Responsive Scrollable Menu

Fact Check: ब‍िहार में आरजेडी की रैली का पुराना वीड‍ियो CJP के त‍िरंगा मार्च के नाम पर वायरल

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के खिलाफ 16 अक्‍टूबर 2026 को द‍िल्‍ली के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का आह्वान किया था। इस दौरान सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा […]

The post Fact Check: ब‍िहार में आरजेडी की रैली का पुराना वीड‍ियो CJP के त‍िरंगा मार्च के नाम पर वायरल appeared first on Vishvas News.

Continue reading on the app

Social Media पर पाबंदी से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य सुधरने पर शोधकर्ताओं को संदेह

(एरी लाइटमैन, कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय) पिट्सबर्ग (अमेरिका), 17 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) सोशल मीडिया मंचों के लिए वर्ष 2026 खर्चीला साबित हुआ है। मार्च से अब तक यूट्यूब, और इंस्टाग्राम एवं फेसबुक की मूल कंपनी मेटा ने कई मुकदमों में समझौता किया है या हर्जाने के रूप में 17 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की रकम चुकाई है। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया कि कंपनियों ने लापरवाही बरती, जानबूझकर ऐसा डिजाइन तैयार किया, जिससे बच्चों को सोशल मीडिया की लत लग जाये तथा सुरक्षा और निजता के बारे में जनता को गुमराह किया।

यदि इन मुकदमों को इस बात का संकेत माना जाये कि सरकारें और आम लोग सोशल मीडिया मंचों को किस नजरिए से देखने लगे हैं, तो आने वाले समय में ऐसे और भी मुकदमे सामने आ सकते हैं। इन मुकदमों के अलावा, सोशल मीडिया मंचों को कारोबार में भी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध तेजी से बढ़ रहे हैं और दुनियाभर में लगाये जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया उन पहले देशों में शामिल था, जिसने दिसंबर 2025 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया।

इसके कुछ ही समय बाद ब्रिटेन ने भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू कर दिया। फिलहाल, इन सोशल मीडिया मंचों पर नाबालिग उपयोगकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे देशों की संख्या 20 से अधिक हो गई है। इनमें यूनान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कनाडा जैसे देश शामिल हैं।

दुनियाभर में प्रस्तावित और लागू किए गए प्रतिबंधों में आयु सीमा, माता-पिता की सहमति संबंधी नियमों और उम्र की पुष्टि करने के तरीकों को लेकर अंतर है। कई देश विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर में स्नैपचैट, यूट्यूब, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक और ‘एक्स’ जैसे मंच शामिल हैं। ये प्रतिबंध केवल मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के कारण नहीं लगाए जा रहे हैं।

इनमें से कुछ के पीछे विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया मंचों को लेकर राजनीतिक चिंताएं हैं, जबकि कुछ का उद्देश्य बच्चों की निजता की रक्षा करना है। हालांकि, बच्चों के लिए सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाने वाली लगभग हर सरकार इसके लिए एक कारण के रूप में उनके मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देती है। सवाल यह है कि क्या ये प्रतिबंध बच्चों के समक्ष मौजूद मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान हैं?

मैं डिजिटल मीडिया और मार्केटिंग के क्षेत्र में शोध करता हूं तथा नयी तकनीकों के प्रभावों का आकलन करता हूं। मुझे इस बात पर संदेह है कि इन मंचों तक पहुंच पर प्रतिबंध लगाने से वास्तव में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा या नहीं। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जोनाथन हाइट की 2024 में प्रकाशित पुस्तक ‘द एंग्जायटी जनरेशन’ के बाद से सोशल मीडिया के आलोचकों ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर अपना ध्यान और अधिक केंद्रित किया है।

हाइट का तर्क है कि सोशल मीडिया बच्चों के सामाजिक और तंत्रिका संबंधी विकास को बाधित करता है। उनके अनुसार नींद की कमी, बार-बार ध्यान भटकना, लत, अकेलापन, दूसरों से अपनी तुलना करने और हर काम में पूर्णता हासिल करने की प्रवृत्ति के कारण बच्चों में चिंता और अवसाद की समस्या बढ़ रही है। वर्ष 2026 के एक अध्ययन में पाया गया कि 14 से 20 वर्ष आयु वर्ग में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रस्त होने की आशंका 50 साल पहले इसी आयु वर्ग के लोगों की तुलना में 100 प्रतिशत से भी अधिक है।

सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल और स्क्रीन पर बिताया जाने वाला अधिक समय नाबालिगों के लिए पहले से ही चुनौतीपूर्ण स्थिति को और गंभीर बना रहा है। वर्ष 2021 में अनुमान लगाया गया था कि दुनियाभर में 20.5 प्रतिशत बच्चों में चिंता के लक्षण सामान्य से अधिक पाए गए, जबकि 25.2 प्रतिशत में अवसाद के बढ़े हुए लक्षण मिले। इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।

इनमें बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की बेहतर पहचान और उनके प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ-साथ कोविड-19 महामारी के कारण सामाजिक जीवन में आये व्यवधान भी शामिल हैं। जब दुनियाभर में लोग घरों में रहने को मजबूर हुए और कामकाज, पढ़ाई तथा सामाजिक मेलजोल के लिए ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर हो गए, तो सामाजिक अलगाव और अकेलेपन की प्रवृत्ति बढ़ी। इन चिंताओं को देखते हुए, कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाना वैसा ही है, जैसे शराब या सिगरेट खरीदने के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय करना।

लेकिन इन लत लगाने वाले और संभावित रूप से हानिकारक पदार्थों के विपरीत, सोशल मीडिया के कुछ फायदे भी हैं। खासकर उन किशोरों के लिए, जो अपने स्थानीय समुदाय से कटा हुआ महसूस करते हैं और ऐसे लोगों से जुड़ना चाहते हैं, जो उन्हीं की तरह महसूस करते हैं। सोशल मीडिया मंच दुनियाभर के लोगों को आपस में जुड़ने और समान विचारधारा वाले समूहों के साथ समुदाय बनाने का अवसर प्रदान करते हैं।

ये आत्म-अभिव्यक्ति और नागरिक गतिविधियों में भागीदारी के लिए भी एक मंच उपलब्ध कराते हैं। अमेरिका में किशोरों पर किए गए ‘प्यू रिसर्च सेंटर’ के एक सर्वेक्षण में 80 प्रतिशत किशोरों ने कहा कि सोशल मीडिया उन्हें अपने दोस्तों के जीवन में हो रही घटनाओं से जुड़े रहने में मदद करता है। ऑस्ट्रेलिया फिलहाल उन सोशल मीडिया मंचों पर जुर्माने की राशि बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो उसके निर्धारित नियमों का पालन नहीं करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने सिफारिश की है कि बच्चों के लिए ऑनलाइन क्या बेहतर है, इस पर होने वाली चर्चा में उन्हें भी शामिल किया जाए। जाहिर है, इसका मतलब यह नहीं है कि 12 साल की आयु वाले बच्चों को नियामक एजेंसियों की जिम्मेदारी सौंप दी जाए। हालांकि, बच्चे ऑनलाइन मंच पर किन चीजों को महत्व देते हैं, इंटरनेट के इस्तेमाल से उन्हें क्या लाभ मिलता है और किन कारणों से उनके लिए स्क्रीन से नजरें हटाना मुश्किल हो जाता है--इन मुद्दों पर उनकी राय सोशल मीडिया मंचों और शैक्षिक कार्यक्रमों में बदलाव लाने में मदद कर सकती है।

इससे बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में अधिक सुरक्षित तरीके से जुड़ने और इंटरनेट के इस्तेमाल तथा जीवन की अन्य गतिविधियों के बीच स्वस्थ संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

Continue reading on the app

  Sports

Asian Para Games: 10 मीटर एयर राइफल में मोना ने जीता गोल्ड, अवनि को सिल्वर से करना पड़ा संतोष

एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत की मोना अग्रवाल ने कमाल कर दिया. मोना ने 10 मीटर एयर राइफल (एसएच1) प्रतियोगिता में दमदार खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल पर निशाना लगाया. फाइनल में मोना ने अपने हमवतन अवनि लेखरा को पछाड़कर मेडल जीता. इस भारत ने 10 मीटर एयर राइफल में भारत को सोने का तमगा दिलाया. Mon, 19 Oct 2026 13:42:14 +0530

  Videos
See all

Jyotiraditya Scindia On Digvijay Singh | “ दिग्विजय सिंह कभी-कभी चीजें भूल जाते हैं” #ytshorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-19T08:15:38+00:00

UP Driving License News: अब परमानेंट DL बनवाने के लिए देने होंगे ज्यादा पैसे? | N18S | Shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-19T08:08:53+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers