पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने श्री आनंदपुर साहिब में व्यापक बाढ़ नियंत्रण उपायों के लिए 52 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसका उद्देश्य मानसून के दौरान होने वाले नुकसान से संवेदनशील गांवों को बचाना है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य तटबंधों को मजबूत करना, तटबंधों का निर्माण करना और टिकाऊ बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है ताकि मौसमी बाढ़ का निवासियों और उनकी संपत्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके। राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने मंजूरी की घोषणा करते हुए कहा कि यह कार्य मुख्य रूप से सतलुज और स्वान नदियों के किनारे स्थित बस्तियों को कवर करेगा - ये वे क्षेत्र हैं जो ऐतिहासिक रूप से भारी बाढ़ का सबसे ज्यादा शिकार रहे हैं।
सरकार का इरादा अस्थायी समाधानों के बजाय दीर्घकालिक, टिकाऊ सुरक्षा उपायों को लागू करने का है। भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने क्षेत्र में बाढ़ से बचाव के लिए बनाई जा रही प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी लाई है। 52 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी की जा चुकी हैं और काम शुरू हो चुका है। अगले दो सप्ताह में निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, 30 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।
स्वीकृत योजना में कई गांवों के लिए विशिष्ट उपायों का विवरण दिया गया है। दासग्रेन और महैन गांवों के लिए 1 करोड़ रुपये की लागत से तटबंध निर्माण कार्य किया जाएगा। हरसा बेला गांव, जहां पहले 4.5 करोड़ रुपये की बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं चलाई गई थीं, अब 2,200 फुट लंबे तटबंध के उन्नयन के लिए 9 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मेहंदली कलां में 8.75 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 1,800 फुट लंबा नया तटबंध बनाया जाएगा।
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रूस और भारत पर इस वक्त पूरी दुनिया की नजरें हैं। और इसी बीच रूस ने पहली बार अपनी संसद में भारत का नाम लेकर वह ऐलान किया है जिसने जबरदस्त तहलका मचा दिया है। यूरोप और अमेरिका की भारत के साथ ट्रेड डील ने रूस को पहली बार सतर्क और परेशान कर दिया है। इतना कि रूसी सरकार को अपनी संसद में पीएम मोदी और भारत का नाम लेकर बयान तक देने पड़ गए। और जब रूसी संसद में यह सब कुछ हो रहा था तब रूस के विदेश मंत्री लावरोव भावुक तक हो गए। दरअसल रूस की जनता और पूरी दुनिया यह जानना चाहती है कि क्या सही में भारत अब रूसी तेल नहीं खरीदेगा। भारत अमेरिका डील के बाद पहली बार इन सवालों का जवाब देने के लिए खुद रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव आए और कहा कि अमेरिका भारत को हमसे दूर कर रहा है और यह सब कुछ रूस की संसद में हो रहा था।
रूस ने कहा कि अमेरिका भारत को दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है। यह सीधे-सीधे ऊर्जा कूटनीति की लड़ाई है। जहां तेल सिर्फ कारोबार नहीं बल्कि रणनीतिक ताकत बन चुका है। सरगई लावरो ने संसद में खड़े होकर अपनी देश की जनता और दुनिया को बताया कि पुतिन के भारत दौरे से दोनों देशों के बीच में स्ट्रेटेजिक रिलेशनशिप मजबूत हुई थी। यानी मॉस्को यह संदेश देना चाहता था कि रिश्ते सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है भारत और रूस के। रूसी विदेश मंत्री सरगई लावो ने संसद में खड़े होकर अपने देश की जनता और दुनिया को यह तक बता दिया कि उन्होंने ट्रंप के अलावा किसी से यह बात नहीं सुनी कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।
यहां तक कि पीएम मोदी ने भी अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं कहा है। यह कहना है रूस के विदेश मंत्री का। रूस ने अपने देश के लोगों को यह तक बताया कि भारत हमारे साथ ही रहेगा और वैसे भी सूत्र भी यह बताते हैं कि भारत भी रूस को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। रूसी तेल खरीदना बंद नहीं करेगा। अब ऐसे में यह सवाल है तो कि क्या वाकई भारत सच में रूस से दूर जा रहा है या फिर यह सिर्फ एक वैश्विक शक्ति संतुलन की एक बड़ी रणनीतिक चाल है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर भारत ने ऐसा कोई भी ऐलान नहीं किया है कि वो रूसी तेल खरीदना बंद करेगा।
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