Mahashivratri Magh Mela Snan 2026: महाशिवरात्रि पर संगम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, माघ मेले के अंतिम स्नान पर बना नया रिकॉर्ड
Mahashivratri Magh Mela Snan 2026: आज यानी 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रयागराज में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. त्रिवेणी संगम पर तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई. ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा मेला क्षेत्र गूंज उठा. माघ मेले के अंतिम दिन ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग ने इस स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया.
माघ मेला 2026 का समापन
संगम की रेती पर सजा माघ मेला 2026 आज अपने 44वें और अंतिम दिन में प्रवेश कर गया है. देशभर से आए श्रद्धालुओं ने संगम स्नान कर पुण्य अर्जित किया. स्नान के बाद भक्त गंगाजल लेकर शिवालयों की ओर रवाना होते दिखे.
अंतिम स्नान पर्व पर संगम तट का नजारा बेहद खास रहा. गाजीपुर से आए शिवभक्त लक्ष्मण सिंह लोगों के आकर्षण का केंद्र बने. डफली और रुद्राक्ष माला के साथ वे भजनों से शिव महिमा का गुणगान करते दिखे. श्रद्धालुओं ने मेले की व्यवस्थाओं की भी सराहना की.
अयोध्या में शिवभक्ति की धूम
महाशिवरात्रि पर अयोध्या पूरी तरह शिवमय नजर आई. तड़के सुबह से ही नागेश्वर नाथ मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए. सरयू स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया. शाम को भव्य शिव बारात निकालने की भी तैयारियां रहीं.
बुलंदशहर में घाटों पर भीड़
बुलंदशहर के रामघाट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. सुरक्षा को देखते हुए ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई. प्राचीन शिव मंदिरों में आधी रात से ही जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा.
मेला प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा. सुबह 6 बजे तक करीब 10 लाख लोगों ने संगम में स्नान किया. अनुमान है कि पूरे दिन में यह संख्या लगभग एक करोड़ तक पहुंच सकती है.
शिव अभिषेक का विशेष महत्व
महाशिवरात्रि पर संगम स्नान के बाद शिवालयों में जलाभिषेक की परंपरा निभाई गई. अन्न, वस्त्र और दान-पुण्य को आज के दिन विशेष फलदायी माना गया. 3.5 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए.
AI कैमरों से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए. पूरे मेला क्षेत्र में 400 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए. इनमें 150 से अधिक AI कैमरे संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं. यूपी पुलिस, पीएसी, आरएएफ और एटीएस की टीमें तैनात रहीं.
22 करोड़ श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड
माघ मेला 2026 ने इतिहास रच दिया है. इस वर्ष अब तक 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं. महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ ही मेले का औपचारिक समापन हो गया. कल्पवासी और श्रद्धालु अगले वर्ष की प्रतीक्षा के साथ विदा हुए.
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सांस के मरीज हों या बढ़ते वजन से परेशान, अर्द्धचक्रासन के पास है समाधान
नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)। सांस की समस्या हो या तेजी से बढ़ता वजन या अन्य शारीरिक -मानसिक समस्याएं आज के समय में सेहतमंद रहने और इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए योगासन को दिनचर्या का हिस्सा बनाना सबसे अच्छा विकल्प है। योगासन से तन मन दोनों सेहतमंद रहते हैं। एक्सपर्ट लाभकारी अर्द्धचक्रासन के नियमित अभ्यास की सलाह देते हैं।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (एमडीएनआईवाई) अर्द्धचक्रासन को एक अत्यंत लाभकारी योगासन मानता है, जो विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ाने, पीठ दर्द से राहत दिलाने, सांस के मरीजों या बढ़ते वजन की समस्या के साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक होता है।
इसे हाफ व्हील पोज के नाम से भी जाना जाता है। जिन लोगों का योगासन अभ्यास अभी शुरुआती स्तर है, उनके लिए भी ये पोज काफी सरल और प्रभावी है। नियमित अभ्यास से यह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
एक्सपर्ट के अनुसार, अर्द्धचक्रासन करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं, पैरों को कंधों की चौड़ाई जितना अलग रखें और दोनों हाथों को शरीर के साथ लटकाए रखें। अब धीरे-धीरे दोनों हाथों को कमर के पीछे ले जाएं और गहरी सांस लें और सिर को धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकाएं, गर्दन में हल्का खिंचाव महसूस करें। फिर कमर से ऊपरी शरीर को पीछे की ओर मोड़ें, सांस को सामान्य रखते हुए इस स्थिति को 10 से 30 सेकंड तक बनाए रखें। शुरुआत में कम समय से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। अंत में सिर और शरीर को धीरे-धीरे सीधा करें, हाथ छोड़कर सामान्य स्थिति में आ जाएं। इसे 3 से 5 बार दोहराया जा सकता है।
इस आसन के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है, जिससे पीठ दर्द, कमर दर्द और कंधों की जकड़न में राहत मिलती है। कंधे, बाजुओं, छाती और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। फेफड़ों की क्षमता बढ़ने से सांस संबंधी समस्याएं जैसे अस्थमा में सुधार होता है। पाचन क्रिया बेहतर होती है और कब्ज जैसी समस्या दूर होती है। तनाव, चिंता और मानसिक अशांति कम होती है। मुद्रा में सुधार आता है, ऊपरी पीठ की अतिरिक्त चर्बी घटती है और थायरॉइड, पिट्यूटरी ग्रंथियां सक्रिय रहती हैं।
हालांकि, कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। यदि रीढ़, गर्दन, कंधे, कमर या कलाई में कोई पुरानी चोट, गंभीर दर्द या स्लिप डिस्क जैसी समस्या है तो यह आसन नहीं करना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, ग्लूकोमा, माइग्रेन या बार-बार चक्कर आने वाले लोगों को इससे परहेज करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान या हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
--आईएएनएस
एमटी/एएस
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