T20 World Cup 2026: आज होगा भारत और नीदरलैंड का मुकाबला, पिच और वेदर रिपोर्ट के साथ जानिए कैसी होगी प्लेइंग-11
T20 World Cup 2026: आज यानी 18 जनवरी (बुधवार) को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के 36वें मैच में भारत और नीदरलैंड की टक्कर होने वाली है. इन दोनों टीमों के बीच शाम 7 बजे अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मैच खेला जाने वाला है. इस मैच में भारत की कप्तानी सूर्यकुमार यादव के हाथों में होगी तो वहीं नीदरलैंड की कमान स्कॉट एडवर्ड्स के हाथों में होने वाली है. इस मैच में जीतकर भारत ग्रुप स्टेज के सभी 4 मैच जीतकर सुपर-8 में जाना चाहेगा. उससे पहले हम आपको इस मैच की पिच और वेदर रिपोर्ट से लेकर संभावित प्लेइंग-11 तक के बारे में बताने वाले हैं.
पिच रिपोर्ट
अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम की बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है, लेकिन यहां पर नई बॉल के साथ तेज गेंदबाजों को भी मदद मिलती है, वहीं पुरानी गेंद के साथ स्पिन गेंदबाज भी प्ले में आते हैं. ऐसे में इस पिच पर बल्लेबाजों की चांदी ही चांदी है.
इस मैदान पर अब तक सिर्फ 14 टी20 मैच हुए हैं. इस दौरान 9 मैच पहले बैटिंग करने वाली टीम ने तो वहीं 5 मुकाबले दूसरी बैटिंग करने वाली टीम ने अपने नाम किया है. यहां पर पहली पारी का औसत स्कोर 172 रन है. इस मैदान का हाईएस्ट स्कोर 234 रन है, जो भारत ने 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था.
Match day in Ahmedabad! ????️
— Star Sports (@StarSportsIndia) February 18, 2026
Unbeaten #TeamIndia will aim to carry their winning momentum into the Super 8! ????
ICC Men’s #T20WorldCup #INDvNED | WED, FEB 18, 6:30 PM onwards pic.twitter.com/tgF6XVdZNY
वेदर रिपोर्ट
इस मैच में बारिश की संभावना नहीं हैं. 20-20 ओवर का खेल फैंस को पूरा देखने को मिलने वाला है. यहां का तापमान 34 से 19 डिग्री तक रह सकता है. वहीं यहां पर हवा 8 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकती है. ह्यूमिडिटी 37% तक रह सकती है.
भारत की संभावित प्लेइंग-11
भारतीय क्रिकेट टीम इस मैच के लिए अपनी प्लेइंग-11 में 2 बदलाव कर सकती है. कुलदीप यादव की जगह पर टीम में अर्शदीप सिंह की एंट्री हो सकती है. वहीं सुपर-8 के अहम मुकाबलों से पहले जसप्रीत बुमराह को आराम देकर मोहम्मद सिराज या फिर वाशिंगटन सुंदर को मौका दिया जा सकता है.
अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, तिलक वर्मा, संजू सैमनस, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज/वाशिंगटन सुंदर और वरुण चक्रवर्ती.
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अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदला: विशेषज्ञ
वॉशिंगटन, 18 फरवरी (आईएएनएस)। पिछले एक साल में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों की तस्वीर भले ही बेहतर दिख रही हो और दोनों देशों के बीच ऊंचे स्तर पर बातचीत भी बढ़ी हो, लेकिन असल में रिश्तों की बुनियाद में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। दक्षिण एशिया की विशेषज्ञ अपर्णा पांडे ने यह बात कही। उनका कहना है कि अभी तक ज्यादातर बदलाव प्रतीकात्मक हैं, ज़मीन पर न तो आर्थिक और न ही सैन्य स्तर पर पाकिस्तान को खास फायदा मिला है।
पाकिस्तान इस हफ्ते वॉशिंगटन में होने वाली ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में हिस्सा लेने जा रहा है। इस बैठक को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुलाया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इसमें शामिल होंगे। इस दौरे को इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बेहतर होते रिश्तों के सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है।
हालांकि मशहूर हडसन इंस्टीट्यूट थिंक-टैंक की अपर्णा पांडे ने कहा कि यह बदलाव स्ट्रक्चरल से ज़्यादा सिंबॉलिक है। उन्होंने कहा, यह दौरा मुख्य रूप से बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग में शामिल होने के लिए है। पाकिस्तानी पक्ष शायद पिछले साल से बदले हुए अमेरिकी-पाकिस्तान रिश्तों और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री, आर्मी चीफ और प्रेसिडेंट ट्रंप के बीच करीबी, पर्सनल रिश्तों पर जोर देगा।
इस्लामाबाद से ट्रेड संबंधों पर भी ज़ोर देने की उम्मीद है और वह साइडलाइन पर द्विपक्षीय मीटिंग की मांग कर सकता है। उन्होंने कहा, द्विपक्षीय मीटिंग होती है या नहीं, हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा।
पांडे ने कहा, सिंबॉलिक तौर पर, रिश्ते बहुत अच्छे चल रहे हैं। हालांकि, असल में, मुझे नहीं लगता कि पिछले एक-डेढ़ साल में पाकिस्तान के अंदर ज्यादा कुछ बदला है।
गाजा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से मुस्लिम देशों और मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों में भूमिका निभाना चाहता है। अगर पाकिस्तान ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भाग लेता है या गाजा में कोई जिम्मेदारी निभाता है तो देश के अंदर इसे सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर पाकिस्तानी सेना को “फिलिस्तीनी नागरिकों के बजाय इजरायल के समर्थक के तौर पर देखा गया, तो यह अच्छा नहीं लगेगा।” कुल मिलाकर, “सिंबॉलिक तौर पर यह अच्छा लगेगा,” लेकिन इस्लामाबाद इस बात पर क्लैरिटी चाहेगा कि गाजा में किसी भी इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स के हिस्से के तौर पर उसके सैनिकों से क्या उम्मीद की जाती है।
घरेलू राजनीतिक मुद्दों पर, उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सदस्य “सवाल पूछ सकते हैं,” लेकिन “मुझे नहीं लगता कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन कोई सवाल पूछेगा… क्योंकि… यह उनके लिए चिंता का विषय नहीं है।”
पांडे का मानना है कि पाकिस्तान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का उपयोग करते हुए अमेरिका के लिए खुद को ईरान, गाजा और फिलिस्तीन से जुड़े मामलों में उपयोगी साबित किया है। पाकिस्तान की नजर में इससे द्विपक्षीय रिश्तों में ठोस लाभ मिलना चाहिए था। लेकिन फिलहाल जो मिला है, वह सिर्फ प्रतीकात्मक समर्थन और निवेश से जुड़े कुछ ऐलान या संभावित घोषणाएं हैं। ठोस आर्थिक लाभ अभी तक नहीं दिखे हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में इस बात को लेकर नाराजगी भी है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने यहां तक कह दिया था कि अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल टॉयलेट पेपर की तरह किया।
सैन्य सहयोग के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान को उन्नत सैन्य उपकरण आसानी से नहीं देगा। अगर पाकिस्तान को ऐसे हथियार चाहिए, तो उसे खुद खरीदने होंगे। सऊदी अरब या तुर्किये जैसे देश आर्थिक मदद कर सकते हैं, लेकिन पाकिस्तान की अपनी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह बड़े पैमाने पर महंगे हथियार खरीद सके।
आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश कर सकती हैं। लेकिन ऐसे कई खनिज बलूचिस्तान में हैं, जहां लंबे समय से उग्रवाद की समस्या है। सुरक्षा हालात ठीक न होने की वजह से कई विदेशी कंपनियां वहां निवेश करने से हिचकती हैं।
--आईएएनएस
एएस/
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