Responsive Scrollable Menu

Best Monsoon Car Accessories: मानसून में कार को चमकदार और सुरक्षित रखने के लिए खरीदें ये जरूरी गैजेट्स

मानसून अपने साथ ठंडी हवाएं और राहत जरूर लेकर आता है, लेकिन कार चालकों के लिए यह मौसम कई नई चुनौतियां भी पैदा करता है। तेज बारिश के दौरान विंडशील्ड पर पानी की बूंदें जम जाना, शीशों पर धुंध छा जाना, केबिन में नमी बढ़ना और कार के अंदर कीचड़ पहुंचना आम समस्याएं हैं। इन वजहों से ड्राइविंग मुश्किल होने के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। अच्छी बात यह है कि बाजार में कुछ ऐसी किफायती कार एक्सेसरीज उपलब्ध हैं, जो न केवल आपकी कार को साफ-सुथरा रखेंगी बल्कि हर सफर को पहले से ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक भी बनाएंगी।

हाई-प्रेशर वाटर स्प्रे से मिनटों में करें सफाई

बारिश के मौसम में सड़क का कीचड़ और धूल कार की बॉडी, व्हील और अंडरबॉडी पर तेजी से जमा हो जाती है। ऐसे में हाई-प्रेशर वाटर स्प्रे एक उपयोगी उपकरण साबित होता है। इसकी तेज पानी की धार जमी हुई गंदगी को आसानी से हटा देती है, जिससे कार की चमक बनी रहती है और जंग लगने की संभावना भी कम होती है।

इसे भी पढ़ें: Global हिट बनी Maruti Fronx! 90 देशों में डिमांड, 2 लाख Export का Record

वाइपर डिटर्जेंट टैबलेट बढ़ाएगी विजिबिलिटी

सिर्फ वाइपर चलाना पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि कई बार शीशे पर धूल और चिकनाई की परत बनी रहती है। वाइपर वॉटर टैंक में डिटर्जेंट टैबलेट डालने से पानी अधिक प्रभावी तरीके से सफाई करता है। इससे विंडशील्ड पर जमा दाग, धूल और गंदगी आसानी से हट जाती है और सामने का दृश्य साफ दिखाई देता है।

रेन रिपेलेंट से पानी की बूंदें नहीं टिकेंगी

रेन रिपेलेंट लिक्विड विंडशील्ड पर एक अदृश्य सुरक्षात्मक परत बना देता है। इसके बाद बारिश की बूंदें शीशे पर रुकने की बजाय फिसलकर नीचे गिर जाती हैं। खासकर हाईवे ड्राइविंग के दौरान यह एक्सेसरी विजिबिलिटी को काफी बेहतर बनाती है और कई बार हल्की बारिश में वाइपर चलाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

एंटी-रेन वाटरप्रूफ फिल्म का बढ़ता क्रेज

आजकल कार मालिकों के बीच एंटी-रेन वाटरप्रूफ फिल्म काफी लोकप्रिय हो रही है। इसे साइड ग्लास, रियर ग्लास और ओआरवीएम (साइड मिरर) पर लगाया जाता है। यह फिल्म पानी की बूंदों को शीशे पर जमने नहीं देती, जिससे लेन बदलते समय और पार्किंग के दौरान आसपास का दृश्य स्पष्ट दिखाई देता है। यही फिल्म बाइक हेलमेट के वाइजर पर भी उपयोग की जा सकती है।

एंटी-फॉग स्प्रे देगा क्रिस्टल क्लियर व्यू

बारिश के दौरान कार के अंदर और बाहर के तापमान में अंतर होने से शीशों पर धुंध जम जाती है। एंटी-फॉग स्प्रे इस समस्या का आसान समाधान है। इसे शीशों पर लगाने से फॉग बनने की संभावना काफी कम हो जाती है और रात या सुबह की ड्राइविंग भी सुरक्षित रहती है।

इन जरूरी एक्सेसरीज को भी रखें कार में

मानसून के दौरान केवल विजिबिलिटी ही नहीं, बल्कि केबिन की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। वॉटरप्रूफ सीट कवर और रबर फ्लोर मैट कार के इंटीरियर को गीला और गंदा होने से बचाते हैं। वहीं वायरलेस डोर वार्निंग लाइट रात के समय दरवाजा खुलने पर अन्य वाहनों को सतर्क करती है। इसके अलावा टॉर्च, फर्स्ट एड किट, टो रोप, जंप स्टार्ट केबल और पोर्टेबल एयर पंप (टायर इन्फ्लेटर) जैसी इमरजेंसी एक्सेसरीज किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में बेहद काम आती हैं।

मानसून में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए अपनाएं ये स्मार्ट तैयारी

बरसात के मौसम में केवल अच्छी ड्राइविंग ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि सही कार एक्सेसरीज भी आपकी सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं। थोड़े से निवेश से आप अपनी कार को साफ, सुरक्षित और हर मौसम के लिए तैयार रख सकते हैं। यदि आप मानसून में बिना किसी परेशानी के आरामदायक और सुरक्षित सफर करना चाहते हैं, तो इन उपयोगी एक्सेसरीज को अपनी कार का स्थायी हिस्सा जरूर बनाएं।

- डॉ. अनिमेष शर्मा

Continue reading on the app

चुनाव आयोग के अधिकारियों को नहीं, मतदाता सूची की नीति बदलिए

किसी भी लोकतंत्र की मजबूती के लिए पारदर्शी, विश्वसनीय और समावेशी मतदाता सूची जरूरी है। लेकिन भारत के नेताओं और नौकरशाहों के गठजोड़ ने इसे एक हास्यास्पद विषय बना दिया है। यदि प्रत्येक व्यक्ति के जन्मभूमि पर ही मतदाता पहचान पत्र बना दिया जाए, और उसके पलायन के बावजूद उसका स्थाई नंबर नहीं बदलने दिया जाए, तो इससे बहुत सारे गड़बड़ झाले को रोका जा सकता है। इसे आधार कार्ड से लिंक करने पर व्यक्ति की वास्तविक पहचान भी सुनिश्चित होती है। लेकिन हमारी नौकरशाही ऐसा कभी नहीं होने देगी।

भारत में राजनीतिक कारणों से जितने पाकिस्तानियों और बांग्लादेशियों के मतदाता पहचान पत्र बनाए गए, उसके लिए तत्कालीन बीएलओ, एसडीएम और डीएम के अलावा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि जिम्मेदार नहीं हैं, तो कौन है? क्या कभी इस लापरवाही की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई? इनकी जमीनी लापरवाहियों या राजनीतिक पक्षपात के लिए इन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए, न कि राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाए जाने चाहिए।

इसे भी पढ़ें: सुप्रीम कटघरे में अब CEC को मुकदमों से बचाने वाला 'अभयदान', क्या है धारा-16 का 'कवच' जिस पर SC करेगा सुनवाई?

एडॉल्फ हिटलर ने कहा था कि यदि तुम एक झूठ को सौ बार दोहराओगे तो वह लोगों को सच लगने लगेगा। जिन नेताओं ने अल्पसंख्यकों की आड़ में, झुग्गी-झोपड़ियों की आड़ में गलत मतदाता पहचान पत्र बनवा लिए, जब एसआईआर में ये पकड़ में आने लगे तो विपक्ष का बेचैन होना स्वाभाविक है। चाहे कांग्रेस हो भाजपा हो या क्षेत्रीय दल, अब इस खेल में सभी पारंगत दिख रहे हैं। यदि नौकरशाही तभी इस खेल को पकड़ लेती तो आज चुनाव आयोग को इतनी कड़ी मशक्कत नहीं करनी पड़ती। इस पूरे खेल में ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा की मतदाता सूची में जो गड़बड़झाला है, उसे भी यदि समय रहते नहीं रोका गया, तो मतदाताओं को न्याय मिल पाएगा, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। क्योंकि हर चुनाव में मतदाता सूची बदल जाना राजनीतिक व प्रशासनिक खेल नहीं तो क्या है? हर चुनाव के वक्त कुछ ऐसे वास्तविक लोग मिल जाएंगे, जिनके नाम ही मतदाता सूची से गायब मिलेंगे। आखिर इस लापरवाही के लिए सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित करेगा।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति मतदाता के मताधिकार में निहित है। यह अधिकार तभी सार्थक है, जब प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो और कोई अपात्र व्यक्ति गलत तरीके से उसमें शामिल न रहे। इसलिए मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन करने और उसकी शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि कोई अधिकारी इसमें लापरवाही बरतता पाया जाता है तो उसके लिए भी सख्त सजा का प्रावधान हो।

जब भी मतदाता सूची में गड़बड़ियों, नाम कटने, दोहरी प्रविष्टियों अथवा पात्र मतदाताओं के छूट जाने की शिकायतें सामने आती हैं, तो चुनाव आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगते हैं। लेकिन क्या हर समस्या के लिए मैदानी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराना उचित है? या हमें उन नीतियों, नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी चाहिए, जिनके तहत मतदाता सूची तैयार की जाती है? नए मतदाताओं के नाम जोड़ना और मृतकों के नाम डिलीट करना चुनाव आयोग की वार्षिक जिम्मेदारी है। इस हेतु हर वर्ष अभियान चलाया जाता है।

सवाल है कि अधिकारियों की जवाबदेही के साथ नीतिगत सुधार भी जरूरी है। इसके लिए संसद को भी सचेष्ट होना पड़ेगा। मतदाता सूची तैयार करने का काम व्यापक और संवेदनशील है। इसमें करोड़ों नागरिकों के विवरण का सत्यापन, नए मतदाताओं का पंजीकरण, मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, स्थानांतरित नागरिकों के विवरण का अद्यतन और दोहरी प्रविष्टियों की पहचान जैसे अनेक कार्य शामिल होते हैं।

यदि इन प्रक्रियाओं में त्रुटियां होती हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जानबूझकर लापरवाही, पक्षपात या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। लेकिन प्रत्येक प्रशासनिक त्रुटि को केवल कर्मचारियों की विफलता मान लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

यह भी देखना होगा कि निर्धारित समयसीमा व्यावहारिक है या नहीं, उपलब्ध संसाधन पर्याप्त हैं या नहीं, सत्यापन की प्रक्रिया कितनी सरल है और नागरिकों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए कितनी आसानी से अवसर मिलता है।

सवाल है कि मतदाता सूची की नीति में किन बदलावों की जरूरत है?

पहला, प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम जोड़ने की प्राथमिकता। मतदाता सूची की शुद्धता का अर्थ केवल गलत नाम हटाना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक को सूची में शामिल करना भी है। किसी पात्र मतदाता का नाम हटने या दर्ज न होने से उसके मताधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए नाम हटाने की प्रक्रिया में उचित सूचना, सत्यापन और अपना पक्ष रखने का अवसर सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

दूसरा, नाम काटने की प्रक्रिया पारदर्शी हो। किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने के लिए स्पष्ट नियम, सत्यापन योग्य आधार और निर्धारित प्रक्रिया होनी चाहिए। नागरिक को, जहां नियमों के तहत आवश्यक हो, प्रस्तावित कार्रवाई की सूचना और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए। केवल तकनीकी रिकॉर्ड या अपूर्ण जानकारी के आधार पर किसी पात्र मतदाता का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

तीसरा, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के मामलों में सावधानी जरूरी है। मृत व्यक्तियों के नाम हटाना और स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के रिकॉर्ड को अद्यतन करना आवश्यक है। लेकिन एक ही नाम, समान आयु या मिलते-जुलते पते के आधार पर किसी व्यक्ति को गलत तरीके से सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। पहचान और निवास के सत्यापन के लिए विश्वसनीय प्रक्रिया जरूरी है।

चौथा, तकनीक का उपयोग हो, लेकिन मानवीय सत्यापन के साथ जरूरी है। डिजिटल डेटाबेस, ऑनलाइन आवेदन और स्वचालित प्रणाली मतदाता सूची को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, तकनीकी गड़बड़ी, डेटा में विसंगति या गलत मिलान की स्थिति में मानवीय समीक्षा और सुधार का अवसर उपलब्ध होना चाहिए। तकनीक नागरिकों की सुविधा बढ़ाए, उनके अधिकारों में बाधा न बने।

पांचवां, शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित हो। नाम जुड़वाने, संशोधन कराने या गलत तरीके से नाम हटाए जाने की शिकायतों के लिए सरल और समयबद्ध व्यवस्था होनी चाहिए। नागरिकों को आवेदन की स्थिति जानने, निर्णय का कारण समझने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपील करने की सुविधा मिलनी चाहिए।

छठा, अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण मिलना चाहिए। मतदाता सूची तैयार करने वाले कर्मचारियों पर यदि सीमित समय में अत्यधिक काम का दबाव है, तो त्रुटियों की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए पर्याप्त कर्मचारी, व्यावहारिक समयसीमा, स्पष्ट दिशा-निर्देश और उचित प्रशिक्षण भी नीतिगत सुधार का हिस्सा होने चाहिए।

सबसे बड़ी बात यह कि राजनीतिक विवाद से ऊपर उठकर  समीक्षा हो। मतदाता सूची का मुद्दा अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन जाता है। एक पक्ष नामों को हटाए जाने पर सवाल उठाता है, तो दूसरा पक्ष सूची की शुद्धता और दोहरी प्रविष्टियों को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर देता है।

इन दोनों चिंताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। न तो हर नाम हटाए जाने को गलत मानना उचित है और न ही प्रत्येक कार्रवाई को स्वतः सही मान लेना। महत्वपूर्ण यह है कि हर निर्णय के पीछे स्पष्ट आधार हो, नियम सभी पर समान रूप से लागू हों और शिकायतों का समाधान प्रमाणों के आधार पर किया जाए। मतदाता सूची की विश्वसनीयता केवल चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं है। यह नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया पर जनता के भरोसे से जुड़ा विषय है।

सवाल है कि अब आगे का रास्ता क्या है? तो जवाब यही होगा कि मतदाता सूची की नीति की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए। इसमें राजनीतिक दलों, नागरिक समाज, चुनाव संबंधी विशेषज्ञों और आम मतदाताओं से सुझाव लिए जा सकते हैं। नाम जोड़ने और हटाने के आंकड़े, शिकायतों की स्थिति तथा उनके निस्तारण की जानकारी उचित गोपनीयता और कानूनी सीमाओं के भीतर सार्वजनिक की जानी चाहिए।

साथ ही, मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि कोई पात्र नागरिक अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं के कारण अपने मताधिकार से वंचित न हो और सूची की शुद्धता भी बनी रहे। यदि किसी के पास वैध मतदाता पहचान पत्र है, लेकिन मतदाता सूची से उनका नाम नदारत है तो ऐसे व्यक्तियों को वोट डालने का अधिकार मिलना चाहिए।

वस्तुतः चुनाव आयोग के अधिकारियों की जवाबदेही जरूरी है, लेकिन जवाबदेही का अर्थ केवल दोष तय करना नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमियों को दूर करना भी है। यदि नियम जटिल हैं, प्रक्रियाएं अस्पष्ट हैं या संसाधन अपर्याप्त हैं, तो केवल अधिकारियों को बदलने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए ऐसी मतदाता सूची चाहिए, जिसमें प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम हो, प्रत्येक गलत प्रविष्टि को निष्पक्ष प्रक्रिया से सुधारा जाए और किसी का मताधिकार मनमाने ढंग से प्रभावित न हो।

इसलिए मूल प्रश्न यही है—क्या हम हर विवाद के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई तक सीमित रहेंगे, या ऐसी पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-अनुकूल नीति बनाएंगे, जिससे गलतियों की संभावना ही कम हो जाए? मतदाता सूची की नीति में सुधार लोकतंत्र के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

Continue reading on the app

  Sports

Shubman Gill की Ranji Trophy में वापसी, वनडे में दोहरा शतक जड़ने के बाद मैदान पर

 भारत के टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल की पंजाब की तरफ से रणजी ट्रॉफी में वापसी रविवार से देशभर में शुरू होने वाले इस घरेलू प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट के दूसरे दौर का मुख्य आकर्षण होगी। गिल पंजाब के पहले दौर के मैच में नहीं खेल पाए थे। उनकी अनुपस्थिति में भारत की अंडर19 टीम के पूर्व कप्तान उदय सहारन ने टीम की कप्तानी की। इस मैच में पंजाब ने असम के खिलाफ पहली पारी में बढ़त के आधार पर तीन अंक हासिल किए थे। सत्र के दूसरे दौर में पंजाब का सामना छत्तीसगढ़ से होगा।

 गिल का हाल में प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे श्रृंखला में 334 रन बनाए। गिल ने दूसरे वनडे में 133 गेंदों पर नाबाद 223 रन बनाए और इस प्रारूप में सबसे तेज दोहरा शतक का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। ग्रुप बी के एक अन्य मुकाबले में कर्नाटक ऑलराउंडर श्रेयस गोपाल के नेतृत्व में अलूर में सौराष्ट्र का सामना करेगा। इस मैच में उसे बल्लेबाज रविचंद्रन स्मरण की कमी खलेगी जिन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारत ए टीम में शामिल किया गया है। 

कर्नाटक को हालांकि चोट से उबरने वाले प्रमुख तेज गेंदबाज विद्वथ कावेरप्पा और वैशाक विजयकुमार की वापसी से मजबूती मिलेगी। ग्रुप बी में शीर्ष पर काबिज हैदराबाद की टीम आंध्र के खिलाफ अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखने की कोशिश करेगी। उसने पहले मैच में त्रिपुरा को पारी और 40 रन से हराकर बोनस अंक हासिल किया था। ग्रुप डी में मुंबई की टीम हिमाचल प्रदेश के खिलाफ उपकप्तान और सलामी बल्लेबाज आयुष म्हात्रे के बिना खेलेगी जो चोटिल हैं। 

सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल भी इस मैच में नहीं खेल पाएंगे क्योंकि वह न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारत ए टीम का हिस्सा हैं। मुंबई ने दिव्यांश सक्सेना और अंगकृष रघुवंशी को टीम में शामिल किया है। म्हात्रे और जायसवाल की अनुपस्थिति में मुंबई को मध्यक्रम के बल्लेबाज सरफराज खान से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। ग्रुप सी में दिल्ली और सेना की टीम अपने शुरुआती मैचों में मिली हार से उबरने की कोशिश करेंगी। उनका सामना क्रमशः गुजरात और बंगाल से होगा।

 गुजरात और बंगाल ने अपने पहले मैचों में जीत हासिल की थी। बंगाल ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में शानदार प्रदर्शन करते हुए दिल्ली को नौ विकेट से हराया था। ग्रुप ए में उत्तर प्रदेश ने बिहार को पारी और 267 रन से हराकर अपने अभियान की शानदार शुरुआत की थी और अब उसका मुकाबला गोवा से होगा। 

दूसरी तरफ गोवा अपने पहले मैच में बड़ौदा के खिलाफ पारी और 135 रन की हार से उबरने की कोशिश करेगा। प्लेट ग्रुप में अनुभवी घरेलू क्रिकेटर नीलम ओबी सिक्किम के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश की कप्तानी करेंगी। अरुणाचल राज्य क्रिकेट संघ में प्रशासनिक संकट के कारण अपना पहले दौर का मैच नहीं खेल पाया था।

Sat, 17 Oct 2026 14:33:00 +0530

  Videos
See all

News18 UP Mega Survey: सर्वे में CM Yogi का जलवा, क्या बोली Ghaziabad की जनता? | Public Reaction #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-17T09:15:29+00:00

Breaking News Live : हिरासत में अभिजीत दीपके पर सबसे बड़ा अपडेट, जानिए पूरा मामला ! | CJP Protest #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-17T09:14:25+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers