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Explainer: कैसे तय होता है कि कौन बनेगा BCCI का चयनकर्ता? जानें सेलेक्टर्स के चुनाव का पूरा प्रोसेस और योग्यता के कड़े नियम

बीसीसीआई ने भारतीय टीम की सीनियर पुरुष चयन समिति में एक बड़ा बदलाव किया है. पूर्व स्पिनर रमेश पोवार को समिति में नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. जबकि प्रज्ञान ओझा को चीफ सेलेक्टर बनाया गया है. बीसीसीआई के नियमों के अनुसार, समिति का अध्यक्ष या चीफ सेलेक्टर वह बनता है जिसके पास सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का अनुभव हो. चूंकि वर्तमान समिति में पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा के पास सबसे ज्यादा 24 टेस्ट मैचों का अनुभव है, इसलिए वे टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर बनाए गए हैं और रमेश पोवार (2 टेस्ट मैच) समिति के सदस्य के रूप में काम करेंगे. अब सवाल उठता है कि टीम इंडिया के खिलाड़ियों और इन सेलेक्टर्स को चुनने की पूरी प्रक्रिया क्या होती है? आइए इसे आसान शब्दों में एक पूरे एक्सप्लेनर के जरिए समझते हैं.

1. कैसे चुने जाते हैं टीम इंडिया के सेलेक्टर्स?

टीम इंडिया का चयन करने से पहले उन अनुभवी लोगों को चुनना बेहद जरूरी होता है, जो किसी भी दबाव में आए बिना पूरी तरह से निष्पक्ष फैसला ले सकें. यही वजह है कि हर कोई भारतीय टीम का सेलेक्टर नहीं बन सकता और बीसीसीआई इसके लिए एक बेहद कड़ा तथा पारदर्शी प्रोसेस अपनाती है.

सेलेक्टर चुनने के लिए योग्यता के कड़े नियम

• टेस्ट मैच का अनुभव: खिलाड़ी ने भारत के लिए कम से कम सात टेस्ट मैच खेले हों, या
• फर्स्ट-क्लास मैच का अनुभव: कम से कम 30 फर्स्ट-क्लास (घरेलू) मैच खेले हों, या
• वनडे और घरेलू मैच का अनुभव: भारत के लिए कम से कम 10 वनडे इंटरनेशनल मैच और साथ ही 20 फर्स्ट-क्लास मैच खेले हों.

इसके अलावा ये 2 नियम भी है जरूरी

• 5 साल का गैप: उम्मीदवार को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट (अंतरराष्ट्रीय और घरेलू) से संन्यास लिए हुए कम से कम पांच साल पूरे हो चुके होने चाहिए.
• कमेटी का कार्यकाल: वह बीसीसीआई की किसी भी दूसरी क्रिकेट कमेटी का सदस्य कुल मिलाकर पांच साल से ज्यादा समय तक न रहा हो.

2. आवेदन और इंटरव्यू

जब भी चयन समिति में कोई पद खाली होता है, तो बीसीसीआई आधिकारिक तौर पर आवेदन मंगवाती है. इसके बाद एक खास कमेटी, जिसे क्रिकेट सलाहकार समिति कहा जाता है, सभी आवेदकों के इंटरव्यू लेती है. इस वक्त अशोक मल्होत्रा और जतिन परांजपे इस सीएसी के अध्यक्ष हैं. इसी सीएसी ने रमेश पोवार का इंटरव्यू लेकर उन्हें सर्वसम्मति से चुना.  

कैसे बनते हैं टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर? 

चयन समिति में कुल 5 सदस्य होते हैं, जो देश के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं. जब ये 5 चुन लिए जाते हैं, तो इनमें से जिस खिलाड़ी ने भारत के लिए सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले होते हैं, उसे नियम के मुताबिक खुद-ब-खुद समिति का अध्यक्ष यानी चीफ सेलेक्टर बना दिया जाता है. यही वजह है कि 24 टेस्ट खेलने वाले प्रज्ञान ओझा चीफ सेलेक्टर बने हैं. 

इस वक्त पांच सिलेक्टर्स की टीम इस प्रकार है:

1. प्रज्ञान ओझा (अध्यक्ष / चीफ सेलेक्टर - साउथ जोन)
2. रमेश पोवार (सदस्य - वेस्ट जोन)
3. शिव सुंदर दास (सदस्य - ईस्ट जोन)
4. आरपी सिंह (सदस्य - सेंट्रल ज़ोन)
5. अजय रात्रा (सदस्य - नॉर्थ जोन)

साल 2000 से अब तक टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर्स की लिस्ट 

• 2026 से वर्तमान: प्रज्ञान ओझा*
• 2023 से 2026 तक: अजीत अगरकर
• 2020 से 2023 तक: चेतन शर्मा
• 2020 में: सुनील जोशी
• 2016 से 2020 तक: एमएसके प्रसाद
• 2012 से 2016 तक: संदीप पाटिल
• 2008 से 2012 तक: कृष श्रीकांत
• 2006 से 2008 तक: दिलीप वेंगसरकर
• 2004 से 2006 तक: किरण मोरे
• 2002 से 2004 तक: सैयद किरमानी
• 2000 से 2002 तक: चंदू बोर्डे

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क्या होता है चयन समिति का काम? 

बीसीसीआई की पांच सदस्यीय चयन समिति का मुख्य काम भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम (टेस्ट, वनडे और टी20) के लिए सबसे मजबूत 15 या 16 खिलाड़ियों का निष्पक्ष चयन करना होता है. इसके लिए सेलेक्टर्स साल भर देश के बड़े घरेलू टूर्नामेंट्स जैसे रणजी ट्रॉफी और आईपीएल के मैचों को लाइव देखने मैदान पर जाते हैं, ताकि प्रतिभावान खिलाड़ियों पर नजर रख सकें. मुख्य टीम चुनने के अलावा, ये सेलेक्टर्स कप्तान और उप-कप्तान की नियुक्ति करते हैं और 'इंडिया-ए' जैसी जूनियर टीमें तैयार करते हैं, ताकि भविष्य के लिए मजबूत बैकअप हमेशा तैयार रहे.

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क्या होता है चीफ सेलेक्टर का काम? 

चयन समिति के अध्यक्ष यानी चीफ सेलेक्टर के पास कुछ विशेष और अतिरिक्त अधिकार होते हैं, जिसमें सबसे प्रमुख काम टीम इंडिया के कप्तान और हेड कोच के साथ आधिकारिक चयन बैठकों का नेतृत्व करना है. जब भी किसी खिलाड़ी के चयन को लेकर सेलेक्टर्स के बीच असहमति होती है, तो चीफ सेलेक्टर के पास निर्णायक वोट देने का अधिकार होता है, जिससे अंतिम फैसला तय होता है. इसके साथ ही, टीम की घोषणा करने के बाद किसी खिलाड़ी को शामिल करने या बाहर करने की रणनीतिक वजह मीडिया और क्रिकेट फैंस को समझाना भी चीफ सेलेक्टर की ही जिम्मेदारी होती है. अब देखने वाली बात होगी कि इन सेलेक्शन कमेटी के मार्गदर्शन में टीम इंडिया का कैसा प्रदर्शन रहता है.

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Uncovered With Manoj Gairola: मोदी के दुश्मन बने Elon Musk? ये है असली कहानी...

रूस और यूक्रेन की जंग में एक बड़ी इंट्रस्टिंग बात हुई है.  यूक्रेन के ड्रोन्स रूस की ऑयल फैसिलिटीज पर अटैक करने जा रहे थे. लेकिन जैसे ही इनकी स्पीड 100 Km/h की हुई, वैसे ही इन्होंने काम करना बंद कर दिया. और इसके पीछे हाथ था  Elon Musk का. उन्होंने ऐन वक्त पर यूक्रेन में स्टारलिंक का कनेक्शन काट दिया. और साथ ही दुनिया को दिखा दिया कि जो भी देश Elon Musk के स्टारलिंक के भरोसे रहेगा उसका ये ही हाल होगा. और ये बात भारत के NSA अजीत डोभाल को भी बखूबी पता है, इसीलिए उन्होंने अब तक स्टारलिंक का सिक्योरिटी क्लीयरेंस नहीं होने दिया. हम आपको बता दें कि यूक्रेन वाले incident से ठीक एक दिन पहले तक Elon Musk हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ tweet कर के अपना frustration निकाल रहे थे. वो पिछले 2 साल से भारत में Starlink की सर्विस लॉन्च ही नहीं कर पाए, क्योंकि उन्हें लाइसेंस तो मिल गया, लेकिन  इंटेलीजेंस एजेंसियों ने security clearance नहीं दिया. 

सिक्योरिटी क्लीयरंस नहीं दे रही सरकार

नमस्कार..मैं हूं मनोज गैरोला, आप देखना शुरू कर चुके हैं अनकवर्ड...आज के एपिसोड में हम बात करेंगे. Elon Musk और उनके Satelite इंटरनेट स्टारलिंक की. आपको बताएंगे कि स्टारलिंक भारत के लिए कितना खतरनाक है?  और भारत सरकार क्यों इसे सिक्योरिटी क्लीयरंस नहीं दे रही है?

सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिरकार स्टारलिंक काम कैसे करता है. अंतरिक्ष में इस वक्त स्टारलिंक के 11 हजार से ज्यादा सैटेलाइट एक्टिव हैं. इनके जरिए स्टारलिंक इंटरनेट सर्विस देता है. और ये दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट फोन सर्विस प्रोवाइडर है. लेकिन भारत में अभी तक इसकी एंट्री नहीं हो सकी है. हमारी सरकार अपने देश की सुरक्षा किसी विदेशी कंपनी के हाथ नहीं सौंप सकती है. 

यूक्रेन के ड्रोन हमले को फेल कर दिए 

अब आपको बताते हैं कि वो क्या कारण हैं जिनकी वजह से स्टारलिंक को सिक्योरिटी क्लीयरेंस नहीं मिला? इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इसका टोटल कंट्रोल अमेरिका के हाथ में हैं. वो जब चाहे इसे बंद कर सकता है या इसकी स्पीड कम कर सकता है. जैसा कि हमने आपको बताया कि कैसे Elon Musk ने अमेरिका में बैठे-बैठे यूक्रेन के ड्रोन हमले को फेल कर दिया. इसकी वजह ये थी कि राष्ट्रपति ट्रंप नहीं चाहते थे कि यूक्रेन रूस की ऑयल फैसिलिटीज पर हमला करे. क्योंकि वो पुतिन के साथ ऑयल डील कर चुके हैं. मतलब ये कि अपने फायदे के लिए अमेरिका ने स्टारलिंक का इस्तेमाल करके यूक्रेन का हमला  नाकाम कर दिया. यूक्रेन के साथ ऐसी हरकत अमेरिका पहले भी कर चुका है. 

जरा सोचिए..यूक्रेन की तरह अगर भारत के ड्रोन पाकिस्तान में हमला करने जा रहे हों और उनका इंटरनेट कनेक्शन कट जाए..तो क्या हो? जाहिर है भारत की सुरक्षा किसी विदेशी कंपनी के हाथों में नहीं दी जा सकती. वैसे तो स्टारलिंक को मिले लाइसेंस की शर्त में ये बात शामिल है कि उसे अपना गेटवे भारत में ही लगाना होगा. लेकिन फिर भी उसका मास्टर गेटवे अमेरिका में ही होगा. इमरजेंस के वक्त अगर भारत सरकार इंडिया के गेटवे को कंट्रोल भी कर ले, तो भी Elon Musk सिर्फ एक स्वीच दबाकर भारत की सर्विस रोक सकते हैं. 

प्रोटेस्ट और भड़क गए

लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नहीं है, इसका खतरा और भी है...आपको याद होगा कि ईरान में साल की शुरुआत में सत्ता विरोधी प्रदर्शन हुए थे. ईरान ने इन्हें रोकने के लिए इंटरनेट पूरी तरह से बंद कर दिया था. लेकिन Elon Musk ने तस्करी के जरिए अपने फोन हजारों की संख्या में ईरान पहुंचाए और बिना परमीशन के ही इंटरनेट सर्विस शुरू कर दी. इससे सरकार के खिलाफ हो रहे प्रोटेस्ट और भड़क गए.
 
अब जरा सोचिए...कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई बार सरकार किसी खास इलाके में इंटरनेट सर्विस रोक देती है. जैसा कि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए प्रोटेस्ट के दौरान हुआ. लेकिन अगर कभी देश के कई हिस्सों में अराजकतावादी प्रोटेस्ट शुरू हो जाएं और सरकार को इंटरनेट बंद करना पड़े तब भी Elon Musk का इंटरनेट जारी रह सकता है. क्योंकि इसका पूरा कंट्रोल अमेरिका में ही है, और मस्क भारत सरकार का आदेश मानने से इनकार भी कर सकते हैं. 

भारत को इसकी हवा भी नहीं लगेगी

मोबाइल इंटरनेट के जरिए जो भी डेटा ट्रांसफर होता है उसका कंट्रोल भारत के पास भी होता है. लेकिन सैटेलाइट इंटरनेट से जो डेटा ट्रांसफर होगा, उसे अगर स्टारलिंक चाहे तो उसे भारत में मौजूद गेटवे के साथ-साथ बाहर भी भेज सकता है. और भारत को इसकी हवा भी नहीं लगेगी.  ये कुछ ऐसे सिक्योरिटी कंसर्न्स हैं जो भारत की सुरक्षा के लिए बहुत भारी पड़ सकते हैं. आपको याद होगा कि मणिपुर में भी स्टारलिंक के सैटेलाइट फोन के इस्तेमाल की खबरें आई थीं. म्यांमार में चल रही सिविल वॉर में तो स्टारलिंक की सर्विसेज का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है. यानी जिस देश में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए अराजकता फैलाना चाहती है वहां-वहां स्टारलिंक के नेटवर्क का इस्तेमाल होता है.    

अब आपको एक और इंट्रस्टिंग बात बताते हैं...वो बात ये है कि स्टारलिंक का सबसे बड़ा क्लाइंट पेंटागन हैं. पेंटागन यानी अमेरिका का रक्षा मंत्रालय. यानी स्टारलिंक को खड़ा करने में अमेरिका के रक्षा मंत्रालय का पैसा लगा हुआ है. साथ स्टारलिंक पेंटागन के लिए बहुत बड़ा सैटेलाइट स्पाई नेटवर्क भी खड़ा कर रहा है. यही कारण है कि अमेरिकी सरकार टैरिफ की धमकी देकर कई देशों में स्टारलिंक की एंट्री करवा चुकी है. 
 
जाहिर है स्टारलिंक को भारत में ऑपरेट करने के लिए सिक्योरिटी क्लीयरेंस तभी मिलेगा जब वो सरकार को संतुष्ट कर सके कि वो देश के लिए खतरा नहीं है. लेकिन Elon Musk और अमेरिका की एक्टिविटीज से तो यही जाहिर हो रहा है कि भारत में स्टारलिंक की सर्विस शुरू होने के चांस बेहद कम हैं.

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  Sports

WPL 2027 Auction कोच्चि में 28 अक्टूबर को, Sophia Dunkley और Sophie Molineux की बेस प्राइस 50 लाख

महिला प्रीमियर लीग 2027 की नीलामी से पहले खिलाड़ियों की सूची सामने आ गई है। इस बार इंग्लैंड की सोफिया डंकली और ऑस्ट्रेलिया की सोफी मोलिन्यू ने सबसे ऊंची आधार कीमत 50 लाख रुपये रखी है। वहीं, जी कमालिनी, किरण नवगिरे, हीदर ग्राहम और जेस जोनासन ने 40 लाख रुपये की आधार कीमत के साथ अपना नाम दर्ज कराया है। खिलाड़ियों को खरीदने के लिए सभी 5 टीमों के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है।

महिला प्रीमियर लीग की नीलामी 28 अक्टूबर को केरल के कोच्चि में होगी। इसमें कुल 146 खिलाड़ी शामिल होंगी, जबकि टीमों के पास भरने के लिए 27 जगह खाली हैं। इनमें 20 जगह भारतीय खिलाड़ियों और 7 जगह विदेशी खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध हैं। ऐसे में सीमित जगहों के कारण टीमों को अपनी जरूरत और उपलब्ध बजट के हिसाब से खिलाड़ियों का चुनाव करना होगा।

नीलामी में 30 खिलाड़ियों ने 30 लाख रुपये की आधार कीमत रखी है। इस सूची में चमारी अटापट्टू, ग्रेस हैरिस, क्लो ट्रायन और स्नेह राणा शामिल हैं। वहीं, 4 खिलाड़ियों ने अपनी आधार कीमत 20 लाख रुपये तय की है। बाकी 106 खिलाड़ियों ने 10 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ पंजीकरण कराया है।

पूरी सूची में 119 भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें 22 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुकी हैं, जबकि 97 ऐसी खिलाड़ी हैं जिन्होंने अभी तक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला है। विदेशी खिलाड़ियों की संख्या 27 है, जिनमें 6 खिलाड़ी ऐसे देशों से आती हैं जो क्रिकेट के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह के पूर्ण सदस्य नहीं हैं।

टीमों की तैयारी की बात करें तो मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने ग्रेस हैरिस समेत 4 खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया है। गुजरात जायंट्स ने सबसे ज्यादा 15 खिलाड़ियों को अपने साथ बनाए रखा और डैनी वायट-हॉज समेत 4 खिलाड़ियों को रिलीज किया। मुंबई इंडियंस ने 11 खिलाड़ियों को बरकरार रखा और 6 को छोड़ा। दिल्ली कैपिटल्स ने 13 खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखा, जबकि लिजेल ली और स्नेह राणा समेत 6 खिलाड़ियों को रिलीज किया।

यूपी वॉरियर्ज ने सबसे ज्यादा 9 खिलाड़ियों को रिलीज किया है। इनमें डिएंड्रा डॉटिन, क्लो ट्रायन और किरण नवगिरे शामिल हैं। टीम ने तारा नॉरिस को 10 लाख रुपये में मुंबई इंडियंस के साथ ट्रेड भी किया है। इसके बाद यूपी वॉरियर्ज के पास 3.75 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा बजट बचा है। साथ ही उसे 8 खिलाड़ियों की जगह भरनी है, जिनमें 5 भारतीय और 3 विदेशी खिलाड़ी हो सकती हैं।

अन्य टीमों के पास उपलब्ध बजट और खाली जगहों पर नजर डालें तो रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पास 1.15 करोड़ रुपये और 5 जगह हैं। मुंबई इंडियंस के पास 90 लाख रुपये और 6 जगह हैं, जबकि दिल्ली कैपिटल्स के पास 1.10 करोड़ रुपये और 5 जगह खाली हैं। गुजरात जायंट्स के पास 1.25 करोड़ रुपये और 3 जगह बची हैं। मुंबई को सभी 6 जगह भारतीय खिलाड़ियों से भरनी हैं, जबकि बाकी टीमों के पास विदेशी खिलाड़ियों को शामिल करने का भी मौका है।

गौरतलब है कि नीलामी में टीमों को सीमित बजट में मजबूत संयोजन तैयार करना होगा। ऊंची आधार कीमत वाली खिलाड़ियों के अलावा कम कीमत पर उपलब्ध प्रतिभाओं पर भी सबकी नजर रहेगी। नीलामी के बाद ही साफ होगा कि कौन सी टीम अपने खाली स्थानों को सबसे बेहतर तरीके से भर पाती है और आगामी सीजन के लिए मजबूत टीम तैयार करती है।

Mon, 19 Oct 2026 22:14:00 +0530

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