बांग्लादेश में हिंदू सहित दो अल्पसंख्यक बने कैबिनेट मंत्री, जानें किस मंत्रालय का मिला जिम्मा
तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं. राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मंगलवार को संसद भवन में तारिक को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई. मंगलवार दोपहर को बीएनपी के सांसदों ने उन्हें संसदीय दल का नेता चुना था, जिसके बाद शाम को उन्होंने पीएम पद की शपथ ग्रहण की.
रहमान प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं. वे पिछले 17 वर्षों तक लंदन में रह रहे थे. दो महीने पहले भी वह बांग्लादेश लौटे थे. रहमान पहली बार प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं.
49 मंत्रियों ने ली शपथ
रहमान ने एक ओर जहां प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो वहीं 25 सासंदों ने कैबिनेट मंत्रियों की और 24 सासंदो ने राज्य मंत्रियों के पद की शपथ ली. 25 कैबिनेट मंत्रियों में 17 हिंदू चेहरे हैं तो वहीं 24 के 24 राज्य मंत्री नए चेहरे हैं.
दो अल्पसंख्यकों को भी बनाया कैबिनेट मंत्री
खास बात है कि कैबिनेट मंत्रियों में दो अल्पसंख्यक भी हैं, जिसमें एक हिंदू तो दूसरे बौद्ध हैं. हिंदू मंत्री का नाम निताई रॉय चौधरी है और बौद्ध मंत्री का नाम दिपेन देवान चकमा है. चौधरी को बांग्लादेश का सांस्कृतिक और संस्कृति मंत्री बनाया गया है तो वहीं देवान चटगांव हिल ट्रैक्ट्स मामले के मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं.
किसने कौन सा मंत्रालय मिला
- तारिक रहमान- रक्षा मंत्रालय (प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ एक और प्रभार)
- सलाहुद्दीन अहमद- गृह मंत्रालय
- डॉ. खलीलुर रहमान- विदेश मंत्रालय
- आमीर खसरो महमूद चौधरी- वित्त मंत्रालय
- खंदकर अब्दुल मुक्तादिर- कॉमर्स मंत्रालय
- मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर- लोकल गवर्नमेंट और ग्रामीण विकास एवं सहकारिता मंत्रालय
(ये लिस्ट अनौपचारिक रूप से बीएनपी ने जारी की है. आधिकारिक गजट जल्द जारी होने की उम्मीद है. )
पीएम मोदी ने किया इनवाइट
तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी मौजूद रहे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तारिक को भारत आने का न्योता दिया है. बता दें, बांग्लादेश आम चुनावों में बीएनपी ने 299 में से 209 सीटों पर जीत हासिल की है.
Mount Everest: माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए नेपाल सरकार ने जारी किए नए नियम, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की एंट्री बंद!
Mount Everest: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर लगातार बढ़ती भीड़ और हादसों को देखते हुए नेपाल सरकार ने अहम कदम उठाने का फैसला किया है. यहां की सरकार अब ऐसा नया कानून ला रही है, जिसके तहत केवल वही पर्वतारोही एवरेस्ट पर चढ़ाई कर सकेंगे, जिन्होंने पहले कम से कम 7,000 मीटर ऊंचे किसी पर्वत पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की हो. बता दें कि इस सख्त नियम का लक्ष्य अनुभवहीन लोगों और केवल सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर रोक लगाना है.
बढ़ता सोशल मीडिया का क्रेज बन रहा जानलेवा!
दरअसल, नेपाल सरकार का मानना है कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए और खुद को पॉपुलर करने के लिए लोग बिना एक्सपीरियंस के माउंट एवरेस्ट जैसी कठिन चढ़ाई करते हैं. जबकि ये उनकी जान के लिए खतरा बन रही है और इतना ही नहीं, ऐसे कई इन्फ्लुएंसर्स हैं जो वहां सिर्फ तस्वीरों और रील्स के लिए जाते हैं. माउंट एवरेस्ट पर बीते कुछ समय से गंदगी और कुड़ा भी ज्यादा हो गया है और पहाड़ों पर दबाव बढ़ गया है जिसका एक कारण अनुभवहीन लोगों का चढ़ाई पर जाना. कुछ समय से टूरिस्टों के साथ हादसे होने की घटनाएं भी काफी बढ़ गई है.
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आंकड़ों में दिखा खुला सच
पिछले कुछ वर्षों में एवरेस्ट पर 'एक्सट्रीम टूरिज्म' तेजी से बढ़ा है. कई लोग बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और ऊंचाई के अनुभव के सीधे 8,848 मीटर ऊंची इस चोटी को फतह करने निकल पड़ते हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि पर्वत पर लंबी कतारें, ऑक्सीजन की कमी, खराब मौसम में फंसना और मौतों की संख्या में बढ़ोतरी जैसी घटनाएं सामने आईं. 2019 और उसके बाद के सीजन में एवरेस्ट की तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें सैकड़ों पर्वतारोही शिखर के पास लाइन में खड़े दिखाई दिए. इससे सुरक्षा और पर्यावर, दोनों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
क्या है नेपाल सरकार की शर्ते?
नेपाल सरकार का मानना है कि जो लोग पहले किसी पर्वत पर 7000 मीटर की चढ़ाई कर चुके हैं सिर्फ वहीं माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए जा सकेंगे. ये अनिवार्य शर्त है, जिससे केवल प्रशिक्षित और अनुभवी पर्वतारोही ही परमिट प्राप्त कर सकेंगे. इससे रेस्क्यू ऑपरेशन की जरूरत कम होगी और जान-माल का नुकसान भी कम होगा. नए नियमों में परमिट जारी करने से पहले सख्त दस्तावेजी जांच, पूर्व अभियान का प्रमाण और मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट देना भी अनिवार्य होगा.
पर्यावरण को भी साफ रखना जरूरी
इसके अलावा, अनिवार्य बीमा कवर भी जरूरी होगा, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में बचाव कार्य और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके. नेपाल सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सख्ती दिखा रही है. पर्वतारोहियों को कचरा वापस लाने, मानव अपशिष्ट प्रबंधन और निर्धारित मार्गों का पालन करने जैसे नियमों का पालन करना होगा. अगर इन अनिवार्य नियमों का उल्लंघन किया गया तो उन्हें भारी जुर्माना और भविष्य में चढ़ाई करने पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है. माना जा रहा है कि ये नई शर्ते अगले तीन महीनों के अंदर लागू हो सकते हैं.
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