Uncovered With Manoj Gairola: मोदी के दुश्मन बने Elon Musk? ये है असली कहानी...
रूस और यूक्रेन की जंग में एक बड़ी इंट्रस्टिंग बात हुई है. यूक्रेन के ड्रोन्स रूस की ऑयल फैसिलिटीज पर अटैक करने जा रहे थे. लेकिन जैसे ही इनकी स्पीड 100 Km/h की हुई, वैसे ही इन्होंने काम करना बंद कर दिया. और इसके पीछे हाथ था Elon Musk का. उन्होंने ऐन वक्त पर यूक्रेन में स्टारलिंक का कनेक्शन काट दिया. और साथ ही दुनिया को दिखा दिया कि जो भी देश Elon Musk के स्टारलिंक के भरोसे रहेगा उसका ये ही हाल होगा. और ये बात भारत के NSA अजीत डोभाल को भी बखूबी पता है, इसीलिए उन्होंने अब तक स्टारलिंक का सिक्योरिटी क्लीयरेंस नहीं होने दिया. हम आपको बता दें कि यूक्रेन वाले incident से ठीक एक दिन पहले तक Elon Musk हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ tweet कर के अपना frustration निकाल रहे थे. वो पिछले 2 साल से भारत में Starlink की सर्विस लॉन्च ही नहीं कर पाए, क्योंकि उन्हें लाइसेंस तो मिल गया, लेकिन इंटेलीजेंस एजेंसियों ने security clearance नहीं दिया.
सिक्योरिटी क्लीयरंस नहीं दे रही सरकार
नमस्कार..मैं हूं मनोज गैरोला, आप देखना शुरू कर चुके हैं अनकवर्ड...आज के एपिसोड में हम बात करेंगे. Elon Musk और उनके Satelite इंटरनेट स्टारलिंक की. आपको बताएंगे कि स्टारलिंक भारत के लिए कितना खतरनाक है? और भारत सरकार क्यों इसे सिक्योरिटी क्लीयरंस नहीं दे रही है?
सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिरकार स्टारलिंक काम कैसे करता है. अंतरिक्ष में इस वक्त स्टारलिंक के 11 हजार से ज्यादा सैटेलाइट एक्टिव हैं. इनके जरिए स्टारलिंक इंटरनेट सर्विस देता है. और ये दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट फोन सर्विस प्रोवाइडर है. लेकिन भारत में अभी तक इसकी एंट्री नहीं हो सकी है. हमारी सरकार अपने देश की सुरक्षा किसी विदेशी कंपनी के हाथ नहीं सौंप सकती है.
यूक्रेन के ड्रोन हमले को फेल कर दिए
अब आपको बताते हैं कि वो क्या कारण हैं जिनकी वजह से स्टारलिंक को सिक्योरिटी क्लीयरेंस नहीं मिला? इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इसका टोटल कंट्रोल अमेरिका के हाथ में हैं. वो जब चाहे इसे बंद कर सकता है या इसकी स्पीड कम कर सकता है. जैसा कि हमने आपको बताया कि कैसे Elon Musk ने अमेरिका में बैठे-बैठे यूक्रेन के ड्रोन हमले को फेल कर दिया. इसकी वजह ये थी कि राष्ट्रपति ट्रंप नहीं चाहते थे कि यूक्रेन रूस की ऑयल फैसिलिटीज पर हमला करे. क्योंकि वो पुतिन के साथ ऑयल डील कर चुके हैं. मतलब ये कि अपने फायदे के लिए अमेरिका ने स्टारलिंक का इस्तेमाल करके यूक्रेन का हमला नाकाम कर दिया. यूक्रेन के साथ ऐसी हरकत अमेरिका पहले भी कर चुका है.
जरा सोचिए..यूक्रेन की तरह अगर भारत के ड्रोन पाकिस्तान में हमला करने जा रहे हों और उनका इंटरनेट कनेक्शन कट जाए..तो क्या हो? जाहिर है भारत की सुरक्षा किसी विदेशी कंपनी के हाथों में नहीं दी जा सकती. वैसे तो स्टारलिंक को मिले लाइसेंस की शर्त में ये बात शामिल है कि उसे अपना गेटवे भारत में ही लगाना होगा. लेकिन फिर भी उसका मास्टर गेटवे अमेरिका में ही होगा. इमरजेंस के वक्त अगर भारत सरकार इंडिया के गेटवे को कंट्रोल भी कर ले, तो भी Elon Musk सिर्फ एक स्वीच दबाकर भारत की सर्विस रोक सकते हैं.
प्रोटेस्ट और भड़क गए
लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नहीं है, इसका खतरा और भी है...आपको याद होगा कि ईरान में साल की शुरुआत में सत्ता विरोधी प्रदर्शन हुए थे. ईरान ने इन्हें रोकने के लिए इंटरनेट पूरी तरह से बंद कर दिया था. लेकिन Elon Musk ने तस्करी के जरिए अपने फोन हजारों की संख्या में ईरान पहुंचाए और बिना परमीशन के ही इंटरनेट सर्विस शुरू कर दी. इससे सरकार के खिलाफ हो रहे प्रोटेस्ट और भड़क गए.
अब जरा सोचिए...कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई बार सरकार किसी खास इलाके में इंटरनेट सर्विस रोक देती है. जैसा कि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए प्रोटेस्ट के दौरान हुआ. लेकिन अगर कभी देश के कई हिस्सों में अराजकतावादी प्रोटेस्ट शुरू हो जाएं और सरकार को इंटरनेट बंद करना पड़े तब भी Elon Musk का इंटरनेट जारी रह सकता है. क्योंकि इसका पूरा कंट्रोल अमेरिका में ही है, और मस्क भारत सरकार का आदेश मानने से इनकार भी कर सकते हैं.
भारत को इसकी हवा भी नहीं लगेगी
मोबाइल इंटरनेट के जरिए जो भी डेटा ट्रांसफर होता है उसका कंट्रोल भारत के पास भी होता है. लेकिन सैटेलाइट इंटरनेट से जो डेटा ट्रांसफर होगा, उसे अगर स्टारलिंक चाहे तो उसे भारत में मौजूद गेटवे के साथ-साथ बाहर भी भेज सकता है. और भारत को इसकी हवा भी नहीं लगेगी. ये कुछ ऐसे सिक्योरिटी कंसर्न्स हैं जो भारत की सुरक्षा के लिए बहुत भारी पड़ सकते हैं. आपको याद होगा कि मणिपुर में भी स्टारलिंक के सैटेलाइट फोन के इस्तेमाल की खबरें आई थीं. म्यांमार में चल रही सिविल वॉर में तो स्टारलिंक की सर्विसेज का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है. यानी जिस देश में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए अराजकता फैलाना चाहती है वहां-वहां स्टारलिंक के नेटवर्क का इस्तेमाल होता है.
अब आपको एक और इंट्रस्टिंग बात बताते हैं...वो बात ये है कि स्टारलिंक का सबसे बड़ा क्लाइंट पेंटागन हैं. पेंटागन यानी अमेरिका का रक्षा मंत्रालय. यानी स्टारलिंक को खड़ा करने में अमेरिका के रक्षा मंत्रालय का पैसा लगा हुआ है. साथ स्टारलिंक पेंटागन के लिए बहुत बड़ा सैटेलाइट स्पाई नेटवर्क भी खड़ा कर रहा है. यही कारण है कि अमेरिकी सरकार टैरिफ की धमकी देकर कई देशों में स्टारलिंक की एंट्री करवा चुकी है.
जाहिर है स्टारलिंक को भारत में ऑपरेट करने के लिए सिक्योरिटी क्लीयरेंस तभी मिलेगा जब वो सरकार को संतुष्ट कर सके कि वो देश के लिए खतरा नहीं है. लेकिन Elon Musk और अमेरिका की एक्टिविटीज से तो यही जाहिर हो रहा है कि भारत में स्टारलिंक की सर्विस शुरू होने के चांस बेहद कम हैं.
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शेफाली वर्मा ने अपनी भावनाओं को साझा किया है कि सीरीज जीतना यंगस्टर्स के लिए बहुत खुशी की बात है. उन्होंने कहा कि यह सीरीज खास तौर पर युवा खिलाड़ियों को समर्पित है और टीम उन्हें पूरा सपोर्ट कर रही है. अगले मैच में जीतने की योजना है और कोशिश रहेगी कि यंगस्टर्स को आगे बढ़ाया जा सकता है.
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