महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में उस समय बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक रूप से महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की "जूँ काटने" वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की। यह भड़काऊ घोषणा सपकाल की उस हालिया टिप्पणी के बाद हुई जिसमें उन्होंने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की थी।
शिवाजी महाराज स्मारक पर विरोध प्रदर्शन
अहिल्यानगर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक के सामने आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान यह विवादास्पद घोषणा की गई। भाजपा नेता और कार्यकर्ता सपकाल के बयान की निंदा करने के लिए एकत्रित हुए और आरोप लगाया कि उनकी तुलना पूजनीय मराठा योद्धा की विरासत का अपमान है। विरोध प्रदर्शन के दौरान, पार्टी कार्यकर्ताओं ने जूता प्रदर्शन किया, नारे लगाए और सपकाल की तस्वीर को एक सार्वजनिक स्थान पर रखा, जिसे प्रदर्शनकारियों ने पैरों से रौंद दिया। विरोध स्थल पर, भाजपा कार्यकर्ताओं ने घोषणा की कि जो कोई भी सपकाल की जीभ काटेगा, उसे अहिल्यानगर भाजपा इकाई द्वारा 10 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
एक भाषण में पार्टी पदाधिकारी ने सपकाल की टिप्पणियों की आलोचना की और नकद पुरस्कार की घोषणा करते हुए कठोर भाषा का प्रयोग किया। इस बयान की विपक्षी नेताओं ने व्यापक निंदा की है, जिन्होंने इसे खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी तनाव को बढ़ा सकती है और लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर कर सकती है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपकाल ने मालेगांव नगर निगम में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने को लेकर हुए एक अलग विवाद पर टिप्पणी की। अपने रुख का बचाव करते हुए सपकाल ने कहा था कि जिस प्रकार छत्रपति शिवाजी महाराज ने लोगों में साहस और स्वतंत्रता की भावना को प्रेरित किया, उसी प्रकार टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी और उन्हें प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए।
Continue reading on the app
पाकिस्तान का करीबी दोस्त अज़रान इन दिनों भारत पर आरोप लगाए फिर रहा है। आरोप ऐसा कि भारत ने उसके दुश्मन देश आर्मेनिया को इजराइल की घातक तकनीक सौंप दी। दरअसल यह पूरा मामला है किलर ड्रोन का जब हाल ही में आर्मेनिया की कंपनी दवारो ने ड्रैगन फ्लाई 3 नाम का लॉटरीिंग म्यनिशन पेश किया जिसके पेश होने के बाद से असली घमासान शुरू हो गया है और अजरबैजान ने यह दावा किया है कि यह ड्रोन दिखने और क्षमता में बिल्कुल इजराइली हेरोप ड्रोन जैसा है और इसकी टेक्नोलॉजी भारत के जरिए अर्मेनिया तक पहुंची है। अज़र बाइजान ने जिस इजरायली है ड्रोन की तकनीक इस ड्रैगन फ्लाई थ्री ड्रोन में होने की बात कही है, वह इजराइल का एक घातक ड्रोन है जिसे इजराइल एयररोस्पेस इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है और यह कोई साधारण ड्रोन नहीं बल्कि ड्रोन और मिसाइल का खतरनाक कॉम्बिनेशन है। यह ड्रोन करीब 9 घंटे तक हवा में मंडराते रहने की क्षमता रखता है और इस दौरान यह टारगेट की तलाश करता है और सही वक्त आने पर सीधे उससे टकराकर खुद को उड़ा देता है।
करीब 23 किमी विस्फोटक के साथ और 1000 किमी से ज्यादा रेंज इसे बना देती है एक घातक साइलेंट शिकारी। अर्मेनिया के पास ऐसी ही सेम तकनीक वाली ड्रोन होने का दावा कर रहा है तो यह दावा उसके डर को दिखाता है। दरअसल साल 2020 के नारगोन काराबाक युद्ध में अज़रबजान ने इजराइल की मदद से लिए गए इन्हीं हेरोप ड्रोंस का इस्तेमाल आर्मेनिया के खिलाफ किया था। सलिए अगर अब आर्मेनिया के पास भी हैरोप जैसी ही क्षमता आती है तो अज़रान की बढ़ती हुई बेचैनी को साफ-साफ समझा जा सकता है। हालांकि अज़र भाईजान के इन दावों की कहीं भी पुष्टि नहीं हुई है और इस दावे पर भारत की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आर्मेनिया भारत के रक्षा उत्पादों का एक बड़ा ग्राहक है। जिसे भारत ने पिनाका से लेकर आकाश जैसी मिसाइल और स्वाति वेपन लोकेटिंग रडदार जैसे उपकरण दे रखे हैं। जो कि भारत और आर्मेनिया के बीच के अच्छे रिश्तों को दिखाता है। इसी बीच आपको यह भी बता दें कि इजराइल और अज़र भाईजान के रिश्ते मजबूत होते दिख रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक एमओयू साइन किया है और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई मुलाकात में यह बात सामने आई। इजराइल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने साफ किया है कि वह सभी अंतरराष्ट्रीय सौदों में कानून और रक्षा मंत्रालय के निर्देशों का पालन करती है।
Continue reading on the app