रोम के जिओर्दानो ब्रूनो, जिनके विचारों से घबराई सत्ता और जिंदा जला दिया
नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। चुनौती किसी भी सत्ता को पसंद नहीं होती है, चाहे वो धर्म के ठेकेदार हों या फिर समाज और देश पर राज करने वाले। जिओर्दानो ब्रूनो के साथ ऐसा ही कुछ हुआ। इटली के दार्शनिक, गणितज्ञ और खगोलचिंतक जिओर्दानो ब्रूनो को यूरोपीय बौद्धिक इतिहास में स्वतंत्र चिंतन के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
वे उन विचारकों में थे जिन्होंने स्थापित धार्मिक मान्यताओं के बीच ब्रह्मांड और मानव ज्ञान की सीमाओं पर नए प्रश्न उठाए। उनके विचारों ने 16वीं सदी के यूरोप में गहरा विवाद पैदा किया और अंततः उन्हें कठोर दंड का सामना करना पड़ा। ब्रूनो का जन्म 1548 में इटली के नोला नगर में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे डोमिनिकन मठ में शामिल हुए, जहां उन्होंने धर्मशास्त्र और दर्शन का अध्ययन किया।
अध्ययन के दौरान ही उन्होंने पारंपरिक मान्यताओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। वे निकोलस कोपरनिकस के सूर्यकेन्द्रीय सिद्धांत से प्रभावित थे, जिसमें पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र नहीं माना गया था। ब्रूनो ने इस सिद्धांत को और आगे बढ़ाया। उनका मत था कि ब्रह्मांड अनंत है और उसमें असंख्य तारे हैं, जो स्वयं अन्य सौरमंडलों के केंद्र हो सकते हैं। उन्होंने यह भी संभावना व्यक्त की कि अन्य ग्रहों पर जीवन मौजूद हो सकता है। उस समय के धार्मिक दृष्टिकोण में ब्रह्मांड सीमित और पृथ्वी-केंद्रित माना जाता था, इसलिए उनके विचारों को विधर्म के रूप में देखा गया।
उनके दार्शनिक विचार केवल खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं थे। वे ईश्वर को ब्रह्मांड की असीम उपस्थिति के रूप में देखते थे और मानते थे कि सत्य की खोज तर्क और अनुभव से की जानी चाहिए। इन विचारों ने चर्च के आधिकारिक सिद्धांतों को चुनौती दी, जो पसंद नहीं आई।
1592 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और रोम ले जाया गया, जहां रोमन इन्क्विजिशन के सामने उन पर मुकदमा चला। कई वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान उन पर जोर डाला गया कि वो अपने विचारों को त्याग दें, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। अंततः 17 फरवरी 1600 को रोम के कैंपो दे फियोरी में उन्हें जिंदा जला दिया गया। समय के साथ इतिहास ने ब्रूनो को अलग दृष्टि से देखा।
आधुनिक युग में उन्हें वैज्ञानिक जिज्ञासा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में माना जाता है। 19वीं सदी में उसी स्थान पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई, जहां उन्हें दंड दिया गया था।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में दिखेगा भारतीय गेमिंग स्टार्टअप्स का दम, 5 स्टार्टअप पेश करेंगे एआई आधारित गेमिंग नवाचार
नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के गेमिंग और इंटरैक्टिव टेक्नोलॉजी वर्ग में पांच भारतीय स्टार्टअप अपने एआई आधारित समाधान पेश करेंगे।
सरकार के अनुसार, ये स्टार्टअप दिखाएंगे कि एआई, गेमिंग, इमर्सिव मीडिया और एंटरप्राइज बदलाव के क्षेत्र में भारत की भूमिका तेजी से मजबूत हो रही है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इन स्टार्टअप्स की भागीदारी एआई-आधारित गेमिंग, इमर्सिव अनुभव, कॉग्निटिव ट्रांसफॉर्मेशन और इंटरैक्टिव स्टोरीटेलिंग में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, एक स्टार्टअप ऐसा एआई प्लेटफॉर्म पेश करेगा जो गेम के लिए कैरेक्टर डिजाइन, बैकग्राउंड, यूआई एलिमेंट, स्टोरीबोर्ड और एनिमेशन जैसे तैयार गेम एसेट्स तेजी और सटीकता के साथ बना सकेगा। दूसरा स्टार्टअप 1.8 करोड़ से अधिक वैश्विक यूजर्स वाला मल्टीप्लेयर क्रिकेट गेम और जेनरेटिव एआई आधारित रियल-टाइम कमेंट्री इंजन प्रदर्शित करेगा। तीसरा स्टार्टअप एक ऐसा मोबाइल हैंडहेल्ड गेमिंग सिस्टम दिखाएगा, जो स्मार्टफोन को कंसोल-स्तर के गेमिंग डिवाइस में बदलने के लिए डिजाइन किया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि इन स्टार्टअप्स की मौजूदगी देश के उस बड़े लक्ष्य को दिखाती है, जिसके तहत भारत एआई-आधारित वैश्विक स्तर के प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहता है और अगली पीढ़ी की डिजिटल नवाचार में अग्रणी बनना चाहता है।
समिट के दौरान एक विशेष पैनल चर्चा भी आयोजित होगी, जिसमें वैश्विक निवेशक और उद्योग विशेषज्ञ भारत में एआई-आधारित गेम डेवलपमेंट और इंटरैक्टिव मीडिया में बढ़ते निवेश और अवसरों पर चर्चा करेंगे। इस सत्र में निवेश के नए रुझान, एआई से जुड़ी उत्पादन प्रक्रियाएं, कौशल विकास और जरूरी नीतियों पर विचार किया जाएगा।
यह समिट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक प्रमुख वैश्विक सम्मेलन है, जिसमें सरकारें, तकनीकी कंपनियां, स्टार्टअप, निवेशक, शोधकर्ता और नीति निर्माता शामिल होंगे। कार्यक्रम में 13 देशों के पवेलियन भी लगाए जाएंगे, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान सहित अफ्रीकी देशों की भागीदारी शामिल है।
नीति निर्माताओं ने यह भी कहा कि एआई आधारित समृद्धि की दिशा में पहला कदम शिक्षा और बुनियादी कौशल सुधार से शुरू होना चाहिए।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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