लाल किले के पास धमाके की कड़ी सुलझी, श्रीनगर के डॉक्टरों और कट्टरपंथियों का खतरनाक प्लान आया सामने
जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में एक ऐसे आतंकी मॉड्यूल का पता चला है जिसे 'सफेदपोश' (व्हाइट-कॉलर) लोग चला रहे थे. अधिकारियों ने बताया कि कुछ डॉक्टरों और कट्टरपंथी उपदेशकों ने मिलकर 'अंसार अंतरिम' नाम का एक नया आतंकी संगठन खड़ा किया था. इस ग्रुप का मुख्य मकसद घाटी और देश के अन्य हिस्सों में अशांति फैलाना था.
अब इस केस की कमान नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने संभाल ली है. जांच में पता चला है कि इस ग्रुप का एक अहम सदस्य डॉक्टर उमर-उन-नबी था, जिसकी मौत 10 नवंबर को लाल किले के बाहर एक धमाके में हो गई थी.
ईदगाह में बनी थी संगठन की रूपरेखा
पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2022 में श्रीनगर के ईदगाह इलाके में एक गुप्त मीटिंग हुई थी. इसमें डॉक्टर मुज़मिल गनी, उमर-उन-नबी और अदील राथर जैसे पढ़े-लिखे लोगों के साथ मौलवी इरफान और कारी आमिर भी शामिल थे. इसी मीटिंग में तय हुआ कि 'अदील राथर' इस गुट का मुखिया (अमीर) होगा और मुज़मिल गनी पैसों का हिसाब-किताब देखेगा. इन लोगों ने पूछताछ में बताया कि जब पुराने आतंकी संगठनों से उनका संपर्क टूट गया, तो उन्होंने खुद का नया गुट बनाने का फैसला किया.
हरियाणा से मंगाया सामान
यह मॉड्यूल कितना खतरनाक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने विस्फोटक बनाने के लिए जरूरी सामान हरियाणा के सोहना, नूंह और फरीदाबाद से जुटाया था. डॉक्टर उमर-उन-नबी ने इंटरनेट पर वीडियो देखकर आईईडी (IED) बनाना सीखा था. उसने 'TATP' जैसा खतरनाक विस्फोटक भी तैयार कर लिया था, जिसका इस्तेमाल अक्सर बड़े आतंकी हमलों में होता है.
जांच में यह भी सामने आया कि उमर एक आत्मघाती हमले (सुसाइड अटैक) की योजना बना रहा था. वह दिल्ली की किसी भीड़भाड़ वाली जगह या किसी बड़े धार्मिक स्थल को निशाना बनाना चाहता था.
कैसे खुला यह राज?
इस पूरे नेटवर्क का सुराग तब मिला जब 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम में 'जैश-ए-मोहम्मद' के पोस्टर दिखाई दिए. पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाली और तीन युवकों को पकड़ा, तो कड़ियां जुड़ती चली गईं. इन्हीं की निशानदेही पर मौलवी इरफान को पकड़ा गया, जिसने इन डॉक्टरों को कट्टरपंथ की राह पर धकेला था. जब पुलिस ने डॉक्टर मुज़मिल गनी को गिरफ्तार कर विस्फोटक बरामद किए, तो इस ग्रुप में भगदड़ मच गई. माना जा रहा है कि इसी घबराहट की वजह से लाल किले के पास वाला धमाका समय से पहले ही हो गया.
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नेपाल में राजतंत्र की वापसी चाहता है आरपीपी, मेनिफेस्टो में हिंदू राष्ट्र का भी प्रस्ताव
काठमांडू, 15 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने नेपाल में राजतंत्र की वापसी की मांग मैनिफेस्टो के जरिए उठाई है। अपने चुनावी घोषणापत्र में पृथ्वी पथ को राष्ट्र निर्माण का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया है। इसमें सेक्युलरिज्म को खारिज करने और वैदिक सनातन धर्म पर आधारित हिंदू राष्ट्र बनाने की बात है।
पार्टी अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन ने शनिवार को काठमांडू में पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में इस घोषणापत्र को पेश किया, जिसमें नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने, राजतंत्र की बहाली, प्रांतीय संरचना को समाप्त कर दो-स्तरीय शासन (केंद्र और स्थानीय स्तर) अपनाने, चुनावी सुधार और अच्छे शासन पर जोर दिया गया है।
द हिमालयन टाइम्स के अनुसार, आरपीपी ने आगामी 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा चुनाव के लिए इस घोषणापत्र को तैयार किया है, जिसमें आर्थिक परिवर्तन के छह स्तंभों वाले मॉडल को नेपाल की समृद्धि का आधार बताया गया है।
पार्टी ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, स्थानीय क्षेत्रों को स्वतंत्र बनाने और पृथ्वी पथ (जो पृथ्वीनारायण शाह के दिव्य उपदेश से प्रेरित है) को शासन की भावी दिशा के रूप में अपनाया है।
घोषणापत्र में राजनीतिक स्थिरता, सुशासन, आर्थिक सुधार और सामाजिक न्याय के माध्यम से समृद्धि को बढ़ावा देने पर फोकस है।
इसके अलावा, पूर्व-पश्चिम महेंद्र राजमार्ग को तीन वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने और अगले 10 वर्षों को ऊर्जा उत्पादन का दशक घोषित करने का वादा किया गया है।
जीरो टॉलरेंस की नीति और अच्छे शासन के प्रस्ताव में हम कुचले जाएंगे, भ्रष्ट नहीं होंगे का आक्रामक नारा शामिल किया गया है। भ्रष्टाचार से लड़ने के इस वादे को अमल में लाने के लिए, पार्टी ने 1990 के बाद बड़े नेताओं और कर्मचारियों की संपत्ति की जांच करने और गैर-कानूनी संपत्ति जब्त करने के लिए कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है।
इसने जाति भेदभाव और छुआछूत समेत सभी तरह के धार्मिक भेदभाव को अपराध बनाने का प्रण भी दिखता है। पार्टी का दावा है कि उसका विजन नेपाल में सभी धार्मिक समुदायों के सम्मान की रक्षा करना है, ताकि धार्मिक समानता और आजादी पक्की हो सके।
--आईएएनएस
केआर/
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