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पेरिस ओलंपिक के बाद हार, चोट और आत्मविश्वास की कमी से जूझने वाली लवलीना बोरगोहेन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चैंपियन कभी हार नहीं मानते. 28 साल की भारतीय मुक्केबाज ने करियर जारी रखने को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया. राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार पदक जीतने वाली लवलीना ने रजत पदक हासिल किया और अब उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है. वहीं भारतीय बॉक्सिंग टीम के ऐतिहासिक प्रदर्शन ने नई उम्मीद जगाई है. Wed, 5 Aug 2026 17:20:27 +0530