हाथों में कलाश्निकोव और यहूदियों को गोली मारने की इच्छा, सामने आई पूर्व हमास चीफ के बेटे की चिट्ठी
इजरायल रक्षा बलों (IDF) ने पूर्व हमास नेता याह्या सिनवार के 10 वर्षीय बेटे इब्राहिम द्वारा युद्ध की शुरुआत में कथित तौर पर लिखे गए एक पत्र का खुलासा किया है। इस पत्र में बच्चे ने कलाश्निकोव (AK-47) राइफल थामने और यहूदियों को गोली मारने की अपनी इच्छा व्यक्त की है। यह पत्र 2024 में गाजा पट्टी में इजरायली सैनिकों द्वारा बरामद किया गया था, जिसे सिनवार के मारे जाने की दो साल पूरे होने की बरसी के अवसर पर जारी किया गया है। अपने पिता को संबोधित इस पत्र में संघर्ष के दौरान बच्चे की सोच की एक झलक मिलती है, जिसमें स्नेह और विरह के भावों के साथ-साथ यहूदियों के खिलाफ प्रत्यक्ष हिंसा का भी जिक्र है। IDF ने इस पत्र और उसके साथ मिले चित्रों को इस बात के प्रमाण के रूप में पेश किया है कि हमास की नफरत और सशस्त्र संघर्ष की विचारधारा गाजा की युवा पीढ़ी को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है।
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पत्र में इब्राहिम लिखता है कि उसे अपने पिता की याद आ रही है और वह उनके लौटने पर उन्हें गले लगाना चाहता है। साथ ही, वह अपने पिता को विजयी होते देखना चाहता है, अल्लाहु अकबर का नारा लगाना चाहता है और यहूदियों के खिलाफ कलाशनिकोव का इस्तेमाल करना चाहता है। इजरायली सेना द्वारा जारी अनुवाद के अनुसार, पत्र में लिखा है मैं लगातार कागज और गत्ते से पिस्तौल, टैंक और कलाशनिकोव बना रहा हूँ। कलाशनिकोव गैस-संचालित असॉल्ट राइफलों के एक परिवार से संबंधित है, जिसका नाम रूसी लेफ्टिनेंट जनरल और छोटे हथियारों के डिज़ाइनर मिखाइल कलाशनिकोव के नाम पर रखा गया है। बच्चा यह भी पूछता है कि उसके पिता कब लौटेंगे और उसे अपनी बाहों में लेकर सोएंगे। यह हिंसक भाषा के साथ-साथ उसकी निजी तड़प को भी उजागर करता है। इब्राहिम ने खत के आखिर में लिखा मेरे मालिक, काश यह जंग खत्म हो जाए और मैं आपको सही-सलामत देख सकूँ। अल्लाह आपकी हिफाज़त करे, अब्बा। मैं चाहता हूँ कि आप मेरे लिए दुआ करें।
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तस्वीरों में इज़राइल पर हथियारों और हमलों को दर्शाया गया है
पत्र के साथ इब्राहिम द्वारा बनाए गए कुछ चित्र भी थे, जिनमें हथियार, गाजा पट्टी और इज़राइल को अलग करने वाली सीमा बाड़ के पास तैनात टैंक, और इज़राइली क्षेत्र की ओर दागी जा रही मिसाइलें दिखाई गई हैं। आईडीएफ के अनुसार, यह सामग्री 2024 में गाजा में तैनात इजरायली सैनिकों को मिली थी। सेना ने अपने आधिकारिक संचार माध्यमों से ये दस्तावेज जारी किए हैं, जो यह दिखाते हैं कि संघर्ष के बीच पल रहे बच्चों पर हमास की उग्रवादी विचारधारा का क्या असर पड़ा है। इन चित्रों और पत्र में हथियारों तथा यहूदियों पर गोली चलाने के जिक्र ने इस बात की ओर ध्यान खींचा है कि संघर्ष और अपने विरोधियों के बारे में बच्चों की सोच बनाने में राजनीतिक और उग्रवादी विचारधाराओं की क्या भूमिका होती है। यह पत्र गाजा के परिवारों पर युद्ध के व्यापक परिणामों को भी दर्शाता है, जहाँ बच्चों ने लंबे समय तक हिंसा, विस्थापन और अपने रिश्तेदारों से बिछड़ने का दर्द झेला है।
सिनवार की विरासत अभी भी जांच के दायरे में है
याह्या सिनवार, जिसने गाजा में हमास का नेतृत्व किया और 2024 में पूरे संगठन का प्रमुख बन गया, उसे उसी साल अक्टूबर में इजरायली सेना ने मार गिराया। इजरायल का मानना था कि 7 अक्टूबर 2023 के हमलों का मुख्य सूत्रधार वही था, जिसकी वजह से गाजा में युद्ध शुरू हुआ। IDF द्वारा इस पत्र को जारी किए जाने के बाद, सिनवार की विरासत और हमास से जुड़ी जिहादी विचारधारा पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
Night Shift करने वाली महिलाओं में Breast Cancer का खतरा, रिसर्च में सामने आया कनेक्शन
प्रत्येक वर्ष अक्तूबर का महीना ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रुप में जाना जाता है। इस बार इसकी थीम है 'Every Story is Unique, Every Journey Matters'। आजकल सबसे ज्यादा महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो रही हैं। ऐसे में कई महिलाएं आईटी कंपनियों, बीपीओ, अस्पतालों और दूसरी जगहों पर नाइट शिफ्ट में काम करती हैं। नाइट शिफ्ट में रात भर जागना होता है। इसलिए उनका रूटीन रातभर जागना और दिन में सोना बन ही जाता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि रात में लगातार काम करने का असर आपकी सेहत को खराब कर सकता है। एक रिसर्च के अनुसार, लंबे समय तक नाइट शिफ्ट करने और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध बताया है। ऐसे में रात में काम करने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा है, आइए आपको बताते हैं क्या कहती है रिसर्च?
रात में काम करने से ब्रेस्ट कैंसर का क्या है कनेक्शन?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने साल 2019 में रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को कैंसर का खतरा बढ़ाने वाला माना था, जिनको ग्रुप 2A में रखा गया था। असल में इस क्लासिफिकेशन में उन महिलीओं को रखा गया था, जिसमें ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित कुछ सबूत मिले थे। इसका मतलब यह नहीं है कि नाइट शिफ्ट करने वाली हर महिला को कैंसर होगा।
डॉक्टर ने नाइट शिफ्ट करने वाली महिलाओं को क्या सलाह दी?
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, भारत में बहुत-सी महिलाए नाइट शिफ्ट में काम करती है। लंबे समय तक नींद और जागने के बदलते रुटीन को जरुर गंभीरता से लेना चाहिए। रिसर्च में नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध देखने को मिला है, हालांकि दोनों के बीच संबंध मिलने का मतलब यह नहीं है कि नाइट शिफ्ट करने के कारण कैंसर हो सकता है।
क्या कहती है ब्रेस्ट कैंसर पर हुई रिसर्च?
बात करें साल 2022 में प्रकाशित एक रिसर्च की, तो 33 स्टडी सामने आई थीं, जिसमें करीब 43 लाख लोगों को शामिल किया गया था। इस स्टडी में पता चला था कि रात की शिफ्ट में कार्य करने से 20 परसेंट महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा देखने को मिला था। लेकिन हर रिसर्च में एक जैसे नतीजे देखने को मिले नहीं है। कुछ बड़ी स्टड़ी में नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध न होने की बात कही गई है।
इतना ही नहीं, साल 2024 में प्रकाशित एक रिव्यू में भी इस टॉपिक पर हुई नए रिसर्च को स्टडी किया गया था। इसमें लंबे समय तक लगातार या बार-बार नाइट शिफ्ट करने और ब्रेस्ट कैंसर के संबंध होने के कुछ संकेत देखने को मिले थे।
लेकिन, इसको लेकर पुख्ता नतीजे तक पहुंचने के लिए अभी और रिसर्च की जरुरत है। सबसे जरुरी बात यह है कि रिसर्च में सामने आया 20% ही खतरा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि नाइट शिफ्ट करने वाली हर पांच में से एक महिला को ब्रेस्ट कैंसर होगा।
नाइट शिफ्ट करने वाली महिलाएं अपनी सेहत का ख्याल कैसे रखें?
- रोजाना जब भी आप सोएं तो एक समय पर ही नींद लें और ज्यादा से ज्यादा सोने की जरुरत है।
- दिन में सोते समय कमरे में पर्दे लगाएं, जिससे बाहर की रोशनी कमरे में न आएं।
- जब आप सोएं तो शोर कम करें, ताकि आपकी नींद बार-बार न टूटे।
- यदि आपको लंबे समय से नींद नहीं आ रही है, तो डॉक्टर से सलाह जरुर लें।
- ध्यान रखें कि, जब भी आपको ब्रेस्ट में गांठ, स्किन में चेंज या निप्पल से डिस्चार्ज जैसी परेशानी दिखे, तो डॉक्टर से जांच करवाएं।
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