1947 में पाकिस्तान से आया परिवार, साथ आई अजरख की विरासत, आज विदेशों में गूंज रहा नाम
साल 1947 के देश विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आए राणमल खत्री अपने साथ अजरख की सदियों पुरानी कला भी लेकर आए. सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने इस पारंपरिक ब्लॉक प्रिंट कला को न केवल जीवित रखा बल्कि आधुनिक बाजार के अनुसार नए प्रयोग भी किए. प्राकृतिक रंगों और बारीक कारीगरी से तैयार अजरख उत्पाद आज यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों तक निर्यात हो रहे हैं. सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्होंने अपने व्यवसाय को वैश्विक पहचान दिलाई. आज उनका सालाना टर्नओवर 3-4 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है.
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