बीसीसीआई का बड़ा ऐलान, प्रज्ञान ओझा बने टीम इंडिया के नए चीफ सिलेक्टर, रमेश पवार को भी सिलेक्शन कमेंट में मिली जगह
Pragyan Ojha : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बड़ा ऐलान करते हुए प्रज्ञान ओझा को टीम इंडिया का चीफ सिलेक्टर नियुक्त किया है. अब वो इंडियन क्रिकेट में अजीत अगरकर की जगह काम करेंगे. इससे पहले अजीत अगरकर के जाने के बाद उन्हें अंतरिम चीफ सिलेक्टर बनाया गया था. उके साथ-साथ साथ रमेश पवार को भी सिलेक्शन कमेंटी में शामिल किया गया है. रमेश जो भारतीय महिला क्रिकेट टीम के पूर्व कोच भी रह चुके हैं, उन्हें सिलेक्शन कमेटी के सदस्य नियुक्त हो चुके हैं. आज यानी 19 अक्टूबर की दोपहर को बीसीसीआई ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस बारे में जानकारी दी है.
प्रज्ञान ओझा बने टीम इंडिया के नए चीफ सिलेक्टर
इसके साथ ही अब सभी अफवाहों पर विराम लग गया है. अब इंडियन क्रिकेट टीम का नया चीफ सिलेक्टर कौन होगा. अब इस पोस्ट को प्रज्ञान ओझा संभालने वाले हैं. ओझा ने पूर्व क्रिकेटर और महेंद्र सिंह धोनी कप्तानी की कप्तानी में टीम इंडिया के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है. उनके साथ ही रमेश पवार ने भी इंडियन क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
???? Announcement ????
— BCCI (@BCCI) October 19, 2026
Mr Ramesh Powar @imrameshpowar appointed to Men’s Selection Committee.
Based on seniority (most Tests), Mr Pragyan Ojha @pragyanojha will chair the Committee.
BCCI appreciates Mr Ajit Agarkar @imAagarkar for his commitment, conviction and contribution during… pic.twitter.com/DahXDLxgLi
किस वजह से बने प्रज्ञान ओझा चीफ सिलेक्टर?
टीम इंडिया की पुरुषों सिलेक्शन कमेटी में प्रज्ञान ओझा (चेयरपर्सन), शिव सुंदर दास, आरपी सिंह, अजय रात्रा, रमेश पोवार शामिल हैं. इन सभी में प्रज्ञान ओझा सबसे ज्यादा सीनियर हैं. वो उम्र के हिसाब से सीनियर नहीं है. बल्कि वो देश के लिए सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने के हिसाब से सीनियर है. इस चयन पैलन में उन्होंने सबसे ज्यादा 24 टेस्ट मैच टीम इंडिया के लिए खेले हैं. ऐसे में उन्हें नीनियरिटी के आधार पर चीफ सिलेक्टर बनाया गया है.
???? PRAGYAN OJHA - NEW CHIEF SELECTOR OF TEAM INDIA. ???? pic.twitter.com/ts7Pdz3F05
— Mufaddal Vohra (@mufaddal_vohra) October 19, 2026
बीसीसीआई ने पोस्ट कर लिखा, 'रमेश पवार को मेन्स सिलेक्शन कमिटी में अपॉइंट किया गया है. क्रिकेट एडवाइजरी कमिटी (CAC) ने मिस्टर अशोक मल्होत्रा और मिस्टर जतिन परांजपे की मौजूदगी में मेन्स सिलेक्शन कमिटी के मेंबर के अपॉइंटमेंट के लिए एक सिलेक्शन प्रोसेस किया. CAC ने एप्लिकेंट्स की स्क्रीनिंग और इंटरव्यू के लिए BCCI हेडक्वार्टर में मीटिंग की और प्रोसेस के बाद एकमत से मिस्टर रमेश पवार के अपॉइंटमेंट की सिफारिश की है.
पोस्ट में आगे लिखा गया कि, 'पवार ने अपने इंटरनेशनल प्लेइंग करियर के दौरान 2 टेस्ट और 31 वनडे में इंडिया को रिप्रेजेंट किया. तब से उन्होंने बड़ी कोचिंग भूमिकाएं निभाई हैं, जिसमें इंडिया विमेंस टीम, मुंबई और गुजरात के हेड कोच के साथ-साथ बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बॉलिंग कोच भी शामिल हैं. इंडिया विमेंस टीम के साथ अपने समय के दौरान, उन्होंने उन्हें एशिया कप टाइटल और कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल दिलाया'.
बीसीसीआई मेन्स सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के तौर पर अपने समय के दौरान मिस्टर अजीत अगरकर के कमिटमेंट, पक्के इरादे और योगदान के लिए उनकी तारीफ करता है. जुलाई 2023 में अपनी नियुक्ति के बाद से अगरकर ने भारतीय क्रिकेट के लिए एक अहम समय में कमेटी को लीड किया, जिसमें भारत ने तीन आईसीसी ट्रॉफी, दो एशिया कप टाइटल और लगातार दो एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीते.
???? NEW SELECTION COMMITTEE OF MEN'S CRICKET TEAM ????
— VIKAS (@Vikas662005) October 19, 2026
Chief selector - Pragyan Ojha.
Selector - Shiv Sundar Das, RP Singh, Ajay Ratra & Ramesh Powar. pic.twitter.com/2c0tCZgy6G
प्रज्ञान ओझा का शानदार करियर
भारत के लिए प्रज्ञान ओझा ने 24 टेस्ट, 18 वनडे और 6 टी20 मैच खेले हैं. इसमें उन्होंने क्रमश: 113, 21, 10 विकेट लिए हैं. उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 7 बार फाइव विकेट हॉल और 5 बार चार विकेट हॉल हासिल किए हैं. उन्होंने साल 2013 में इंडियन क्रिकेट टीम के लिए अपना अंतिम मुकाबला खेला था और 21 फरवरी 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था.
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कांग्रेस ने सत्ता परिवर्तन क आरोपों से किया किनारा, कहा-मांग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को लेकर है
कई रिपोर्ट में चुनाव आयोग की 'विशेष गहन पुनरीक्षण'(SIR) के विरोध में हुए प्रोटेस्ट को बड़ी साजिश बताया गया है. इसे सत्ता परिवर्तन को लेकर बड़ा प्लान बताया जा रहा है. लेकिन कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया ह. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को कहा, 'भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस'. उन्होंने कहा कि विपक्ष शांतिपूर्ण विरोध में विश्वास रखता है. चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहा है.
उन्होंने कहा कि विपक्ष हिंसा का समर्थन नहीं करता है. शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में विश्वास रखता है. मीडिया से बातचीत के दौरान थरूर ने कहा, "मुझे लगता है कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस. मुझे नहीं लगता कि ये तुलनाएं बहुत प्रासंगिक हैं... फ्रांस में जो हिंसा हुई है, जैसे बसों और पुलिस स्टेशनों को आग लगाना, हम ऐसी किसी भी हिंसा का समर्थन कभी नहीं करेंगे.
लोगों के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई
उन्होंने कहा,' हम केवल शांतिपूर्ण विरोध में विश्वास करते हैं, मैंने भी ऐसे ही विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है,और मुझे लगता है कि विपक्ष भी आमतौर पर इसी तरह के विरोध का समर्थन करता है.' सत्ता परिवर्तन की मांग करने के आरोपों को खारिज करते हुए थरूर ने कहा कि विपक्ष की मांग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की है. उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई.
ऐसी किसी कोशिश से कोई लेना-देना नहीं
कांग्रेस सांसद ने कहा, 'जहां तक बड़े मामलों की बात है, तो 'सत्ता परिवर्तन' जैसे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का कोई मतलब नहीं है. हम तो बस स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहे हैं. आज चिंता की बात यह है कि एक बेहद समस्यापूर्ण, अनियमित और आंशिक रूप से अवैध प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. ऐसे हम मांग कर रहे हैं कि इस पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जाए. यह एक संवैधानिक मुद्दा है. इसका सरकार को गिराने या ऐसी किसी कोशिश से कोई लेना-देना नहीं है.'
यूरोप में हो रहे प्रदर्शनों से तुलना करने पर उठाए सवाल
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की तुलना यूरोप में हो रहे प्रदर्शनों से करने वाले नैरेटिव पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, "भारत और यूरोप की तुलना करना बिल्कुल बेतुका है. वे फिर से एक पुरानी और खतरनाक सोच को सामने ला रहे हैं. हमने भारत में भी अक्सर इसी तरह की रणनीति और 'टूलकिट' का इस्तेमाल होते देखा है. हाल ही में दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सांप्रदायिक तनाव भड़काने और हिंसा करने की कोशिश की. इनका मकसद क्या था? शिक्षा, चुनावी निष्पक्षता, पारदर्शिता और न्याय के लिए चल रहे शांतिपूर्ण और जायज आंदोलनों को बदनाम करना है.
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