ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की सोच नहीं बदली, अब भी वो हासिल करना चाहते हैं द्वीप: डेनमार्क की पीएम
म्यूनिख, 15 फरवरी (आईएएनएस)। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पाने की ख्वाहिश में कोई बदलाव नहीं आया है।
फ्रेडरिक्सन ने शनिवार (लोकल टाइम) को म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के एक पैनल में कहा, मुझे लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इसे लेकर बहुत गंभीर हैं वो अब भी इस द्वीप को हासिल करने की ख्वाहिश रखते हैं।
उन्होंने कहा, हमें स्वायत्त देशों की रक्षा करनी है। हमें लोगों के फैसले लेने के अधिकार की रक्षा करनी है। ग्रीनलैंड के लोग एक चीज को लेकर बहुत स्पष्ट रहे हैं: वे अमेरिकन नहीं बनना चाहते।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्कटिक में यूएस की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए एक यूएस-डेनमार्क-ग्रीनलैंड वर्किंग ग्रुप बनाया गया है।
फ्रेडरिक्सेन ने शुक्रवार को भी इस विषय पर अपने विचार रखे थे। उन्होंने कहा, अब हमारे पास एक वर्किंग ग्रुप है; यह अच्छा है। हम देखेंगे कि क्या हम कोई समाधान ढूंढ सकते हैं... लेकिन बेशक, कुछ लक्ष्मण रेखाएं हैं जिन्हें पार नहीं किया जाएगा और हम अपनी रणनीति पर टिके रहेंगे।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने दावोस में बातचीत के दौरान ट्रंप ने मंच से कहा था कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सेना का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनके इनकार के बाद ग्रीनलैंड पर यूएस के हथियारों के कब्जे की चिंता कम हो गई है।
इस बीच, ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ मीटिंग के बाद ग्रीनलैंड को लेकर आठ यूरोपियन देशों पर नए टैरिफ लगाने की अपनी धमकी पर अमल न करने का भी ऐलान किया।
ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने चेताया था कि अगर अमेरिका द्वीप हासिल नहीं कर पाया तो टैरिफ बढ़कर 25 फीसदी हो जाएगा।
ग्रीनलैंड, दुनिया का सबसे बड़ा आइलैंड, डेनमार्क किंगडम के अंदर एक सेल्फ-गवर्निंग इलाका है, जिसमें कोपेनहेगन का डिफेंस और फॉरेन पॉलिसी पर कंट्रोल है। 2025 में ऑफिस लौटने के बाद से, ट्रंप ने बार-बार ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जताई है; इस कदम का पूरे यूरोप में विरोध हुआ है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
क्या खतरनाक है पीरियड का फ्लो कम होना? जानें कब बरतनी चाहिए सावधानी
नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)। गर्भाशय महिलाओं के शरीर का सबसे जरूरी हिस्सा है, जो उनके शरीर के पूरे स्वास्थ्य से जुड़ा है।
गर्भाशय में थोड़ी सी गड़बड़ी भी किसी भी महिला को बहुत बीमार कर सकती है। इससे थायराइड, शुगर, पीसीओडी, थकावट, बाल झड़ने से लेकर अनगिनत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन आज की जीवनशैली में महिलाएं कम पीरियड फ्लो की समस्या से जूझ रही हैं, लेकिन क्या कम पीरियड फ्लो नुकसानदेह है?
पीरियड का फ्लो गर्भाशय की अंदरूनी परत की मोटाई पर निर्भर करता है, जिसे एंडोमेट्रियम लेयर कहा जाता है। ये परत महिला के गर्भाशय में हर महीने बनती है और गर्भधारण के लिए आवरण को तैयार करती है। गर्भ में बच्चे की अनुपस्थिति में लेयर टूटकर निकलने लगती है और इस सर्कल को ही मासिक धर्म कहा जाता है।
इसी के साथ ध्यान रखने वाली बात ये है कि किसी भी महिला के पीरियड कम होंगे या ज्यादा, ये एंडोमेट्रियम लेयर पर निर्भर करता है। अगर लेयर ठीक से विकसित नहीं होती है, तो पीरियड का फ्लो कम रहता है, जबकि इसके उलट मोटाई ज्यादा होती है, तो हैवी फ्लो रहता है लेकिन हर बार कम फ्लो होना बीमारी नहीं होता।
अगर महिला को हार्मोनल असंतुलन या पीसीओडी नहीं है, वजन तेजी से कम नहीं हो रहा है, शारीरिक गतिविधि ज्यादा नहीं है और गर्भाशय में किसी तरह की सर्जरी या संक्रमण नहीं है, तो कम फ्लो भी सामान्य बात है। चिकित्सकों को मानें तो 21 से लेकर 35 दिन का सर्कल सामान्य होता है और 2 से लेकर 5 दिन का रक्तस्राव सामान्य है। अगर किसी भी महिला को 1 दिन बाद ही रक्तस्राव कम हो जाता है, तो ये खतरे की घंटी है कि जांच करा लेनी चाहिए। वहीं 7 दिन से अधिक का स्राव भी शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
इसके साथ ही अगर पीरियड अनियमित है, पेट दर्द ज्यादा हो रहा है, गर्भधारण में परेशानी हो रही है, और बार-बार पीरियड मिस हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। अपने मासिक चक्र को आहार से संतुलित किया जा सकता है। आहार में प्रोटीन और आयरन से युक्त चीजों का सेवन करें। खूब सारा पानी पीएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखें। रोजाना हल्का व्यायाम भी करें, जिससे गर्भाशय में रक्त का संचार तेजी से होता है, और नींद भी पूरी लें।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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