्रांस और भारत ने पेरिस में एआई एक्शन समिट को-होस्ट किया था, तो हमने उन तकनीक के लिए एक ग्लोबल गाइडिंग प्रिंसिपल तय किया था जो हमारे समाज और हमारी अर्थव्यवस्था को बदल देंगी। हम कहते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी इंसानियत को तेजी से नवाचार करने, स्वास्थ्य सुविधा, एनर्जी, मोबिलिटी, एग्रीकल्चर और पब्लिक सर्विसेज में इंसानियत की भलाई के लिए बदलाव लाने में मदद करेगा। हम दोनों इस क्रांति में विश्वास करते हैं। एआई स्ट्रेटजिक कॉम्पिटिशन का एक बड़ा फील्ड बन गया है और बड़ी तकनीक और भी बड़ी हो गई हैं।
उन्होंने कहा, पिछले एक साल में एआई स्ट्रेटजिक कॉम्पिटिशन का फील्ड बन गया है, लेकिन इनोवेशन, आत्मनिर्भरता और स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी पर फोकस करने वाला एक रास्ता अभी भी बना हुआ है। भारत ने छोटे, टास्क-स्पेसिफिक लैंग्वेज मॉडल विकसित करके और स्टार्टअप्स का समर्थन करने के लिए सस्ती दरों पर 38,000 सरकारी फंडेड जीपीयूएस लगाकर सॉवरेन चॉइस बनाई हैं।
आखिर में मैक्रों ने कहा, मैंने मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर की कहानी से शुरुआत की थी। दस साल पहले, दुनिया ने भारत से कहा था कि 1.4 बिलियन लोगों को डिजिटल इकॉनमी में नहीं लाया जा सकता। भारत ने उन्हें गलत साबित कर दिया। आज कुछ लोग कहते हैं कि एआई एक ऐसा खेल है जिसे सिर्फ बड़े लोग ही खेल सकते हैं।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, भारत, फ्रांस, यूरोप और हमारे पार्टनर्स, जो हमारे तरीके में विश्वास करते हैं, कंपनियों, सरकारों और निवेशकों के साथ मिलकर एक अलग तरीका अपना सकते हैं। एआई का भविष्य वे लोग बनाएंगे जो इनोवेशन और जिम्मेदारी और तकनीक को इंसानियत के साथ जोड़ेंगे, और भारत और फ्रांस मिलकर इस भविष्य को बनाने में मदद करेंगे।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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