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पैट मैक्ग्रा की सौंदर्य प्रसाधन कंपनी संकट में:मैडोना-रिहाना इनकी क्लाइंट रहीं, किचन में बनाए उत्पादों से 9 हजार करोड़ की कंपनी खड़ी की

लंदन की अश्वेत लड़की पैट मैक्ग्रा, जिसने मां के किचन से शुरू करके पेरिस-मिलान के सबसे बड़े रैम्प तक मेकअप का जादू पहुंचाया। आज अपनी ही कंपनी पैट मैक्ग्रा लैब्स को दिवालियेपन से बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। दुनिया उन्हें ‘मदर ऑफ मेकअप’ कहती है। मैडोना, टेलर स्विफ्ट, किम कार्दशियां से लेकर रिहाना तक के जिन चेहरों को हम रेड कार्पेट पर चमकता देखते हैं, उनमें पैट के ब्रश का स्पर्श होता है। 2015 में शुरू हुआ उनका ब्रांड पैट मैक्ग्रा लैब्स 2018 में 9000 करोड़ रु. से ज्यादा का सौंदर्य कारोबार कर रहा था। ऐसा करने वाला पहला अश्वेत महिला स्वामित्व का सौंदर्य ब्रांड बना। इसके आठ साल बाद ही पिछले महीने जनवरी में इसी कंपनी को कर्ज से राहत के लिए अमेरिका में दिवालिया होने की अर्जी देनी पड़ी। इसमें कंपनी पर 453 करोड़ रु. से अधिक के कर्ज की बात कही गई है। पेरिस या मिलान फैशन वीक में 80 बड़े सूटकेस के साथ आने के लिए मशहूर पैट के हर सूटकेस में हजारों आईशैडो, ग्लिटर और उनके बनाए सीक्रेट फॉर्मूले होते हैं। उनका सबसे चर्चित प्रोडक्ट ‘गोल्ड 001’ किसी हाई-टेक लैब में नहीं, बल्कि किचन में बना था। वे धातु जैसी चमक वाला गोल्ड शेड चाहती थीं और हाथ से पिगमेंट मिलाकर जो रंग निकला, वह पेरिस फैशन वीक में लॉन्च होते ही ऑनलाइन मिनटों में सोल्ड-आउट हो गया। 2024 के एक शो में उन्होंने मॉडल्स के चेहरे पर ऐसा ग्लास-स्किन इफेक्ट बनाया कि सोशल मीडिया में कई हफ्तों तक यही चर्चा होती रही कि यह ‘कांच की गुड़िया’ जैसा चेहरा आखिर कैसे बना। इस ग्लैमर की चमक के पीछे उनकी कंपनी की बैलेंस शीट बिगड़ गई। रिपोर्टों के अनुसार, तेज विस्तार, भारी मार्केटिंग खर्च, सप्लाई चेन में रुकावटें और रिटेल पार्टनरशिप की लागत ने पैट मैक्ग्रॉ लैब्स के बजट ढांचे को ध्वस्त कर दिया। पहचान: चलती-फिरती रिसर्च लैब लेकर घूमती हैं मैक्ग्रॉ ब्रिटेन में जमैका मूल की सिंगल मदर के घर जन्मी पैट मैक्ग्राॅ का रुझान बचपन से फैशन की ओर था। इटालियन वोग की कॉपियों को देखती थीं। 1990 के दशक में सोल सेकंड सोल की सिंगर कैरॉन व्हीलर के साथ टूर, फिर फोटोग्राफर स्टीवन मीजल के साथ काम ने उन्हें प्राडा, लुई वितां और वर्साचे जैसे फैशन हाउस की पहली पसंद बना दिया। वह शो में 70-80 बड़े ट्रंक मेकअप बैग लेकर पहुंचती हैं। कहा जाता है कि वे चलती-फिरती रिसर्च लैब लेकर घूमती हैं। 2021 में ब्रिटिश एम्पायर की ‘डेम’ की उपाधि मिली। सौंदर्य जगत से यह सम्मान पाने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं।

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भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के विरोध में कांग्रेस का विधानसभा में प्रदर्शन, उमंग सिंघार ने सरकार पर साधा निशाना

मध्य प्रदेश के बजट सत्र के दूसरे दिन आज फिर कांग्रेस का उग्र रूप देखने को मिला। सोमवार को राज्यपाल ने अभिभाषण में इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे दूषित पानी से हुई मौतों का जिक्र नहीं होने से भड़की कांग्रेस ने आज गंदे पानी को बोतलों में भरकर विधानसभा पहुंच गई और सरकार के खिलाफ …

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  Sports

T20 World Cup में Abhishek Sharma बने 'टेंशन', दो बार Zero पर आउट, Gavaskar ने दी खास सलाह

टी20 विश्व कप में भारत ने तीन मुकाबले खेल लिए हैं, लेकिन युवा ओपनर अभिषेक शर्मा का बल्ला अब तक खामोश रहा है। आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले इस बल्लेबाज से बड़े शॉट्स की उम्मीद थी, मगर वह दो बार शून्य पर आउट हो चुके हैं।

बता दें कि टी20 विश्व कप 2026 में अभिषेक एक मैच बीमारी के कारण नहीं खेल पाए, जबकि अमेरिका और पाकिस्तान के खिलाफ वह खाता भी नहीं खोल सके। ऐसे में उनके आक्रामक और जोखिम भरे खेल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने उन्हें सरल सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अभिषेक को शुरुआत में एक सिंगल लेकर खुद को सहज करना चाहिए, उसके बाद बड़े शॉट खेलने चाहिए। उनके मुताबिक आत्मविश्वास बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक लगाकर उन्होंने अपनी फॉर्म साबित की थी।

गौरतलब है कि अभिषेक ने 2025 एशिया कप में सात मैचों में 314 रन बनाकर अपनी उपयोगिता दर्शाई थी। हालांकि इस बार विरोधी टीमों ने उनकी आक्रामक शैली को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार की है। अमेरिका के खिलाफ वह शैडली वैन शाल्कविक की गेंद पर डीप कवर में कैच हुए, जबकि पाकिस्तान के खिलाफ सलमान अली आगा की गेंद पर मिड-ऑन पर आउट हुए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने कहा कि अभिषेक की फॉर्म को लेकर अनावश्यक दबाव बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टी20 प्रारूप में जोखिम स्वाभाविक है और कभी-कभी 10 गेंदों में 30 रन भी मैच का रुख बदल सकते हैं। कोटक का मानना है कि खिलाड़ी पर ज्यादा विश्लेषणात्मक दबाव डालने से प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

टीम प्रबंधन का कहना है कि अभिषेक अपनी योजनाओं को लेकर स्पष्ट हैं और विपक्ष की ताकत व कमजोरियों पर सामान्य चर्चा होती रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह शुरुआत में संयम दिखाकर खुद को सेट कर लें, तो उनकी आक्रामक शैली टीम के लिए फिर से मैच जिताऊ साबित हो सकती है।
Wed, 18 Feb 2026 21:09:47 +0530

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