IFR Milan: मिग-29के, एलसीए तेजस समेत 50 लड़ाकू विमान और 71 युद्धपोत, राष्ट्रपति मुर्मू विशाखापट्टनम में आज लेंगी अंतरराष्ट्रीय बेड़े की सलामी
IFR Milan: 'सिटी ऑफ डेस्टिनी' कहे जाने वाले आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के समुद्र समुद्री तट आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) के जरिये दुनिया को भारत की बढ़ती नौसैनिक ताकत से रूबरू कराएंगी. इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कल यानी शाम विशाखापत्तनम पहुंच गईं. इस दौरान विशाखापट्टनम में समुद्र किनारे भारतीय नौसेना की बढ़ती शक्ति और वैश्विक मैत्री का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा. बंगाल की खाड़ी में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू अंतरराष्ट्रीय बेड़े का निरीक्षण भी करेंगी.
स्वदेशी युद्धपोत INS सुमेधा से करेंगी बेड़े का निरीक्षण
इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बंगाल की खाड़ी में स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस सुमेधा पर सवार होकर समुद्र में खड़े नौसेना के बेड़े का निरीक्षण करेंगी. जिसमें भारतीय नौसेना के साथ मित्र देशों के कुल 71 युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल होंगी. इस कार्यक्रम के दौरान 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर फ्लाई-पास्ट कर राष्ट्रपति मुर्मू को सलामी देंगे. साथ ही आकाश में मिग-29K, LCA तेजस, P-8i टोही विमान और C-किंग हेलीकॉप्टरों की गड़गड़ाहट भी सुनाई देगी. यही नहीं इस दौरान दुनिया के सबसे घातक समुद्री कमांडो माने जाने वाले नौसेना के मार्कोस समुद्र के बीच विशेष युद्ध कौशल का भी प्रदर्शन करेंगे.
भारत की समुद्री कूटनीति का बड़ा मंच
बता दें कि इस आयोजन को भारत की सैन्य शक्ति के साथ देश की समुद्री कूटनीति का एक बड़ा मंच माना जा रहा है. पीएम मोदी के महासागर विजन के तहत, अब भारत खुद को हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुरक्षा प्रदाता के तौर पर दुनिया के सामने पेश कर रहा है. इसी के साथ इस इलाके में अगले कुछ दिनों तक आईएफआर के साथ-साथ मिलन युद्धाभ्यास और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा.
65 देशों की नौसेना होगी कार्यक्रम में शामिल
इस कार्यक्रम में दुनियाभर के 75 देशों के साथ कुल 65 नौसेनाएं मौजूद रहेंगी. जो भारत के बढ़ते वैश्विक कद को दर्शाती है. बता दें कि भारत अपनी नौसैनिक ताकत के जरिए अब विकासशील देशों की आवाज बनकर उभर रहा है. जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को एक सामरिक बढ़त दिला रही है. यही वजह है कि अब भारतीय नौसेना सिर्फ एक सैन्य बल नहीं रहा है, बल्कि ये समुद्री व्यवस्था को आकार देने वाली एक कूटनीतिक शक्ति के रूप में बदल चुकी है.
पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया था पहला फ्लीट रिव्यू
बता दें कि भारत में पहली बार देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने फ्लीट रिव्यू की परंपरा 1953 में शुरू की थी. तब उन्होंने 33 भारतीय जहाजों का निरीक्षण किया था. 2016 में भी विशाखापत्तनम में इसका भव्य समारोह हुआ था. इस बार का आयोजन इसलिए खास है क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े नौसैनिक अभ्यासों में से एक मिलन-2026 के साथ आयोजित किया जा रहा है.
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ज्यादा डाइटिंग के चक्कर में कहीं हो न जाएं ये समस्याएं
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