इजराइली कंपनी के विज्ञापनों के जरिए जासूसी की कोशिश:बिना क्लिक के डिवाइस में घुस सकता है मालवेयर; UN और नाटो के नेटवर्क तक पहुंच
टोरंटो यूनिवर्सिटी की सिटिजन लैब की जांच में खुलासा हुआ है कि इजराइली कंपनी डिस्कवर टेक के विज्ञापनों के जरिए मोबाइल और कंप्यूटर में जासूसी मालवेयर (एक तरह का सॉफ्टवेयर) पहुंचाने की कोशिश की गई। इसके लिए यूजर को विज्ञापन पर क्लिक करने की जरूरत भी नहीं थी। जांच में 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइटों और 75 हजार से ज्यादा ऐप पर ऐसे विज्ञापनों के रिकॉर्ड मिले। इनमें संयुक्त राष्ट्र (UN) और नाटो के नेटवर्क तक विज्ञापन पहुंचने की बात भी सामने आई है। रिकॉर्ड में भारत में इस्तेमाल होने वाले ट्रूकॉलर, एमएक्स प्लेयर और लूडो स्टार जैसे ऐप भी शामिल हैं। मोबाइल नंबर जुटाने की भी कोशिश जांच में 'डार्क कार्टोग्राफर' नाम के एक अन्य समूह का भी पता चला। यह समूह विज्ञापनों के जरिए 30 से ज्यादा देशों में लोगों के मोबाइल नंबर पता लगाने की कोशिश कर रहा था। भास्कर एनालिसिस: 6 पॉइंट में समझें, कैसे होती थी जासूसी 1. निशाना कैसे बनाते थे? हैकिंग करने वाले सामान्य विज्ञापनों के जरिए फोन और कंप्यूटर तक पहुंचने की कोशिश करते थे। इसके लिए यूजर का विज्ञापन पर क्लिक करना जरूरी नहीं था। कुछ मामलों में विज्ञापन स्क्रीन पर दिखाई दिए बिना भी कोड डिवाइस तक पहुंच सकता था। 2. डिवाइस की पहचान कैसे करते थे? विज्ञापन से जुड़े कोड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होती थी कि कौन-सा व्यक्ति किस ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहा है। डिवाइस से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाती थी। 3. जासूसी सॉफ्टवेयर कैसे पहुंचता था? पहले जुटाई गई जानकारी के आधार पर चुनिंदा डिवाइस को निशाना बनाया जाता था। विज्ञापन के जरिए उन डिवाइस तक जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने की कोशिश होती थी। यूजर को इसकी जानकारी नहीं होती थी। 4. कितने बड़े पैमाने पर हुई कोशिश? जांच के मुताबिक, डिस्कवर टेक ने 161 देशों में विज्ञापन दिखाने की कोशिश की। कंपनी के एक सर्वर पर जनवरी से जून 2026 के बीच 36.4 लाख से ज्यादा संभावित यूजर्स के रिकॉर्ड मिले। इन यूजर्स के डिवाइस तक कोड पहुंचाने की व्यवस्था थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस नेटवर्क का दायरा इससे भी बड़ा हो सकता है। 5. हमले पकड़ में क्यों नहीं आए? विज्ञापन सामान्य दिखाई देते थे और हर यूजर को एक जैसा कोड नहीं भेजा जाता था। चुनिंदा डिवाइस को ही निशाना बनाए जाने से इस गतिविधि का पता लगाना मुश्किल हो सकता था। 6. गूगल ने क्या कार्रवाई की? रिपोर्ट के मुताबिक, डिस्कवर टेक 2020 से गूगल की प्रमाणित विज्ञापन कंपनियों की सूची में शामिल थी। सिटिजन लैब के खुलासे के बाद गूगल ने कंपनी को इस सूची से हटा दिया। ये आंकड़े विज्ञापनों के रिकॉर्ड से जुड़े हैं। सीधे हैक हुए डिवाइस या जासूसी के शिकार यूजर्स की संख्या नहीं है। बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स और रक्षा एजेंसियों तक पहुंचे विज्ञापन जांच में बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, फॉक्स न्यूज, सीबीसी और याहू जैसी वेबसाइटों पर संदिग्ध विज्ञापन दिखने के रिकॉर्ड मिले। इनके अलावा अमेरिका के रक्षा विभाग, स्वीडन के सशस्त्र बलों और नॉर्वे की पुलिस के नेटवर्क तक भी विज्ञापन पहुंचे। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के नेटवर्क पर भी ऐसे विज्ञापन दिखे। कई देशों के सरकारी कार्यालयों और चुनावों की निगरानी करने वाली संस्थाओं के नेटवर्क भी इनके निशाने पर रहे। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका: बोले-इसमें अमेरिका का फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
स्टारलिंक बोली-हम 5 सालों से भारत में काम कर रहे:हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार, मंजूरी मिलने का इंतजार
इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने कहा है कि वह भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान शेयर करते हुए बताया कि वह पिछले 5 सालों से भारतीय रेगुलेटर्स, इंडस्ट्री और ऑपरेटर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। इससे पहले इलॉन मस्क ने भारत में लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर सीधा हमला बोला था। मस्क की बयानबाजी के बाद रिलायंस ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया था। इसमें रिलायंस ने साफ किया था कि भारत में कानून का राज है और सभी आवेदकों के लिए एक ही प्रक्रिया लागू होती है। मस्क का आरोप- 'क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं स्टारलिंक के बयान से पहले एलोन मस्क ने X पर रिलायंस और मुकेश अंबानी को लेकर लगातार कई विवादित पोस्ट किए थे। 7 अक्टूबर को मस्क ने बिना किसी का नाम लिए लिखा कि कुछ भारतीय कारोबारी स्टारलिंक के अप्रूवल को रोक रहे हैं, जो भारत की जनता के खिलाफ अपराध है। इसके अगले ही दिन मस्क ने सीधा हमला बोलते हुए मुकेश अंबानी पर तंज कसा। मस्क ने लिखा- "क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? स्टारलिंक को दुनिया के 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और हम 5 साल से भारत सरकार के हर कानून का पालन कर रहे हैं, फिर भी अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला?" मस्क ने एक अन्य पोस्ट में अंबानी को 'प्राइम मिनिस्टर अंबानी' तक कह दिया और आरोप लगाया कि वे अपनी एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं। रिलायंस का पलटवार- 'नियम सबके लिए समान मस्क के आरोपों का जवाब देते हुए रिलायंस ने बयान जारी किया था। रिलायंस ने कहा कि हाल ही में रिलायंस और भारतीय बाजार को लेकर की गई टिप्पणियों को लेकर हम सही तथ्य रिकॉर्ड पर रखना चाहते हैं। हर भारतीय एंटरप्राइज की तरह रिलायंस भी एक ऐसे भारत में आगे बढ़ी है, जो निवेश और इनोवेशन का स्वागत करता है चाहे वह घरेलू हो या अंतरराष्ट्रीय रिलायंस ने आगे कहा कि भारत सरकार जैसा कि कह चुकी है, वह हर आवेदक के लिए चाहे वह भारतीय हो या विदेशी, एक ही प्रक्रिया लागू करती है। खुद जिओ की सैटेलाइट सर्विसेज भी अभी अप्रूवल और क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं।" रिलायंस- हम कॉम्पिटिशन से नहीं डरते स्टारलिंक का कॉम्पिटिशन में स्वागत करते हुए रिलायंस ने कहा कि वह कॉम्पिटिशन से कभी नहीं घबराती। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि हम सैटेलाइट कम्युनिकेशन में स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों के कॉम्पिटिशन का स्वागत करते हैं। जिओ समेत हर प्लेयर को भारत के लोगों की सेवा करनी चाहिए और देश के कानूनों और नीतियों का पालन करना चाहिए। संचार मंत्रालय की सफाई- नियम सब के लिए बराबर मस्क के सोशल मीडिया पर बयानबाजी शुरू करने के बाद भारत के संचार मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर स्थिति साफ की थी। मंत्रालय ने मस्क का सीधे तौर पर नाम लिए बिना कहा कि भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन फ्रेमवर्क पूरी तरह से निष्पक्ष है। स्टारलिंक- हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार रिलायंस और सरकार के बयानों के बीच स्टारलिंक ने अपनी तैयारी को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। स्टारलिंक ने X पर लिखा कि हमने 5 सालों तक भारत में रेगुलेटर्स और इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम किया है। हमने आवश्यक सरकारी अनुमतियों के साथ देश के भीतर ही गेटवे और डेडिकेटेड सिस्टम बनाए हैं ताकि भारतीय यूजर्स का डेटा सुरक्षित रहे। कंपनी का कहना है कि उसका इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार है और लाइसेंस मिलते ही वह भारत के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए तुरंत सेवाएं शुरू कर सकती है। सरकार बोली स्टारलिंक सहित 3 कंपनियों को लाइसेंस दिए 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने बताया कि देश में तीन सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों को लाइसेंस मिल चुके हैं। 1. रिलायंस जियो सैटकॉम 2. भारती एयरटेल सपोर्टेड यूटेलसेट वनवेब 3. इलॉन मस्क की स्टारलिंक हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि लाइसेंस पाने वाली इन सभी कंपनियों की सिक्योरिटी क्लीयरेंस अभी बाकी है। इसके अलावा सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का प्राइसिंग फ्रेमवर्क भी तय किया जा रहा है। सभी जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद ही भारत में ये सेवाएं शुरू हो सकेंगी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others








