ब्रिटेन के डिप्टी पीएम लैमी और एआई मंत्री नारायण का भारत दौरा, एआई इम्पैक्ट समिट में होंगे शामिल
नई दिल्ली/लंदन, 17 फरवरी (आईएएनएस)। भारत में ब्रिटेन की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने मंगलवार को तकनीक और नवाचार पर सहयोग को भारत-ब्रिटेन विजन 2035 का मुख्य स्तंभ बताया। वहीं, देश के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी और एआई मंत्री कनिष्क नारायण एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा एक बयान में हाई कमिश्नर कैमरन ने कहा, इस हफ्ते इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट- 2026 के लिए दिल्ली में उपप्रधानमंत्री डेविड लैमी और एआई मंत्री कनिष्क नारायण का स्वागत करने का इंतजार है। तकनीक और नवाचार पर सहयोग ब्रिटेन-भारत विजन- 2035 का एक अहम हिस्सा है।
उन्होंने कहा, मैं 2023 में ब्लेचले पार्क में थी, जब ब्रिटेन ने दुनिया का पहला एआई सेफ्टी समिट आयोजित किया था। इस हफ्ते भारत को इन चर्चाओं का नेतृत्व करते हुए देखना बहुत अच्छा लगा क्योंकि भारत एआई को कैसे देखता है, यह दुनिया के लिए मायने रखता है।
एक आधिकारिक बयान में ब्रिटेन की सरकार ने कहा, ब्रिटेन इस हफ्ते भारत में एआई इम्पैक्ट समिट का इस्तेमाल यह बताने के लिए करेगा कि एआई कैसे विकास को बढ़ा सकता है, नई नौकरियां दिला सकता है, पब्लिक सेवा को बेहतर बना सकता है और दुनिया भर के लोगों को फायदे पहुंचा सकता है।
इसमें आगे कहा गया, उपप्रधानमंत्री डेविड लैमी और एआई मंत्री कनिष्क नारायण के नेतृत्व में ब्रिटेन का प्रतिनिधिमंडल एक हफ्ते की बातचीत शुरू कर रहा है, जिसका फोकस इस बात पर होगा कि एआई रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे बेहतर बना सकता है, सिर्फ एडवांस्ड इकॉनमी में ही नहीं, बल्कि दुनिया के हर कोने में।
समिट के दौरान, लैमी और नारायण इस बात पर जोर देंगे कि एआई रिन्यूअल का इंजन है क्योंकि यह डॉक्टरों को तेजी से डायग्नोसिस करने, टीचरों को लर्निंग को पर्सनलाइज करने, काउंसिल को मिनटों में सर्विस देने और बिजनेस को अगली पीढ़ी की अच्छी नौकरियां बनाने में मदद करता है।
एक बयान में, डेविड लैमी ने कहा, यह समिट यह तय करने का एक जरूरी मौका है कि हम अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर एआई के पूरे फायदों और क्षमताओं को अनलॉक करने के लिए कैसे काम कर सकते हैं, साथ ही मजबूत और सही सेफ्टी स्टैंडर्ड भी बना सकते हैं, जो हम सभी की रक्षा करे।
उन्होंने कहा, हम ब्रिटेन में नौकरियां, विकास और खुशहाली लाने के लिए एम्बिशन को एक्शन में बदल रहे हैं। भारत में हमारे साथ जुड़ने वाले बिजनेस लीडर्स पक्की साझेदारी बनाएंगे और निवेश सुरक्षित करेंगे, जिससे ब्रिटेन, भारत और दुनिया भर में काम करने वाले लोगों को मौके मिलेंगे।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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जिम, मार्केट, यूनिवर्सिटीज में जाना बैन! इस्लाम में औरतों की क्या हैसियत?
Islamic Rules: पूरी दुनिया में इस्लाम में महिलाओं के दर्जे को लेकर अक्सर बहस छिड़ती रहती है. शिक्षा, विरासत, गवाही, हिजाब, तलाक और चार शादियों जैसे मुद्दों पर कई सवाल उठाए जाते हैं. आइए इन विषयों पर विस्तार से यह समझाने की कोशिश करते हैं कि इस्लाम के मूल सिद्धांत क्या कहते हैं और समाज में प्रचलित धारणाएं कितनी सही हैं.
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इस्लाम में शिक्षा पुरुष और महिला दोनों के लिए अनिवार्य मानी गई है. महिलाओं को संपत्ति रखने, व्यापार करने और विरासत में हिस्सा पाने का अधिकार 1400 साल पहले ही दिया गया था. वहीं, गवाही के मामले में दो महिलाओं की बराबरी एक पुरुष से किए जाने की बात को सिर्फ आर्थिक लेन-देन से जुड़ा बताया गया, न कि सामान्य मामलों से.
तलाक और हलाला को लेकर भी कई गलतफहमियों पर बहस होती है. इस्लाम में तलाक एक प्रक्रिया है, जबकि 'हलाला' जैसी प्रथा इस्लाम का मूल हिस्सा नहीं है. चार शादियों को भी अनिवार्य नहीं बल्कि विशेष परिस्थितियों में विकल्प बताया गया है.
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