रूस और भारत पर इस वक्त पूरी दुनिया की नजरें हैं। और इसी बीच रूस ने पहली बार अपनी संसद में भारत का नाम लेकर वह ऐलान किया है जिसने जबरदस्त तहलका मचा दिया है। यूरोप और अमेरिका की भारत के साथ ट्रेड डील ने रूस को पहली बार सतर्क और परेशान कर दिया है। इतना कि रूसी सरकार को अपनी संसद में पीएम मोदी और भारत का नाम लेकर बयान तक देने पड़ गए। और जब रूसी संसद में यह सब कुछ हो रहा था तब रूस के विदेश मंत्री लावरोव भावुक तक हो गए। दरअसल रूस की जनता और पूरी दुनिया यह जानना चाहती है कि क्या सही में भारत अब रूसी तेल नहीं खरीदेगा। भारत अमेरिका डील के बाद पहली बार इन सवालों का जवाब देने के लिए खुद रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव आए और कहा कि अमेरिका भारत को हमसे दूर कर रहा है और यह सब कुछ रूस की संसद में हो रहा था।
रूस ने कहा कि अमेरिका भारत को दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है। यह सीधे-सीधे ऊर्जा कूटनीति की लड़ाई है। जहां तेल सिर्फ कारोबार नहीं बल्कि रणनीतिक ताकत बन चुका है। सरगई लावरो ने संसद में खड़े होकर अपनी देश की जनता और दुनिया को बताया कि पुतिन के भारत दौरे से दोनों देशों के बीच में स्ट्रेटेजिक रिलेशनशिप मजबूत हुई थी। यानी मॉस्को यह संदेश देना चाहता था कि रिश्ते सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है भारत और रूस के। रूसी विदेश मंत्री सरगई लावो ने संसद में खड़े होकर अपने देश की जनता और दुनिया को यह तक बता दिया कि उन्होंने ट्रंप के अलावा किसी से यह बात नहीं सुनी कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।
यहां तक कि पीएम मोदी ने भी अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं कहा है। यह कहना है रूस के विदेश मंत्री का। रूस ने अपने देश के लोगों को यह तक बताया कि भारत हमारे साथ ही रहेगा और वैसे भी सूत्र भी यह बताते हैं कि भारत भी रूस को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। रूसी तेल खरीदना बंद नहीं करेगा। अब ऐसे में यह सवाल है तो कि क्या वाकई भारत सच में रूस से दूर जा रहा है या फिर यह सिर्फ एक वैश्विक शक्ति संतुलन की एक बड़ी रणनीतिक चाल है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर भारत ने ऐसा कोई भी ऐलान नहीं किया है कि वो रूसी तेल खरीदना बंद करेगा।
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पाकिस्तानी सैनिक बलूच लिबरेशन आर्मी की कैद में है। पाकिस्तानी सैनिक, उनकी वर्दी, उनके हथियार सब के सब बलूच लिबरेशन आर्मी के कब्जे में। सात पाकिस्तानी सैनिकों को बंधक बना रखा है बीएलए ने और सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। अगर इनकी रिहाई चाहते हो तो उनकी मांगे मान लो। बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने ऑपरेशन हेरॉफ 2.0 के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 17 कर्मियों को पकड़ा। संगठन ने कहा कि शुरुआती जांच के बाद 10 लोगों को रिहा किया गया। जबकि सात सैनिक अब भी उसकी हिरासत में हैं। पाकिस्तानी सैनिक अपनी जुबान से अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं और उनका कहना है कि बीएलए की जो भी डिमांड्स हैं उसे पाक सेना जल्द से जल्द मान ले वरना यह अपनी जान नहीं बचा पाएंगे।
बीएलए ने दावा किया है कि इन सैनिकों को कथित बलूच राष्ट्र अदालत के सामने पेश किया गया जहां उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। बीएएलए ने इन सात कैदियों की रिहाई के बदले अपने लोगों की रिहाई की मांग की है और उसका कहना है कि इसके लिए महज 7 दिन का ही मौका पाकिस्तान के पास है। बीएलए का कहना है कि वह कैदी अदला बदली करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। संगठन का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय युद्धबंदी संबंधी सिद्धांतों के तहत यह प्रस्ताव रखा गया है। अगर पाकिस्तान की सेना उनके इस प्रस्ताव को नहीं मानती है तो फिर बीएलए आगे का कदम उठा लेगा।
जिस तरह से बीएलए ने ये वीडियो जारी किया है और पाकिस्तानी सेना की फजीहत की है अब इसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। जहां पाकिस्तानी सैनिक घुटनों के बल बैठे हुए हैं और अपनी जान बचाने की गुहार पाकिस्तानी सेना से लगा रहे हैं। वहीं बीएलए के जवान हाथों में बंदूक थामे पाकिस्तानी सेना पर अपना दहशत कायम कर रहे हैं।
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