Shardiya Navratri 2026 Day 8: शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी पर आज करें माता महागौरी की पूजा, पढ़ें उनकी कथा बरसेगी कृपा
Shardiya Navratri 2026 Day 8: शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि का प्रारंभ आज 18 अक्टूबर 2026 को 8 बजकर 29 से हो चुका है. इस दिन दुर्गा मां के आठवें स्वरूप की पूजा की जाएगी. इस दिन माता श्वेत वर्ण की जिन्हें माता महागौरी भी कहा जाता है, उनकी पूजा की जाएगी. साथ ही अष्टमी के दिन पर कन्या पूजन भी किया जाता है. हालांकि, आज कई घरों तथा मंदिरों में महाष्टमी पूजन नहीं किया जा रहा है क्योंकि सूर्योदय के बाद भी सप्तमी तिथि जारी थी. धार्मिक मान्यता है कि महागौरी माता की पूजा करने से रोग-दोषों से मुक्ति मिलती है. इनके पूजन से राहु ग्रह भी शांत होता है. इसलिए, इनकी पूजा करने से राहु के बुरे प्रभावों को दूर करने में मदद मिलती है. आज आठवें नवरात्रि के दिन पर महागौरी की पूजा के साथ-साथ कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए.
आज है दुर्गाष्टमी
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा के अनुसार, आज यानी 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 29 मिनट पर अष्टमी तिथि का प्रारंभ हुआ है. यह तिथि 19 नवंबर तक सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहने वाली है. ऐसे में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर से शुरू होकर 19 नवंबर तक रहने वाली है. इसलिए, आप दोनों दिन पूजन कर सकते हैं. महाष्टमी पर माता महागौरी की पूजा के साथ-साथ महानिशा पूजा करने का भी विशेष महत्व होता है. इस दिन पर कई भक्त व्रत रखते हैं और दुर्गा मां से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा भी होती है, जिनमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है.
माता महागौरी की व्रत कथा (Read Mata Mahagauri Vrat Katha)
नवरात्रि के नौ दिनों में आठवें दिन, महाअष्टमी पर, माता महागौरी की पूजा की जाती है. वे करुणा, पवित्रता और शांति की देवी कहलाती हैं. उनके नाम में ही उनका स्वरूप समाया है. "महा" का अर्थ है अत्यंत और "गौरी" का अर्थ है श्वेत, यानी अत्यंत उज्ज्वल वर्ण वाली देवी. भक्तों की मान्यता है कि माता की आराधना से मन के विकार मिटते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है.
शिव को पाने की तपस्या
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया था. इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने अत्यंत कठोर तपस्या की. वे वर्षों तक अन्न-जल का मोह छोड़कर साधना में लीन रहीं. ऋतुएं बदलती रहीं, आंधी, वर्षा और कड़ाके की ठंड आती-जाती रही, पर उनका संकल्प अडिग रहा. इतने लंबे समय तक तप करने के कारण उनका शरीर धूल-मिट्टी से ढक गया और उनका कोमल गौर वर्ण सांवला पड़ गया.
अंततः भगवान शिव उनकी निष्ठा और तपस्या से प्रसन्न हुए. उन्होंने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. यह पार्वती की साधना की सबसे बड़ी विजय थी, परंतु तपस्या के चिह्न के रूप में उनका रंग अब भी सांवला ही था.
ब्रह्मा जी की आराधना
शिव को पाने के बाद माता पार्वती ने अपने मूल गौर वर्ण को दोबारा पाने की इच्छा की. इसके लिए उन्होंने सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा की आराधना की. कथा के एक अन्य वर्णन के अनुसार, उन्होंने ब्रह्मा जी से विनम्र प्रार्थना की कि उन्हें उनका पहले जैसा उज्ज्वल रूप लौटा दिया जाए. ब्रह्मा जी उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें एक उपाय बताया. उन्होंने कहा कि वे मानसरोवर में जाकर पवित्र स्नान करें.
मानसरोवर में स्नान और महागौरी का प्रकट होना
माता पार्वती ने ब्रह्मा जी के बताए अनुसार मानसरोवर में पवित्र स्नान किया. जैसे ही उन्होंने जल में डुबकी लगाई, चमत्कार हो गया. धूल-मिट्टी और तपस्या की श्यामलता उतर गई और उनका रंग पहले की तरह उज्ज्वल और गौर हो गया. उनके शरीर से दिव्य श्वेत आभा फूट पड़ी, मानो पूर्णिमा का चंद्रमा धरती पर उतर आया हो. उनके इसी दिव्य और तेजस्वी स्वरूप को "महागौरी" नाम से जाना गया.
कौशिकी का प्रकट होना
मान्यता है कि स्नान के समय माता पार्वती के शरीर से जो श्याम वर्ण अलग हुआ, वह व्यर्थ नहीं गया. वह एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में प्रकट हुआ, जिसे "कौशिकी" कहा गया. यह शक्ति अत्यंत प्रचंड और तेजस्वी थी. आगे चलकर इसी शक्ति ने अत्याचारी राक्षसों का संहार किया और देवताओं को उनके आतंक से मुक्ति दिलाई. इस प्रकार एक ही देवी के दो रूप सामने आए: एक शांत, सौम्य और करुणामयी महागौरी, और दूसरा दुष्टों का नाश करने वाली कौशिकी.
कथा का संदेश
माता के विभिन्न स्वरूपों की ये कथाएं सिर्फ चमत्कार की कहानियां नहीं हैं, बल्कि गहरा संदेश भी देती हैं. पार्वती की तपस्या बताती है कि सच्चे संकल्प और धैर्य से हर लक्ष्य पाया जा सकता है. उनका सांवला रंग और फिर गौर वर्ण यह सिखाता है कि साधना का हर चरण अपने आप में पवित्र है. कौशिकी का राक्षसों का संहार करना बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की स्थापना का प्रतीक है.
माता की महिमा
मां महागौरी को करुणामयी और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाली देवी माना जाता है. वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनका स्वरूप अत्यंत सौम्य है. नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं, माता का पूजन करते हैं और कन्या पूजन करके उनका आशीर्वाद लेते हैं. भक्त सुखी वैवाहिक जीवन, परिवार की खुशहाली और जीवन में शांति की कामना करते हैं. मान्यता है कि जो सच्चे मन से माता की शरण में जाता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उसे अटूट सुख-शांति प्राप्त होती है.
माता महागौरी के शक्तिशाली मंत्र
- ऊं देवी महागौर्यै नमः॥
- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नमः॥
- श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ - या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
फ्रांस में महंगाई के खिलाफ हिंसक हुआ प्रदर्शन, आगजनी और लूटपाट से मचा हड़कंप; 1200 लोग गिरफ्तार
France Protest: फ्रांस में इनदिनों बढ़ती महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति और आर्थिक नीतियों के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. इस बीच कई शहरों में चल रहे इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है. शनिवार को राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की कई घटनाएं सामने आईं.
1200 प्रदर्शनकारियों को किया गया गिरफ्तार
सबसे गंभीर घटना लिमोज शहर में हुई, जहां 143 साल पुराना ऐतिहासिक टाउन हॉल में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी. जिसेस टाउन हॉल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया. फ्रांसीसी प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के मुताबिक, प्रदर्शनों के सिलसिले में करीब 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
बता दें कि फ्रांस में हुए इन प्रदर्शनों का असर यूरोप के दूसरे देशों में भी दिखाई दे रहा है. शनिवार को बेल्जियम, पुर्तगाल और इटली में भी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. वहीं अल्बानिया में भी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप, रोजगार की कमी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए.
लिमोज के ऐतिहासिक टाउन हॉल को हुआ भारी नुकसान
शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान लिमोज शहर में नकाब पहने कुछ लोगों ने नगर निगम की ऐतिहासिक इमारत में आग लगा दी. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, आग इतनी भीषण थी कि इमारत की छत का बड़ा हिस्सा ढह गया और बाहरी हिस्से को भी भारी नुकसान हुआ है. स्थानीय अधिकारियों ने बताया है कि इमारत का पश्चिमी हिस्सा छोड़कर छत और निचली मंजिलों गिर गईं.
उनके मुताबिक, इमारत के बाहरी हिस्से का लगभग दो-तिहाई हिस्सा नष्ट हो गया. अधिकारियों ने इस घटना को ऐतिहासिक धरोहर के लिए बड़ा नुकसान बताया और इसे जानबूझकर की गई तोड़फोड़ करार दिया. वहीं प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल नकाबपोश लोगों के एक समूह ने पहले टाउन हॉल के बाहर खड़ी पुलिस की गाड़ी में आग लगाई. इसके बाद उन्होंने इमारत की खिड़कियां तोड़ीं और भीतर घुसकर आग लगा दी. आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को देर रात तक मशक्कत करनी पड़ी.
इस घटना के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए. आग में ऐतिहासिक इमारत को नुकसान पहुंचता देख नगर निगम का एक कर्मचारी भावुक हो गया. वहां मौजूद एक स्थानीय पार्षद ने उसे संभालने की कोशिश की.
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