राफेल डील की आलोचना समझ से परे, इसमें भारतीय पुर्जे होंगे इस्तेमाल: मैक्रों (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। राफेल डील की आलोचना को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने समझ से परे बताते हुए दावा किया कि इससे लाभ निश्चित तौर पर भारत को ही होगा। इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में शिरकत कर रहे मैक्रों ने आईएएनएस के सवालों का जवाब देते हुए इस डील के फायदे गिनाए।
मैक्रों ने भारत-फ्रांस संबंधों को बहुत मजबूत और अहम बताया। उन्होंने कहा, हमारी साझेदारी केवल रणनीतिक नहीं है, बल्कि उससे एक कदम आगे बढ़कर मैं कहूंगी कि ये विशेष ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों गुरुवार को भारत मंडपम के मेन हॉल में हुए उद्घाटन समारोह का हिस्सा बने। उनके साथ संयुक्त राष्ट्र के महासचिव भी थे। इसके बाद उन्होंने इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो का दौरा किया। आईएएनएस से खास बात करते हुए उन्होंने आपसी सहयोग को दोनों देशों के लिए जरूरी बताया।
उन्होंने कहा, साफ है कि भारत के साथ सहयोग बेहतर हो रहा है, और हम सहयोग के एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं।
मैक्रों ने आगे कहा कि हम लगातार स्वदेशी कंपोनेंट्स बढ़ा रहे हैं। यह कंपनी और आपकी सरकार के बीच चल रही बातचीत का हिस्सा है।
मैक्रों से जब राफेल को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता कि लोग इसकी आलोचना क्यों करते हैं? इससे आपके देश को मजबूती मिलेगी, हमारे स्ट्रेटजिक रिश्ते और गहरे होंगे, और भारत में रोजगार का सृजन होगा।
भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग की सराहना करते हुए मैक्रों ने कहा, हम इस बात के लिए बेहद प्रतिबद्ध हैं कि अधिकतम मेड इन इंडिया, यानी भारतीय पुर्जों का इस्तेमाल हो और अधिक से अधिक महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण भारत में ही किया जाए। यही तर्क टाटा-एयरबस डील के पीछे भी था, इसलिए हम राफेल के मामले में भी यही करेंगे। आप हम पर भरोसा कर सकते हैं।
मैक्रों ने यह भी कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जून में फ्रांस आने का न्योता दिया है। मैक्रों ने आईएएनएस को बताया, “पीएम मोदी ब्रिक्स अध्यक्ष के तौर पर जी7 के विशिष्ट अतिथि होंगे।”
फ्रांस के प्रेसिडेंट ने कहा, “हमारी एक खास ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है, जो भारत और फ्रांस दोनों के लिए अद्भुत है। हम राफेल डील को बढ़ाना चाहते हैं। भारत ने कुछ दिन पहले 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है। हम इसे को-प्रोड्यूस करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने बताया, तो राफेल बिल्कुल जरूरी है। मुझे उम्मीद है कि हम पनडुब्बी पर भी ऐसा ही करेंगे।
हाल ही में कर्नाटक के वेमगल में एच-125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने वर्चुअल उद्घाटन किया था। यह परियोजना टाटा और एयरबस की साझेदारी में शुरू हुई, जो मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के साथ हजारों रोजगार पैदा करेगी।
--आईएएनएस
के आर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
जिनेवा में बैठक के बाद रूस पर भड़के जेलेंस्की, बोले- जंग को खत्म करने के लिए बकवास करने की जरूरत नहीं
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। जिनेवा में रूस और यूक्रेन के बीच बुधवार को बैठक हुई। इस बैठक के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की रूस पर आगबबूला हो गए। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें जंग खत्म करने के लिए किसी ऐतिहासिक बकवास की जरूरत नहीं है।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, मुझे इस जंग को खत्म करने और डिप्लोमेसी की तरफ बढ़ने के लिए हिस्टोरिकल बकवास की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह बस देर करने का तरीका है। मैंने पुतिन से कम हिस्ट्री की किताबें नहीं पढ़ी हैं और मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं उनके देश के बारे में उनसे ज्यादा जानता हूं जितना वे यूक्रेन के बारे में जानते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं रूस गया हूं, कई शहरों में, और मैं वहां बहुत से लोगों को जानता था। वे इतनी बार यूक्रेन कभी नहीं गए। वे सिर्फ बड़े शहरों में गए थे। मैं छोटे शहरों में गया, उत्तरी हिस्से से लेकर दक्षिणी हिस्से तक, हर जगह।
उन्होंने आगे कहा कि मैं उनकी सोच जानता हूं, इसीलिए मैं इन सब चीजों पर समय बर्बाद नहीं करना चाहता। यह उनके बारे में है। उन्होंने ऐसा सिस्टम बनाने का फैसला किया। रूसियों ने खुद को बदलने का फैसला किया।
जेलेंस्की ने कहा, हमारे खिलाफ एक बड़ी जंग छिड़ी हुई है। यह हमारी जिंदगी है। मैं उनसे बस यही बात करना चाहता हूं कि मुझे लगता है कि हमें इसे सबसे कामयाब तरीके से हल करने की जरूरत है। मेरा मतलब है कि इस जंग को जल्दी खत्म करना है, इसलिए मैं सिर्फ ऐसी चीजों के बारे में ही बात करना चाहता हूं।
वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा, मुझे पता है कि अमेरिकी और शायद कुछ यूरोपीय, रूस के साथ, नाटो और रूस के बीच एक नए डॉक्यूमेंट पर चर्चा कर रहे हैं। जब उनके पास ऐसा डॉक्यूमेंट होगा, तो वे हर चीज पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन मेरे लिए यह जरूरी है कि वे नाटो में हमारी संभावित जगह पर हमारे साथ चर्चा करें। सिर्फ रूसियों के साथ नहीं, हमारे साथ, क्योंकि यह हमारे बारे में है, लेकिन वे हमारे बिना भी ऐसा कर सकते हैं। हो सकता है कि हमें कुछ पता न हो। किसी भी हाल में अगर कोई हैरान होता है तो हम उस पर प्रतिक्रिया देंगे।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
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